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दिल्ली मास्टर प्लान 2047: वर्टिकल ग्रोथ, यमुना कनेक्टर और ₹TOD — मंत्री आशीष सूद ने गिनाईं खूबियाँ

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दिल्ली मास्टर प्लान 2047: वर्टिकल ग्रोथ, यमुना कनेक्टर और ₹TOD — मंत्री आशीष सूद ने गिनाईं खूबियाँ

सारांश

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 सिर्फ नक्शे पर रेखाएँ नहीं — यह जमीन की कमी से जूझते शहर के लिए ऊपर उठने का फॉर्मूला है। वर्टिकल डेवलपमेंट, 200 किमी पार्क कनेक्टर्स, TOD और यमुना सफाई — मंत्री आशीष सूद ने इसे विकसित भारत की राजधानी बनाने का रोडमैप बताया।

मुख्य बातें

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 को मंत्री आशीष सूद ने 21 अगस्त 2026 को 'विकसित भारत की राजधानी' बनाने का रोडमैप बताया।
प्लान्ड इलाकों में 3,000 वर्ग मीटर और अनधिकृत कॉलोनियों में 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्रों का सामूहिक पुनर्विकास प्रस्तावित।
मेट्रो लाइनों के 500 मीटर दायरे में किफायती आवास; 50 किमी साइकिल ट्रैक और 200 किमी से अधिक पार्क कनेक्टर्स का प्रावधान।
यमुना नालों पर STP लगाने का काम जारी; गृह मंत्री अमित शाह की अगुआई और CM रेखा गुप्ता के नेतृत्व में परियोजना आगे बढ़ रही है।
'कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान' पहली बार मास्टर प्लान में शामिल, भूमि उपयोग और परिवहन को एकीकृत करेगा।

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने 21 अगस्त 2026 को दिल्ली मास्टर प्लान 2047 को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की और कहा कि यह दस्तावेज़ महज एक योजना नहीं, बल्कि राजधानी को 'विकसित भारत' की प्रतिनिधि राजधानी के रूप में स्थापित करने का ठोस रोडमैप है। उन्होंने यमुना की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और शहरी पुनर्विकास के मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।

वर्टिकल विकास और पुनर्विकास का खाका

मंत्री सूद ने कहा, 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047 से यह साफ हो गया है कि भले ही दिल्ली में जमीन सीमित है, लेकिन शहर का विजन सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली अब ऊपर की ओर बढ़ेगी।' उन्होंने बताया कि प्लान्ड इलाकों में 3,000 वर्ग मीटर के क्षेत्रों के पुनर्विकास का रास्ता साफ किया गया है। इसमें 1.5 के फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) के साथ बने DDA फ्लैट्स का पुनर्विकास शामिल है, जिससे बड़े और बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध होंगे।

सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि अनधिकृत कॉलोनियों में 2,000 वर्ग मीटर के क्षेत्रों को सामूहिक रूप से विकसित किया जाएगा। चूँकि दिल्ली में नई भूमि का विस्तार संभव नहीं है, यह प्लान मौजूदा संपत्तियों के पुनर्विकास को प्राथमिकता देता है।

ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट: प्रदूषण का समाधान

ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को मास्टर प्लान की एक प्रमुख विशेषता बताते हुए मंत्री ने कहा कि इसके ज़रिए प्रदूषण और परिवहन से जुड़ी समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सकता है। मेट्रो लाइनों के 500 मीटर के दायरे में किफायती आवास निर्मित किए जाएंगे, ताकि नागरिक सीधे मेट्रो से अपने कार्यस्थल तक पहुँच सकें और निजी वाहनों पर निर्भरता घटे।

इस बार मास्टर प्लान में 'कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान' को भी शामिल किया गया है, जो भूमि उपयोग को परिवहन प्रणाली से सीधे जोड़ता है। इसका उद्देश्य मेट्रो, सड़कों और सार्वजनिक परिवहन को एकीकृत करना और नई परिधीय सड़कों के निर्माण से जुड़ी अड़चनों को दूर करना है।

