पश्चिम बंगाल चुनाव में कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट के फैसले को ईसीआई ने दी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत की डिवीजन बेंच का रुख किया, जिसमें आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के निर्णय को रद्द कर दिया गया था।
जस्टिस कृष्णा राव ने 17 अप्रैल को इस मामले में कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त करने के ईसीआई के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन्होंने पहले से आवश्यक ट्रेनिंग पूरी कर ली है, उन्हें इस बार पीठासीन अधिकारी की भूमिका निभानी होगी।
इसके साथ ही, जस्टिस राव ने आयोग को यह भी अनुमति दी कि वह कॉलेज शिक्षकों को उनके सर्विस ग्रेड और वेतनमान के अनुसार अन्य चुनावी कार्यों के लिए नियुक्त कर सकता है।
ईसीआई ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जिसमें जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता शामिल हैं) का दरवाजा खटखटाया है।
इस मामले की सुनवाई की संभावित तारीख मंगलवार है।
कुछ दिन पहले आयोग ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था।
आयोग ने यह भी कहा था कि उन्हें इस कार्य के लिए अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी, और कई शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
इस नोटिफिकेशन के बाद कॉलेज शिक्षकों के एक समूह ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस तरह की नियुक्तियों के औचित्य पर सवाल उठाए।
कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के पक्ष में आयोग का तर्क यह था कि पिछले चुनावों में भी कॉलेज शिक्षकों को इस भूमिका में नियुक्त किया गया था और इससे पहले कभी इस निर्णय को चुनौती नहीं दी गई थी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को आयोजित किए जाएंगे। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। इसी दिन केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभाओं के चुनावों में डाले गए वोटों की गिनती भी होगी।