ईडी द्वारा अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मामले में तलाशी अभियान, नकद और आभूषण जब्त
सारांश
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नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (ईआईएल) और उसकी संबंधित कंपनियों के खिलाफ चल रहे धन शोधन मामले में एक बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें बड़ी मात्रा में नकद, आभूषण और महंगी घड़ियां जब्त की गईं।
ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 10 अप्रैल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में अर्थ समूह के निदेशकों, प्रमोटरों और संबंधित कंपनियों के दिल्ली और गुरुग्राम में कुल 10 परिसरों को शामिल किया गया।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने लगभग 6.3 करोड़ रुपए की नकद राशि, लगभग 7.5 करोड़ रुपए के आभूषण, चांदी की सिल्लियां और कई महंगी लग्जरी घड़ियां जब्त कीं।
यह जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई पांच एफआईआर के आधार पर प्रारंभ की गई है।
इसके अलावा, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत एक आपराधिक शिकायत दर्ज की है।
ईडी का कहना है कि अर्थ ग्रुप ने दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ में 'अर्थ' ब्रांड के तहत कई रियल एस्टेट परियोजनाएं शुरू कीं। इनमें प्रमुख परियोजनाएं जैसे अर्थ टाउन, अर्थ सफायर कोर्ट, अर्थ कॉपिया, अर्थ टेकोन, अर्थ आइकॉनिक, अर्थ टाइटेनियम, अर्थ एलाकासा, अर्थ ग्रेसिया और अर्थ स्काईगेट शामिल हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने 19,425 से अधिक घर खरीदारों और निवेशकों से आवासीय और वाणिज्यिक इकाइयों की समय पर डिलीवरी और सुनिश्चित रिटर्न का वादा करके लगभग 2,024.45 करोड़ रुपए एकत्र किए।
हालांकि, पर्याप्त धनराशि प्राप्त करने के बावजूद, कई परियोजनाएं या तो अधूरी रह गईं या उनका कब्जा नहीं सौंपा गया।
ईडी ने आगे पाया कि कथित तौर पर धन का दुरुपयोग गुरुग्राम, दिल्ली और राजस्थान में समूह कंपनियों और परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन खरीदने, फर्जी संस्थाओं के माध्यम से धन का लेन-देन करने, व्यक्तिगत भूमि सौदों को वित्तपोषित करने और असंबंधित फर्मों को अग्रिम ऋण देने के लिए किया गया था।
यह भी बताया गया है कि धन का उपयोग उन परिवार के सदस्यों को वेतन देने के लिए भी किया गया था जिनकी कोई सक्रिय भूमिका नहीं थी और संपत्तियों की बिक्री के माध्यम से इसे खर्च कर दिया गया था।
इस मामले में नामित प्रमुख व्यक्तियों में अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता शामिल हैं।