धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कर्नाटक डिप्टी सीएम परमेश्वर बोले — मंत्रियों की जवाबदेही का बना मज़बूत संदेश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 26 जुलाई को तुमाकुरु में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि जिम्मेदारी के पदों पर बैठे अधिकारियों को अपने विभागों में हुई चूकों के लिए जवाब देना होगा। नीट परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक विवाद की पृष्ठभूमि में यह बयान राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही की बहस को नया आयाम देता है।
परमेश्वर का बयान: जवाबदेही की मिसाल
परमेश्वर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वागत योग्य है। इसने राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की जिम्मेदारी को और मजबूत किया है।' उनके अनुसार यह घटनाक्रम सार्वजनिक प्रशासन में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है और आने वाले वर्षों में जवाबदेही की संस्कृति को बल देगा।
उन्होंने यह भी कहा, 'यह देश को एक स्पष्ट संदेश देता है कि जिम्मेदारी के पदों पर बैठे लोगों को अपने विभागों में हुई गलतियों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।' परमेश्वर का मानना है कि शासन में अधिक जवाबदेही से संस्थाओं में जनता का भरोसा बढ़ेगा।
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
डिप्टी सीएम ने नीट परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक विवाद का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह प्रवेश परीक्षा देशभर के लाखों छात्रों का भविष्य तय करती है, और प्रश्न-पत्र लीक के आरोपों ने परीक्षा की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इसके चलते छात्रों और उनके अभिभावकों में व्यापक चिंता और आक्रोश फैला।
परमेश्वर ने याद दिलाया कि देशभर के छात्रों ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और संबंधित केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। परमेश्वर ने आगे कहा, 'आइए देखें कि क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है।'
भाजपा का पलटवार: दोहरे मानदंड का आरोप
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस नेतृत्व पर जवाबदेही को लेकर 'दोहरे मानदंड' अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी विपक्ष में रहने पर अलग पैमाना अपनाती है और सत्ता में आने पर अलग।
अशोक ने कहा, 'राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और डीके शिवकुमार एक ही पाखंड के तीन चेहरे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का तंत्र इस्तीफे की माँग करता है और जवाबदेही पर उपदेश देता है, जबकि कर्नाटक में उसका रवैया इसके विपरीत रहता है।
अशोक ने यह भी दावा किया कि प्रश्न-पत्र लीक को भविष्य में रोकने, भर्ती प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी सुधार करने की बजाय, मुख्यमंत्री ने ऐसी विफलताओं के लिए डिप्टी कमिश्नरों को जिम्मेदार ठहराने का रास्ता चुना।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक जाँच अभी जारी है। गौरतलब है कि प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन और परीक्षा सुधार प्रक्रिया पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं। आलोचकों का कहना है कि महज इस्तीफे से छात्रों के साथ हुए अन्याय का समाधान नहीं होगा — ठोस संस्थागत सुधार ही असली परीक्षा होगी।