ईडी की बड़ी कार्रवाई: मेफेड्रोन तस्करी मामले में हैदराबाद-मंदसौर की ₹90 लाख से अधिक की संपत्ति अटैच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब जोनल ऑफिस ने 19 सितंबर 2026 को हैदराबाद और मंदसौर में स्थित अचल संपत्तियों को अटैच करते हुए बड़ी कार्रवाई की। अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत ₹90 लाख से अधिक बताई गई है। यह कार्रवाई करीब ₹70 करोड़ की व्यावसायिक मात्रा में मेफेड्रोन (एमडी) की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल, अक्षय अग्रवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज की गई थी। मामला ₹70 करोड़ की कमर्शियल मात्रा में मेफेड्रोन के अवैध कब्जे और तस्करी से जुड़ा है।
मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने नशीली दवाओं की अवैध तस्करी से बड़े पैमाने पर नकद में अपराध-कमाई अर्जित की। इस नकद राशि को कई निजी और व्यावसायिक बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया, जो धन को व्यवस्थित रूप से रखने, लेयरिंग और छिपाने की प्रक्रिया की ओर इशारा करता है।
जांच के दौरान दर्ज बयानों से भी पुष्टि हुई कि आरोपी अपने नियमित कारोबार की आड़ में नशीली दवाओं की सप्लाई और तस्करी में संलिप्त थे। अधिकारियों के अनुसार, यह सुनियोजित वित्तीय अपराध का मामला है।
पूर्व में की गई कार्रवाई
ईडी ने इससे पहले 17 जुलाई को मध्य प्रदेश के इंदौर और मंदसौर में कई स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस अभियान में एजेंसी ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया, जो अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।
प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर
ईडी ने अटैचमेंट के संदर्भ में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है, जो PMLA के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति को ज़ब्त करने की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। गौरतलब है कि ऐसे अटैचमेंट ऑर्डर आगे की न्यायिक समीक्षा के अधीन होते हैं।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जिसमें नशीली दवाओं की तस्करी से अर्जित धन को व्यावसायिक गतिविधियों में खपाने की कोशिश की जाती है।