डॉक्टरों पर हिंसा अस्वीकार्य, पुणे की जर्जर इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट हो: शायना एनसी
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने 8 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र में एक शिवसेना कॉर्पोरेटर द्वारा डॉक्टर पर किए गए हमले की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी चिकित्सकों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने पुणे में इमारत गिरने की हालिया घटना को शहरी संरचनात्मक सुरक्षा की गंभीर चेतावनी बताते हुए पुरानी इमारतों के नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट की माँग की।
डॉक्टर पर हमला: शिवसेना का रुख
शायना एनसी ने कहा कि डॉक्टर समाज के फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं जो मरीजों की सेवा में दिन-रात समर्पित रहते हैं। उनके शब्दों में, ऐसे कर्तव्यनिष्ठ चिकित्सकों के साथ हाथापाई या हिंसक व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस घटना पर आत्म-परीक्षण होना चाहिए और दोषी कॉर्पोरेटर को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जानी चाहिए।
शायना एनसी ने यह भी रेखांकित किया कि शिवसेना नेता डॉ. श्रीकांत शिंदे स्वयं एक चिकित्सक हैं और पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने राज्य सरकार की 'लाडकी बहन' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और डॉक्टरों की गरिमा पार्टी के लिए किसी समझौते का विषय नहीं है।
पुणे इमारत हादसा: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पुणे में इमारत गिरने की घटना पर शायना एनसी ने कहा कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी ढाँचे की सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी परीक्षा है। उन्होंने माँग की कि सभी पुरानी और जर्जर इमारतों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य किया जाए, समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जाए और निर्माण एवं मरम्मत कार्य केवल लाइसेंस प्राप्त इंजीनियरों की निगरानी में हो।
उन्होंने यूडीसीपीआर 2020 के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पुणे में पुरानी इमारतों के ढहने की घटनाएँ बार-बार सामने आ रही हैं।
पुराने इलाकों में विशेष खतरा
शायना एनसी ने विशेष रूप से पुणे के शनिवार पेठ, सदाशिव पेठ और रविवार पेठ जैसे पुराने इलाकों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों की कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और लंबे समय से उनका समुचित रखरखाव नहीं हो पाया है। कई मामलों में मकान मालिक और किराएदारों के बीच विवाद के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित होता है, जबकि कुछ स्थानों पर भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन के मामले भी सामने आए हैं।
नागरिकों की भी जिम्मेदारी
शायना एनसी ने कहा कि प्रशासन की ओर से हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध हैं, लेकिन नागरिकों को भी अपनी इमारतों की स्थिति की जाँच स्वयं करनी होगी। उन्होंने आग्रह किया कि लोग यह सुनिश्चित करें कि उनके भवन के आवश्यक परमिट मौजूद हैं और यदि इमारत जर्जर हो तो समय रहते मरम्मत या आवश्यक कार्रवाई कराई जाए।
गौरतलब है कि पुणे में इमारत हादसों की पुनरावृत्ति और डॉक्टरों पर बढ़ती हिंसा — दोनों मुद्दे महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार के लिए गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन रहे हैं। शायना एनसी की यह प्रतिक्रिया इन दोनों संवेदनशील मुद्दों पर शिवसेना की स्थिति को स्पष्ट करती है और दीर्घकालिक नीतिगत समाधान की माँग को रेखांकित करती है।