दिल्ली सरकार ने वर्क-फ्रॉम-होम नीति समाप्त की, पश्चिम एशिया में सीजफायर के बाद सामान्य कार्यालय समय बहाल
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 4 जुलाई 2026 को अपने कर्मचारियों के लिए लागू वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था और स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जो अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबरों और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य होने के बाद लिया गया निर्णय है। इस फैसले के साथ ही मई 2026 में शुरू की गई यह अस्थायी हाइब्रिड कार्य व्यवस्था अब पूरी तरह वापस ले ली गई है।
नियमित कार्यालय समय बहाल
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, 'अब जबकि पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति लगभग सामान्य हो चुकी है, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार और शनिवार को लागू वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को वापस लेने की मंजूरी दे दी है।' इस आदेश के लागू होते ही दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारी पूर्ववत सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहेंगे।
हालाँकि, दिल्ली नगर निगम (MCD) के कर्मचारियों के कार्यालय समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। उनके कार्यालय पहले की भाँति सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होते रहेंगे।
क्यों लागू की गई थी यह व्यवस्था
दिल्ली सरकार ने यह हाइब्रिड कार्य नीति मई 2026 में उस समय लागू की थी, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहरी अनिश्चितता बनी हुई थी। उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन के जिम्मेदार उपयोग और सरकारी खर्च में मितव्ययिता बरतने की अपील की थी।
गौरतलब है कि यह पहली बार था जब दिल्ली सरकार ने किसी बाहरी भू-राजनीतिक संकट के मद्देनज़र अपनी आंतरिक कार्य व्यवस्था में इस स्तर का बदलाव किया। इससे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान भी इसी तरह की हाइब्रिड व्यवस्था अपनाई गई थी।
ईंधन बचत के लिए उठाए गए अन्य कदम
वर्क-फ्रॉम-होम के अलावा दिल्ली सरकार ने उस अवधि में कई अन्य उपाय भी किए थे। सरकारी बैठकों में से लगभग आधी बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया, जिससे अधिकारियों की यात्रा और ईंधन खपत में कमी आई। इसके साथ ही अधिकारियों के लिए मासिक पेट्रोल कोटा 20 प्रतिशत घटाया गया था — यानी निर्धारित 200 लीटर की सीमा में कटौती की गई।
सरकार ने यह भी तय किया था कि छह महीने तक कोई नया सरकारी वाहन नहीं खरीदा जाएगा। पीक आवर्स में यातायात का बोझ कम करने के लिए विभिन्न विभागों में अलग-अलग कार्यालय समय लागू किए गए थे।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
इस निर्णय से दिल्ली सरकार के हज़ारों कर्मचारी सीधे प्रभावित होंगे, जो पिछले कुछ हफ्तों से सप्ताह में दो दिन घर से काम कर रहे थे। अब उन्हें पाँचों कार्यदिवस कार्यालय में उपस्थित रहना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजधानी में पीक आवर्स के दौरान यातायात दबाव फिर से बढ़ सकता है।
आगे की स्थिति
पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के साथ ही दिल्ली सरकार ने संकेत दिया है कि ऊर्जा बचत से जुड़े अन्य अस्थायी उपायों की समीक्षा भी की जाएगी। यदि भविष्य में वैश्विक ऊर्जा संकट फिर उभरता है, तो सरकार इसी तर्ज पर पुनः नीतिगत बदलाव कर सकती है — यह इस पूरे प्रकरण का एक महत्वपूर्ण सबक है।