17 जुलाई 2026
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ईसीआई का पहला अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 2026: 380 से अधिक पत्रकार, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर मंथन

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ईसीआई का पहला अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 2026: 380 से अधिक पत्रकार, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर मंथन

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने पहली बार एक राष्ट्रव्यापी मीडिया सम्मेलन बुलाया — 380 से अधिक पत्रकारों के साथ। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 95 करोड़ मतदाताओं की सूची, 12 लाख बीएलओ और 15 लाख बीएलए की भूमिका पर प्रकाश डाला। यह आयोग और मीडिया के बीच संवाद को संस्थागत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में प्रथम अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 2026 का आयोजन किया।
देश भर के 380 से अधिक मीडियाकर्मी सम्मेलन में शामिल हुए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत की मतदाता सूची में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं।
12 लाख से अधिक बीएलओ और 15 लाख से अधिक बीएलए चुनावी प्रक्रिया के 'समवर्ती लेखा परीक्षकों' के रूप में कार्यरत हैं।
प्रतिभागियों को मतदाता सूची तैयार करने, मतदान और मतगणना प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन दिखाया गया।
सम्मेलन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 , ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म और चुनावों में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी चर्चा हुई।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बुधवार, 17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में प्रथम अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 2026 का आयोजन किया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 380 से अधिक मीडियाकर्मी एकत्रित हुए। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था — 'हितधारकों को जोड़ना, लोकतंत्र को मजबूत करना: चुनावों में मीडिया की भूमिका'। यह आयोग द्वारा इस तरह का अब तक का पहला राष्ट्रव्यापी आयोजन है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त का संबोधन

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में चुनाव संविधान, चुनावी कानूनों और ईसीआई के समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार संचालित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया की समवर्ती रूप से देश में चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े हितधारकों द्वारा ऑडिट की जाती है।

ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत की मतदाता सूची में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं और यह एक जीवंत दस्तावेज है जो निरंतर अद्यतन होती रहती है। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में निहित वैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) और 15 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) 'समवर्ती लेखा परीक्षकों' के रूप में इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।

मतदाता भागीदारी और विश्वास

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने हाल के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय मतदाताओं के देश की चुनावी प्रणाली में गहरे विश्वास और भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में सहभागिता के लिए देश के सभी मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन का उद्देश्य और कार्यक्रम

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं के विभिन्न पहलुओं और राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों की भागीदारी के साथ अधिकतम पारदर्शिता सुनिश्चित करने के तरीकों की गहरी समझ विकसित करना था। सम्मेलन का शुभारंभ संविधान, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 में निहित पारदर्शिता उपायों, ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म, चुनावों में प्रौद्योगिकी की भूमिका, महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधानों और चुनाव के दौरान मीडिया से संबंधित कानूनों के व्यापक अवलोकन के साथ हुआ।

प्रतिभागियों को बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए), मतदान एजेंट और मतगणना एजेंट की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों से परिचित कराया गया। यह भी बताया गया कि ये एजेंट चुनावों के समवर्ती लेखा परीक्षकों के रूप में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, राजनीतिक दलों की भागीदारी को सुगम बनाने और चुनाव प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में कैसे योगदान देते हैं।

व्यावहारिक प्रदर्शन

कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, प्रतिभागियों को समूहों में मतदाता सूची तैयार करने, मतदान प्रक्रिया और मतगणना प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन दिखाया गया। यह पहल मीडियाकर्मियों को चुनावी तंत्र की व्यावहारिक समझ देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब देश में चुनावी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता और मीडिया की जिम्मेदारी को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज है। आयोग का यह कदम मीडिया और निर्वाचन तंत्र के बीच संवाद को संस्थागत रूप देने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मीडिया को एक सक्रिय हितधारक के रूप में जोड़ना चाहता है। हालाँकि, सवाल यह है कि क्या यह संवाद एकतरफा 'जागरूकता' तक सीमित रहेगा या मीडिया की स्वतंत्र निगरानी भूमिका को भी संस्थागत मान्यता मिलेगी। 95 करोड़ मतदाताओं और 12 लाख से अधिक बीएलओ के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन मतदाता सूची की शुद्धता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चुनावी दुष्प्रचार जैसे असल मुद्दे इस सम्मेलन के एजेंडे में कितनी जगह पा सके, यह देखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईसीआई का प्रथम अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 2026 क्या है?
यह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पहला राष्ट्रव्यापी मीडिया सम्मेलन है, जिसमें देश भर के 380 से अधिक पत्रकार शामिल हुए। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और मीडिया की भूमिका पर गहरी समझ विकसित करना था।
सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने क्या कहा?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत की मतदाता सूची में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं और यह एक जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने 12 लाख से अधिक बीएलओ और 15 लाख से अधिक बीएलए की 'समवर्ती लेखा परीक्षकों' के रूप में भूमिका को रेखांकित किया।
बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) और बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) क्या भूमिका निभाते हैं?
बीएलओ और बीएलए चुनावी प्रक्रिया के 'समवर्ती लेखा परीक्षक' हैं जो मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं और राजनीतिक दलों की भागीदारी को सुगम बनाते हैं। देश में 12 लाख से अधिक बीएलओ और 15 लाख से अधिक बीएलए सक्रिय हैं।
सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में संविधान, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म, चुनावों में प्रौद्योगिकी की भूमिका और मीडिया से संबंधित चुनावी कानूनों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों को मतदाता सूची तैयार करने, मतदान और मतगणना प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन भी दिखाया गया।
यह सम्मेलन भारतीय लोकतंत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पहली बार है जब ईसीआई ने राष्ट्रव्यापी स्तर पर मीडियाकर्मियों को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए एक संस्थागत मंच तैयार किया है। यह पहल मीडिया और निर्वाचन तंत्र के बीच पारदर्शिता और संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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