धर्मेंद्र प्रधान पहले दिन से इस्तीफे को तैयार थे: कैलाश विजयवर्गीय का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 26 जुलाई को इंदौर में मीडिया से बातचीत में यह खुलासा किया कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र विरोध प्रदर्शनों के पहले दिन से ही पार्टी नेतृत्व को इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। विजयवर्गीय के अनुसार, जब परिस्थितियाँ बदलीं, तो प्रधान ने कुछ ही मिनटों में अपना इस्तीफा सौंप दिया।
प्रधान की पेशकश का ब्यौरा
विजयवर्गीय ने प्रधान की प्रशंसा करते हुए कहा, 'मैं धर्मेंद्र प्रधान को कई सालों से जानता हूँ। वह हर जिम्मेदारी पूरी लगन से निभाते हैं।' उन्होंने बताया कि आंदोलन के पहले ही दिन प्रधान ने पार्टी नेतृत्व से कहा था — 'अगर आपको लगता है कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए, तो मैं दे दूंगा।' पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें उचित चर्चा के बाद निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
नीट पेपर लीक के विरुद्ध चल रहे व्यापक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा सौंपते हुए उन्होंने युवाओं और शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई तथा समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम परीक्षा की शुचिता और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए उठाया गया है।
कांग्रेस पर निशाना
विजयवर्गीय ने कांग्रेस की भूमिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'अगर किसी पड़ोसी के घर बच्चा पैदा हो और कांग्रेस उस पर ढोल बजाने लगे, तो असल में उनकी क्या भूमिका रही? आंदोलन तो छात्रों ने शुरू किया था और कांग्रेस बस उनके पीछे खड़ी रही क्योंकि बंगाल चुनावों के बाद विपक्ष का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के आंदोलन को राजनीतिक अवसर की तरह इस्तेमाल किया।
विदेशी ताकतों पर दावा
विजयवर्गीय ने यह भी दावा किया कि प्रधान के इस्तीफे ने उन विदेशी ताकतों की योजनाओं को नाकाम कर दिया जो — उनके अनुसार — भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाना चाहती थीं। उन्होंने कहा, 'मैं इस्तीफा देने के उनके फैसले पर उन्हें बधाई देता हूँ। उनके इस कदम ने ऐसे इरादों को नाकाम कर दिया।' गौरतलब है कि यह दावा उनका व्यक्तिगत आकलन है और इसका कोई आधिकारिक सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या
नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय में नई नियुक्ति और परीक्षा सुधार की दिशा पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं। प्रधान के इस्तीफे के साथ छात्र आंदोलन की माँगें पूरी होती हैं या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।