दिल्ली-एनसीआर में CNG महंगी: परिवहन संगठनों की हड़ताल चेतावनी, 9 तारीख की रात 1 लाख ऑटो-टैक्सी सड़क से हटने का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद परिवहन क्षेत्र के प्रमुख संगठन सरकार के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ सहित कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी माँगें नहीं मानीं, तो 9 तारीख की रात 12 बजे के बाद करीब 1 लाख ऑटो और काली-पीली टैक्सियाँ सड़कों से हट सकती हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि सरकार ने वर्षों तक CNG को प्रदूषण-नियंत्रण और डीजल के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया, जिसके चलते बड़ी संख्या में वाहन इस ईंधन पर स्थानांतरित हुए। उनके अनुसार, अब अचानक दाम बढ़ाए जाने से उन वाहन-चालकों और कारोबारियों पर दोहरी मार पड़ रही है जिन्होंने सरकारी प्रोत्साहन पर भरोसा किया था।
कपूर ने यह भी सवाल उठाया कि केवल दिल्ली में CNG महंगी किए जाने के पीछे कहीं लोगों को CNG से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की ओर धकेलने की नीति तो नहीं है। उन्होंने सरकार से इस बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की माँग की।
ऑटो-टैक्सी चालकों पर असर
दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने बताया कि पिछले करीब ढाई महीनों में CNG की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग ₹12 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है। उनका कहना है कि ऑटो और टैक्सी चालकों की परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। फिटनेस शुल्क में वृद्धि का बोझ पहले से ही चालकों पर है।
सोनी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान ऑटो चालकों के लिए कल्याण बोर्ड बनाने समेत कई वादे किए गए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद इन मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दिल्ली सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं को पत्र लिखकर बैठक बुलाने की माँग की है।
आम जनता और कारोबार पर असर
राजेंद्र कपूर के अनुसार, CNG की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ केवल ट्रांसपोर्टरों तक सीमित नहीं रहेगा। फैक्ट्रियों में माल ढुलाई, जॉब वर्क और छोटे कारोबारों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली छोटी CNG मालवाहक गाड़ियों की लागत बढ़ने से धीरे-धीरे उत्पादों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर अंततः आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर की परिवहन व्यवस्था में ऑटो और काली-पीली टैक्सियाँ लाखों यात्रियों के दैनिक आवागमन की रीढ़ हैं। यदि हड़ताल होती है, तो मेट्रो और बस सेवाओं पर असाधारण दबाव पड़ सकता है।
हड़ताल की चेतावनी और अल्टीमेटम
राजेंद्र सोनी ने स्पष्ट किया कि संगठन सरकार से टकराव नहीं चाहते और बातचीत के ज़रिए समाधान के पक्षधर हैं। हालाँकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते बैठक नहीं बुलाई और माँगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 9 तारीख की रात 12 बजे के बाद करीब 1 लाख ऑटो और काली-पीली टैक्सियाँ दिल्ली की सड़कों से हट सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति के लिए दिल्ली सरकार जिम्मेदार होगी।
क्या होगा आगे
परिवहन संगठनों की प्रमुख माँगों में CNG मूल्य वृद्धि वापस लेना, ऑटो और टैक्सी किराये में संशोधन, कल्याण बोर्ड का गठन और फिटनेस शुल्क में राहत शामिल हैं। अब गेंद दिल्ली सरकार के पाले में है — यदि 9 तारीख से पहले कोई सार्थक बातचीत नहीं होती, तो राजधानी की परिवहन व्यवस्था बड़े संकट में पड़ सकती है।