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क्या दुर्गा खोटे हिंदी सिनेमा की पहली फ्रीलांस अभिनेत्री थीं?

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क्या दुर्गा खोटे हिंदी सिनेमा की पहली फ्रीलांस अभिनेत्री थीं?

सारांश

दुर्गा खोटे, जिन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में एक नई राह बनाई, की प्रेरणादायक कहानी। उन्होंने स्वतंत्रता से काम करने का साहसिक कदम उठाया, जिससे न केवल उनका करियर बल्कि भारतीय सिनेमा में महिलाओं की स्थिति भी बदल गई। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के अनछुए पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

दुर्गा खोटे का साहस भारतीय सिनेमा के लिए प्रेरणा है।
महिलाओं के लिए स्वतंत्रता से काम करने का रास्ता आसान बनाया।
लगभग 50 वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करने वाली चौथी महिला।
समाज के बंदिशों को तोड़कर अपने सपनों को साकार किया।

मुंबई, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी और मराठी सिनेमा के प्रारंभिक काल में महिलाओं के लिए फिल्मों में काम करना एक बड़ी चुनौती थी। उस समय अधिकांश कलाकार किसी एक स्टूडियो या प्रोडक्शन हाउस के साथ लंबे अनुबंध में बंधे रहते थे। ऐसे में किसी भी कलाकार के लिए कई कंपनियों के लिए स्वतंत्र रूप से काम करना कठिन और जोखिम भरा माना जाता था।

दुर्गा खोटे ने इस डर को तोड़ा और भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस अभिनेत्री बनकर यह साबित किया कि महिलाएं भी अपने बलबूते पर अपनी पहचान बना सकती हैं। उनके इस साहसिक कदम ने उन्हें न केवल एक अलग पहचान दिलाई, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए भी राह आसान की।

दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ था। वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं और उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। उस समय लड़कियों के लिए शिक्षा प्राप्त करना भी कठिन था, लेकिन दुर्गा की शिक्षा ने उनके भविष्य की नींव रखी।

17 वर्ष की आयु में दुर्गा की शादी विश्वनाथ खोटे से हुई, जो एक शिक्षित युवा थे। शादी के बाद उनके दो बेटे हुए, लेकिन दुर्गा के जीवन में दुख जल्दी आ गया। 26 वर्ष की आयु में उनके पति का निधन हो गया, और उन्हें दोनों बच्चों का पालन-पोषण अकेले करना पड़ा। दुर्गा ने अपने बच्चों के साथ-साथ आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया।

इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। उनकी बहन के जरिए उन्हें 'फरेबी जाल' फिल्म में छोटी भूमिका मिली। उस समय समाज में महिलाओं के लिए फिल्मों में काम करना असभ्य माना जाता था, लेकिन दुर्गा ने अपने बच्चों और आत्मनिर्भर बनने के लिए यह कदम उठाया। उनकी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें लगातार नई भूमिकाओं में स्थापित किया।

दुर्गा खोटे ने फिल्मों में कदम रखते ही एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने स्टूडियो के अनुबंध को अस्वीकार कर कई कंपनियों के लिए काम करना प्रारंभ किया। प्रभात फिल्म कंपनी के साथ काम करते हुए उन्होंने न्यू थिएटर, ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी और प्रकाश पिक्चर्स के लिए भी काम किया। इस कारण उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस महिला कलाकार माना गया। उनका यह निर्णय न केवल उन्हें स्वतंत्रता दिलाने वाला था, बल्कि फिल्म उद्योग में महिलाओं की स्थिति को भी बदल दिया।

उनका करियर लगभग 50 वर्षों तक चला और इस दौरान उन्होंने हिंदी और मराठी में 200 से अधिक फिल्में कीं। उनकी यादगार भूमिकाओं में 'मुगल-ए-आजम' में जोधा बाई, 'मिर्जा गालिब' में मां का किरदार, 'बॉबी' में दादी और 'भरत मिलाप' जैसी कई हिट फिल्में शामिल हैं। वह केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि 1937 में 'साथी' फिल्म का निर्माण और निर्देशन भी किया, जो उस समय की एक दुर्लभ उपलब्धि थी।

दुर्गा खोटे को कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया। 1942 और 1943 में उन्हें बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन (बीएफजेए) द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्राप्त हुआ। 1958 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1968 में पद्मश्री और 1983 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया। यह दिलचस्प है कि दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जीतने वाली चौथी महिला कलाकार दुर्गा खोटे ही थीं।

जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, दुर्गा खोटे ने मां और दादी के किरदार निभाना शुरू किया। इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और धारावाहिकों का निर्माण भी किया। दूरदर्शन के प्रसिद्ध शो 'वागले की दुनिया' का निर्माण भी उन्होंने किया। दुर्गा खोटे का निधन 22 सितंबर 1991 को हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उन सभी महिलाओं की है जो समाज की बंदिशों को तोड़कर अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं। उनका साहस और संघर्ष हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने लक्ष्यों के प्रति मजबूती से आगे बढ़ें।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा खोटे का जन्म कब हुआ?
दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ।
दुर्गा खोटे ने कितनी फिल्में कीं?
उन्होंने लगभग 200 से अधिक हिंदी और मराठी फिल्में कीं।
दुर्गा खोटे को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
उन्हें पद्मश्री, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और कई अन्य सम्मानों से नवाजा गया।
दुर्गा खोटे का निधन कब हुआ?
उनका निधन 22 सितंबर 1991 को हुआ।
दुर्गा खोटे को किस फिल्म में सबसे प्रसिद्ध भूमिका मिली?
उन्हें 'मुगल-ए-आजम' में जोधा बाई के किरदार के लिए जाना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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