मिजोरम में ईंधन संकट के बीच वर्क फ्रॉम होम और 'नो व्हीकल बुधवार' लागू, 21 मई से प्रभावी
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम सरकार ने 20 मई 2025 को पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक ईंधन मूल्यवृद्धि के मद्देनज़र कई अस्थायी प्रशासनिक उपायों की घोषणा की, जो 21 मई से प्रभावी हो गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी ऑफिस मेमोरैंडम में वर्क फ्रॉम होम, कार्यालय समय में बदलाव और सरकारी यात्राओं पर प्रतिबंध समेत कई कदमों का उल्लेख है। ये उपाय प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने और आर्थिक समझदारी की अपील के अनुपालन में अपनाए गए हैं।
उपायों का विवरण
नई गाइडलाइंस के तहत प्रत्येक सरकारी विभाग के 20 प्रतिशत कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। हालाँकि, चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाएँ, जल-विद्युत आपूर्ति, परिवहन, आपदा राहत और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभागों को इस व्यवस्था से छूट दी गई है। विभागों को निर्देश दिया गया है कि ड्यूटी रोस्टर इस प्रकार तैयार किया जाए जिससे जनसेवाएँ बाधित न हों।
कार्यालय समय और 'नो व्हीकल बुधवार'
आइजोल स्थित विभागों के लिए कार्यालय समय दो पालियों में विभाजित किया गया है — पहला समूह सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक और दूसरा समूह सुबह 10:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक कार्य करेगा। इससे यातायात जाम और ईंधन की खपत दोनों में कमी आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बुधवार को 'कोई सरकारी गाड़ी नहीं' दिवस घोषित किया गया है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को पैदल चलने या सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
अन्य प्रशासनिक निर्देश
मेमोरैंडम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अधिकतम उपयोग, वीआईपी काफिलों का आकार घटाने, विदेश एवं अन्य राज्यों की सरकारी यात्राओं पर रोक और सरकारी दफ्तरों में बिजली बचत उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभागों को औपचारिक कार्यक्रमों और आतिथ्य व्यय को न्यूनतम रखने की सलाह भी दी गई है।
संकट की पृष्ठभूमि
मेमोरैंडम में स्पष्ट किया गया है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में रुकावटों के कारण वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत अपनी कुल आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जो देश को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवधानों और मूल्य उछाल के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
आगे की राह
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये सभी उपाय अस्थायी प्रकृति के हैं और वैश्विक स्थिति सामान्य होने पर इनकी समीक्षा की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि इन कदमों का लक्ष्य ईंधन संकट के आर्थिक प्रभाव को कम करने के राष्ट्रीय प्रयासों में सहभागिता करना है।