धर्मांतरण और संख्या बल: हिंदू राष्ट्र की जिम्मेदारी सबको साथ लेकर चलना है

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धर्मांतरण और संख्या बल: हिंदू राष्ट्र की जिम्मेदारी सबको साथ लेकर चलना है

सारांश

सुरेश जोशी ने पुणे में धर्मांतरण और संख्या बल पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो सभी को एक साथ लेकर चले। भारत को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

मुख्य बातें

धर्मांतरण के पीछे संख्या बल बढ़ाने की सोच है।
सच्चा नेतृत्व सभी को साथ लेकर चलने में है।
भारत को पूरी दुनिया को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी है।
Aशांति और न्याय की स्थापना के लिए एकजुटता का महत्व है।
हिंदू विचारधारा 'सबको साथ लेकर चलना' पर आधारित है।

पुणे, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश जोशी (भैय्याजी) ने गुरुवार को कहा कि धर्मांतरण के पीछे संख्या बल बढ़ाने की सोच काम कर रही है, लेकिन दुनिया का सच्चा नेतृत्व वही कर सकता है, जो सबको साथ लेकर चले।

उन्होंने पुणे में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "धर्मांतरण, मुसलमान बनाना, क्रिश्चियन बनाना, जो यह सिलसिला शुरू हुआ, इसके पीछे का मनोभाव यह है कि जिनके पास संख्या ज्यादा होगी, उन्हें दुनिया की शक्ति के रूप में पहचाना जाएगा। लेकिन इसी कालखंड में एक तीसरा भी समूह था, सोचने वाला।"

उन्होंने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहता कि वह भारत का था, बल्कि दुनिया के ईमानदार और गंभीर तत्वज्ञानी लोग थे। उन्होंने कहा कि जो सबको साथ लेकर चलेगा, वही दुनिया का नेतृत्व करेगा और यह काम केवल और केवल भारत ही कर सकता है, कोई और नहीं।

उन्होंने आगे कहा, "इसी कारण पूरी दुनिया को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी भारत की है, यानी हिंदुओं की है और एक अर्थ में हिंदू राष्ट्र की है। सबको साथ लेकर चलना है। इसी से शांति स्थापित होगी, सत्य स्थापित होगा, न्याय स्थापित होगा। अन्याय समाप्त होगा और अशांति समाप्त होगी।"

भैय्याजी जोशी ने कहा कि आज दुनिया में अशांति का मुख्य कारण दो विचारों में, भौतिक संपदा और संख्याबल में छिपा है। इन दोनों के कारण लोग एक-दूसरे को दबाने और संख्या बढ़ाने की होड़ में लगे हुए हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की संस्कृति और हिंदू विचारधारा का मूल मंत्र 'सबको साथ लेकर चलना' है। यही विचारधारा विश्व में सच्ची शांति, न्याय और समरसता स्थापित कर सकती है। भारत को अपनी इस जिम्मेदारी को समझना होगा और पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। संख्या बल या भौतिक संपदा पर आधारित नेतृत्व टिकाऊ नहीं होता। टिकाऊ और सार्थक नेतृत्व केवल समावेशी और सर्वसमावेशक विचार से ही संभव है, जो भारत की प्राचीन संस्कृति में निहित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मांतरण के पीछे क्या कारण हैं?
धर्मांतरण के पीछे संख्या बल बढ़ाने की सोच काम कर रही है।
सच्चा नेतृत्व किसे कहा जाता है?
सच्चा नेतृत्व वही है, जो सभी को साथ लेकर चले।
भारत की जिम्मेदारी क्या है?
भारत को पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी समझनी होगी।
आज के समय में अशांति के कारण क्या हैं?
आज के समय में अशांति का मुख्य कारण भौतिक संपदा और संख्या बल में छिपा है।
हिंदू विचारधारा का मूल मंत्र क्या है?
हिंदू विचारधारा का मूल मंत्र 'सबको साथ लेकर चलना' है।
राष्ट्र प्रेस