दिल्ली में 'मेट्रो मंडे' की सफलता के बाद WFH नीति लागू, बुध-शनि को घर से काम करेंगे सरकारी कर्मचारी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 20 मई 2026 को 'वर्क-फ्रॉम-होम' अभियान को औपचारिक नीति का रूप दे दिया है — हर सप्ताह बुधवार और शनिवार को मंत्री, अधिकारी और सरकारी कर्मचारी दफ्तर की बजाय घर से काम करेंगे। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन और ऊर्जा बचत की अपील के अनुरूप उठाया गया है, और स्वयं वे भी इस नीति का पालन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक — सब घर से काम कर रहे हैं
मंत्री मिश्रा के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 'जन सेवा केंद्र' के माध्यम से सरकारी कामकाज संभाल रही हैं। मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अपनी अधिकांश बैठकें ऑनलाइन माध्यम से आयोजित कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी ईंधन खपत घटाने के लिए नागरिकों और संस्थाओं से सहयोग माँग रही है।
'मेट्रो मंडे' को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया
इस पूरे अभियान की नींव 'मेट्रो मंडे' पहल ने रखी, जिसके तहत नागरिकों को सोमवार को निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। मंत्री मिश्रा ने बताया कि इस पहल में लोगों की भागीदारी इतनी अधिक रही कि दिल्ली मेट्रो को अपनी फेरों की संख्या बढ़ानी पड़ी और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) को भी फीडर सेवाओं का विस्तार करना पड़ा। उनके अनुसार, सड़कों पर यातायात का दबाव पहले से कम होता दिख रहा है।
कारोबारी जगत का भी समर्थन
मंत्री मिश्रा ने मंगलवार को दिल्ली के बड़े कारोबारी संस्थानों के प्रतिनिधियों और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की दिल्ली इकाई के साथ एक बैठक की। इस बैठक में लगभग सभी प्रमुख कारोबारी संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे, और उन्होंने अपने-अपने कार्यस्थलों पर 'वर्क-फ्रॉम-होम' तथा 'कारपूलिंग' लागू करने पर सहमति जताई।
आम जनता पर असर
अभियान के समर्थकों का कहना है कि यदि निजी क्षेत्र भी इसी राह पर चला, तो दिल्ली-NCR में ईंधन की खपत और वायु प्रदूषण दोनों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। मंत्री मिश्रा ने कहा कि धीरे-धीरे यह पहल लोगों की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनती जा रही है।
आगे की राह
दिल्ली सरकार का इरादा सार्वजनिक परिवहन और साझा परिवहन प्रणालियों के उपयोग को और बढ़ावा देने का है। 'मेट्रो मंडे' और 'वर्क-फ्रॉम-होम' नीति को एक व्यापक ऊर्जा-बचत रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसे आने वाले हफ्तों में और विस्तार दिया जा सकता है।