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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मेफेड्रोन तस्करी मामले में हैदराबाद-मंदसौर की ₹90 लाख से अधिक की संपत्ति अटैच

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मेफेड्रोन तस्करी मामले में हैदराबाद-मंदसौर की ₹90 लाख से अधिक की संपत्ति अटैच

सारांश

ईडी के इंदौर सब जोनल ऑफिस ने ₹70 करोड़ की मेफेड्रोन तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हैदराबाद और मंदसौर की ₹90 लाख से अधिक की संपत्ति अटैच की। तीन आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं और जांच जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हैदराबाद और मंदसौर में ₹90 लाख से अधिक की अचल संपत्तियाँ अटैच कीं।
मामला ₹70 करोड़ की व्यावसायिक मात्रा में मेफेड्रोन (एमडी) की अवैध तस्करी से जुड़ा है।
आरोपियों में वेद प्रकाश व्यास , दिनेश अग्रवाल , अक्षय अग्रवाल और अन्य शामिल हैं।
ईडी ने 17 जुलाई को इंदौर और मंदसौर में सर्च ऑपरेशन चलाया था और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
तीनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं; जांच आगे भी जारी रहेगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब जोनल ऑफिस ने 19 सितंबर 2026 को हैदराबाद और मंदसौर में स्थित अचल संपत्तियों को अटैच करते हुए बड़ी कार्रवाई की। अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत ₹90 लाख से अधिक बताई गई है। यह कार्रवाई करीब ₹70 करोड़ की व्यावसायिक मात्रा में मेफेड्रोन (एमडी) की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल, अक्षय अग्रवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज की गई थी। मामला ₹70 करोड़ की कमर्शियल मात्रा में मेफेड्रोन के अवैध कब्जे और तस्करी से जुड़ा है।

मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने नशीली दवाओं की अवैध तस्करी से बड़े पैमाने पर नकद में अपराध-कमाई अर्जित की। इस नकद राशि को कई निजी और व्यावसायिक बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया, जो धन को व्यवस्थित रूप से रखने, लेयरिंग और छिपाने की प्रक्रिया की ओर इशारा करता है।

जांच के दौरान दर्ज बयानों से भी पुष्टि हुई कि आरोपी अपने नियमित कारोबार की आड़ में नशीली दवाओं की सप्लाई और तस्करी में संलिप्त थे। अधिकारियों के अनुसार, यह सुनियोजित वित्तीय अपराध का मामला है।

पूर्व में की गई कार्रवाई

ईडी ने इससे पहले 17 जुलाई को मध्य प्रदेश के इंदौर और मंदसौर में कई स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस अभियान में एजेंसी ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया, जो अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर

ईडी ने अटैचमेंट के संदर्भ में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है, जो PMLA के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति को ज़ब्त करने की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। गौरतलब है कि ऐसे अटैचमेंट ऑर्डर आगे की न्यायिक समीक्षा के अधीन होते हैं।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जिसमें नशीली दवाओं की तस्करी से अर्जित धन को व्यावसायिक गतिविधियों में खपाने की कोशिश की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सुव्यवस्थित वित्तीय नेटवर्क का है जो अपराध-कमाई को सामान्य व्यापारिक लेनदेन की आड़ में वैध बनाने की कोशिश करता है। ₹70 करोड़ की मेफेड्रोन और ₹90 लाख की संपत्ति का यह अनुपात बताता है कि अटैचमेंट अभी शुरुआती चरण में है — बड़े वित्तीय नेटवर्क की जड़ें खोदने में समय लगता है। सवाल यह है कि तीन गिरफ्तारियों के बाद भी सप्लाई चेन के बाकी कड़ी कहाँ हैं, और क्या इंदौर तस्करी का एक बड़ा ट्रांज़िट हब बन चुका है — यह जांच एजेंसियों के लिए अगली असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने हैदराबाद और मंदसौर में किस मामले में संपत्ति अटैच की?
ईडी ने ₹70 करोड़ की मेफेड्रोन (एमडी) की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की। अटैच संपत्तियों की कुल कीमत ₹90 लाख से अधिक है और इनके लिए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया है।
इस मामले में कौन आरोपी हैं और उनकी स्थिति क्या है?
वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल समेत कई लोगों के खिलाफ NDPS अधिनियम, 1985 के तहत इंदौर क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी। ईडी ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
मेफेड्रोन (एमडी) क्या है और यह मामला क्यों अहम है?
मेफेड्रोन एक सिंथेटिक नशीला पदार्थ है जो NDPS अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। इस मामले में ₹70 करोड़ की व्यावसायिक मात्रा की तस्करी शामिल है, जो इसे आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से गंभीर बनाती है।
ईडी ने इस मामले में पहले क्या कार्रवाई की थी?
ईडी ने 17 जुलाई को मध्य प्रदेश के इंदौर और मंदसौर में कई स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। उस अभियान में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था जो अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी के अनुसार मामले में जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई संभव है। प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा और PMLA की प्रक्रिया के तहत सुनवाई आगे बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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