दिल्ली स्वास्थ्य विभाग मेडिकल खरीद घोटाला: ACB ने राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की 12,000 पन्नों की चार्जशीट, तीन आरोपी नामजद
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कथित मेडिकल खरीद घोटाले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने 16 सितंबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट में करीब 12,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में पूर्व डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल, डॉ. विनोद कुमार रंगा और नीरज चोपड़ा को आरोपी के रूप में नामजद किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ACB के अनुसार, यह मामला दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल उपकरणों, दवाइयों, सर्जिकल सामान और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सामग्री की खरीद एवं आपूर्ति में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जाँच एजेंसी का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ चुनिंदा सप्लायर्स को अनुचित लाभ पहुँचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि ACB ने इस मामले में 2 जून को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। जाँच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जून में ही तत्कालीन DGHS वत्सला अग्रवाल और DGHS की केंद्रीय खरीद एजेंसी के तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया था।
किन खरीद प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी का आरोप
चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, बेडशीट और लिनन सामग्री, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओआरएस, सर्जिकल सामान, दवाइयाँ और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित रूप से व्यापक स्तर पर गड़बड़ियाँ की गईं।
शिकायत के अनुसार, निविदा (टेंडर) की शर्तों और तकनीकी मानकों में कथित हेरफेर कर कुछ विशेष कंपनियों एवं सप्लायर्स को लाभ पहुँचाया गया। इसके साथ ही वास्तविक प्रतिस्पर्धियों को खरीद प्रक्रिया से बाहर रखने के आरोप भी लगाए गए हैं।
चार्जशीट में लगाई गई धाराएँ
आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7ए और 13(1)(2) के तहत आरोप शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 316(5), 318(4) और 238 के अंतर्गत भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
ACB का दावा है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर खरीद प्रक्रिया, टेंडर शर्तों और तकनीकी विनिर्देशों में कथित हेरफेर किया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचा।
साक्ष्यों का आधार
जाँच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ और जाँच के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए। खरीद प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही आरोपियों की भूमिका सामने आई बताई जा रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य खरीद की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल यह चार्जशीट अब अदालती प्रक्रिया का अगला अहम पड़ाव होगी, जहाँ आरोपियों को आरोप-पत्र का जवाब देना होगा।