ईडी ने इंदौर में ₹70 करोड़ के मेफेड्रोन तस्करी-मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट में तीन आरोपी गिरफ्तार किए
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने 70 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडीएमए) की तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के मामले में 21 जुलाई 2026 को तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच की परिणति है। अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट से जुड़ी अपराध की कमाई का अनुमानित मूल्य ₹70 करोड़ है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल के रूप में हुई है। ईडी के अनुसार, ये तीनों अपने नियमित व्यावसायिक गतिविधियों की आड़ में मेफेड्रोन की आपूर्ति और तस्करी में सक्रिय रूप से संलिप्त थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी वैध व्यवसाय का उपयोग ड्रग तस्करी से अर्जित धन को छिपाने के लिए कर रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम और छापेमारी
ईडी ने 17 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर और मंदसौर में कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया। लगातार निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर किए गए इन ऑपरेशनों में आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण तथा आरोपियों की संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े अहम साक्ष्य बरामद एवं जब्त किए गए।
यह मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के प्रावधानों के अंतर्गत दंडनीय अपराधों से संबंधित है।
मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका
वित्तीय जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन को कई व्यक्तिगत और व्यावसायिक बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया। जांच में अपराध की कमाई को व्यवस्थित रूप से रखने (प्लेसमेंट), लेयरिंग और छिपाने के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। गौरतलब है कि इस प्रकार के संगठित नेटवर्क में वैध व्यवसाय को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति बन रही है।
आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई
ईडी ने इस गिरफ्तारी को मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के व्यापार और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है। केंद्रीय जांच एजेंसी तीनों गिरफ्तार आरोपियों को कस्टडी रिमांड के लिए निर्धारित पीएमएलए न्यायालय में पेश कर सकती है। सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने, संपत्तियों का पता लगाने और ड्रग आपूर्ति श्रृंखला की पूरी व्यापकता उजागर करने के लिए जांच जारी है।
ईडी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस चल रही जांच में सहायक कोई भी जानकारी एजेंसी के साथ साझा करें।