15 अक्टूबर 2026
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ओडिशा राजमार्गों पर अवैध पार्किंग: धर्मेंद्र प्रधान ने CM माझी को लिखा पत्र, सख्त कार्रवाई की माँग

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ओडिशा राजमार्गों पर अवैध पार्किंग: धर्मेंद्र प्रधान ने CM माझी को लिखा पत्र, सख्त कार्रवाई की माँग

सारांश

संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने CM मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर ओडिशा के खनन गलियारों में राजमार्गों पर किलोमीटर-लंबी अवैध ट्रक-कतारों से हो रही दुर्घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई माँगी है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी आदेश और राज्य कानून के तहत ₹5,000 जुर्माने व वाहन नीलामी के प्रावधानों का हवाला दिया।

मुख्य बातें

संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर ओडिशा के राजमार्गों पर अवैध पार्किंग पर सख्त कार्रवाई की माँग की।
खनन और औद्योगिक गलियारों में ट्रकों की किलोमीटर-लंबी अनधिकृत कतारें सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के लिए ज़िम्मेदार बताई गई हैं।
प्रधान ने सर्वोच्च न्यायालय की स्वतः संज्ञान याचिका (सी) संख्या 9/2025 के बाध्यकारी अंतरिम आदेशों का हवाला दिया, जो राजमार्गों पर भारी वाहनों की पार्किंग प्रतिबंधित करते हैं।
ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 2025 की धारा 28 के तहत उल्लंघन पर ₹1,000 से ₹5,000 जुर्माना और एक माह में अदायगी न होने पर वाहन नीलामी का प्रावधान है।
सर्वोच्च न्यायालय ने राजमार्ग पर सुरक्षित यात्रा को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मूल अधिकार का हिस्सा घोषित किया है।

संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 15 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य के खनन और औद्योगिक गलियारों में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग से उत्पन्न सड़क सुरक्षा संकट पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। प्रधान ने तर्क दिया कि ट्रकों की किलोमीटर-लंबी अनधिकृत कतारें न केवल यातायात अवरुद्ध करती हैं, बल्कि जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण भी बन रही हैं।

समस्या की जड़

पत्र में प्रधान ने स्पष्ट किया कि खनन कंपनियों द्वारा रसद अनुशासन का घोर अभाव और निर्धारित पार्किंग स्थलों की अनुपस्थिति मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा करती है जिसमें वाणिज्यिक एवं भारी वाहन राजमार्गों पर खतरनाक ढंग से खड़े रहते हैं। उनके अनुसार यह स्थिति राज्य के खनन-औद्योगिक गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं की तेज़ बढ़त के लिए सीधे ज़िम्मेदार है।

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में खनिज परिवहन बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्भर है और भारी माल वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला

प्रधान ने सर्वोच्च न्यायालय के स्वतः संज्ञान याचिका (सी) संख्या 9/2025 (फलोदी दुर्घटना बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं अन्य) में दिए गए बाध्यकारी अंतरिम आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने राजमार्गों पर सुरक्षित यात्रा को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के मूल अधिकार का अभिन्न हिस्सा घोषित किया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों एवं निर्धारित मार्गों पर भारी और वाणिज्यिक वाहनों की पार्किंग पर प्रतिबंध लगाते हुए जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को चौबीसों घंटे गश्त, स्वचालित ई-चालान प्रणाली और जिला सड़क सुरक्षा कार्यबल के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

राज्य के पास कानूनी अधिकार और दायित्व

प्रधान ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार इस मामले में सक्षम है और उस पर प्रत्यक्ष संवैधानिक दायित्व भी है। ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 2025 के तहत उल्लंघन करने वाले चालकों, परिवहन संचालकों एवं औद्योगिक कंपनियों पर सख्त प्रशासनिक, वित्तीय और आपराधिक दंड का प्रावधान है।

विशेष रूप से धारा 28 के अंतर्गत सड़कों पर खतरनाक ढंग से वाहन खड़े करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का अनिवार्य जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे भी आगे, यदि जुर्माना एक महीने तक अदा नहीं किया जाता, तो जब्त वाहनों की नीलामी का भी प्रावधान है।

आम जनता और यातायात पर असर

गौरतलब है कि ओडिशा के सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, क्योंझर और अंगुल जैसे खनन-प्रधान ज़िलों से गुज़रने वाले राजमार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें स्थानीय यात्रियों के लिए दैनिक आफत बन चुकी हैं। इन इलाकों में रात के वक्त अचानक खड़े ट्रकों से टकराव की घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं, जिनमें बाइक सवार और छोटे वाहन चालक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

आगे क्या होगा

प्रधान के पत्र के बाद अब निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य परिवहन विभाग पर हैं कि वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में क्या ठोस कदम उठाते हैं। यदि राज्य सरकार त्वरित कार्रवाई नहीं करती, तो न्यायिक अवमानना का जोखिम भी सामने आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समर्पित ट्रक पार्किंग स्थल और डिजिटल स्लॉट बुकिंग प्रणाली एक दीर्घकालिक समाधान हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली महत्व यह है कि अब सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी आदेश मौजूद हैं जिनका पालन न करने पर राज्य अधिकारी अवमानना के जोखिम में हैं। ओडिशा के खनन ज़िलों में अवैध पार्किंग की समस्या दशकों पुरानी है, परंतु खनन कंपनियों पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव के चलते प्रवर्तन हमेशा कमज़ोर रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या राज्य सरकार अधिनियम की धाराओं को केवल कागज़ों तक सीमित रखती है या ई-चालान और नीलामी जैसे तंत्र वास्तव में लागू किए जाते हैं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने CM माझी को पत्र क्यों लिखा?
प्रधान ने ओडिशा के खनन और औद्योगिक गलियारों में राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग से बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई की माँग करते हुए यह पत्र लिखा। उनका कहना है कि खनन कंपनियों द्वारा रसद अनुशासन की कमी और पार्किंग स्थलों की अनुपस्थिति इस संकट की मूल वजह है।
सर्वोच्च न्यायालय ने राजमार्ग पार्किंग पर क्या आदेश दिए हैं?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान याचिका (सी) संख्या 9/2025 में अनुच्छेद 142 के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों की पार्किंग पर प्रतिबंध लगाने वाले बाध्यकारी अंतरिम आदेश जारी किए हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि राजमार्ग पर सुरक्षित यात्रा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 2025 में क्या दंड का प्रावधान है?
अधिनियम की धारा 28 के अंतर्गत सड़कों पर खतरनाक ढंग से वाहन खड़े करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का अनिवार्य जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि एक माह के भीतर जुर्माना नहीं भरा जाता, तो जब्त किए गए वाहन की नीलामी की जा सकती है।
इस समस्या से ओडिशा के किन क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर है?
खनन-प्रधान ज़िले जैसे सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, क्योंझर और अंगुल सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहाँ से गुज़रने वाले राजमार्गों पर ट्रकों की लंबी कतारें यातायात और सुरक्षा दोनों के लिए बड़ी बाधा बनती हैं। रात के समय अचानक खड़े ट्रकों से टकराव की घटनाएँ विशेष रूप से बाइक सवारों को प्रभावित करती हैं।
अब राज्य सरकार को क्या करना होगा?
सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी आदेशों के अनुपालन में राज्य सरकार को जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में 24 घंटे गश्त, स्वचालित ई-चालान प्रणाली और जिला सड़क सुरक्षा कार्यबल सक्रिय करने होंगे। ऐसा न करने पर न्यायिक अवमानना का जोखिम भी उत्पन्न हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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