यमुना और हरित दिल्ली की परिकल्पना

यमुना को शहर से जोड़ने की योजना पर मंत्री सूद ने कहा, 'इस बार मास्टर प्लान में शहर को यमुना के किनारे वाले इलाकों से जोड़ने के लिए रिवर कनेक्टर्स का प्रावधान है।' इसके अलावा अरावली में हरित क्षेत्र विकसित करने, 50 किलोमीटर के साइकिल ट्रैक और 200 किलोमीटर से अधिक 'पार्क कनेक्टर्स' बनाने का प्रस्ताव भी इस प्लान में शामिल है।

साहिबी नदी के आसपास के खाली पड़े और कचरे से भरे इलाकों को अब पार्कों के रूप में विकसित किया जाएगा और आसपास के हरित क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। सूद ने इसे दिल्ली के दूरदर्शी विकास की दिशा में एक ठोस कदम बताया।

यमुना सफाई: नालों पर STP का काम जारी

यमुना की सफाई के सवाल पर मंत्री ने स्वीकार किया कि 'सालों तक यमुना में गिरने वाले नालों पर कोई काम नहीं हुआ।' उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुआई में यमुना में मिलने वाले नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने का काम पहले से चल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है।

आगे की राह

मास्टर प्लान 2047 के क्रियान्वयन की समयसीमा और वित्तीय ढाँचे का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि TOD और वर्टिकल डेवलपमेंट जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता निजी निवेश, नीतिगत स्थिरता और ज़मीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। दिल्ली के करोड़ों निवासियों के लिए यह प्लान आवास, परिवहन और पर्यावरण — तीनों मोर्चों पर बड़े बदलाव का वादा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — दिल्ली के पिछले मास्टर प्लान (2021) के कई प्रावधान भी कागज़ों से ज़मीन पर नहीं उतर पाए। TOD और वर्टिकल डेवलपमेंट के लिए निजी निवेश, भूमि अधिग्रहण और नौकरशाही समन्वय की जो माँग है, उसका कोई स्पष्ट वित्तीय खाका अभी सामने नहीं आया है। यमुना सफाई का श्रेय लेने की होड़ राजनीतिक रूप से समझ में आती है, लेकिन STP की प्रगति और नालों की वास्तविक स्थिति के स्वतंत्र सत्यापन के बिना दावे अधूरे हैं। 2047 का लक्ष्य दूर है — पर 2026 में जो नींव रखी जाए, वही तय करेगी कि यह रोडमैप इतिहास बनेगा या बस एक और दस्तावेज़।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 क्या है और इसमें क्या खास है?
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 राजधानी के दीर्घकालिक शहरी विकास का青प्रिंट है, जिसमें वर्टिकल डेवलपमेंट, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट, यमुना रिवर कनेक्टर्स और 200 किमी से अधिक पार्क कनेक्टर्स शामिल हैं। इस बार पहली बार 'कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान' को भी इसमें जोड़ा गया है।
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में DDA फ्लैट्स के पुनर्विकास का क्या प्रावधान है?
प्लान्ड इलाकों में 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 1.5 FAR के साथ बने DDA फ्लैट्स का पुनर्विकास किया जाएगा, जिससे निवासियों को बड़े और आधुनिक आवास मिल सकेंगे। अनधिकृत कॉलोनियों में 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्रों को सामूहिक रूप से विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
TOD यानी ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट दिल्ली के प्रदूषण को कैसे कम करेगा?
TOD के तहत मेट्रो लाइनों के 500 मीटर के दायरे में किफायती आवास बनाए जाएंगे, जिससे लोग सीधे मेट्रो से आवागमन कर सकेंगे और निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी। इससे सड़कों पर ट्रैफिक और उससे होने वाले प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।
यमुना सफाई के लिए मास्टर प्लान 2047 में क्या कदम उठाए गए हैं?
मास्टर प्लान में यमुना में मिलने वाले नालों पर STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने का काम जारी है और रिवर कनेक्टर्स के ज़रिए यमुना को शहर के बाकी हिस्सों से जोड़ा जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह की अगुआई और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह परियोजना आगे बढ़ रही है।
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 से आम दिल्लीवासियों को क्या फायदा होगा?
आम नागरिकों को बड़े और आधुनिक आवास, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, साइकिल ट्रैक, पार्क और हरित क्षेत्र मिलेंगे। TOD से रोज़मर्रा के आवागमन में सुविधा और प्रदूषण में कमी आने की संभावना है, जबकि यमुना सफाई से पर्यावरणीय गुणवत्ता बेहतर होगी।
राष्ट्र प्रेस
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