ईडी का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है, राम मंदिर चंदा विवाद की निष्पक्ष जांच हो: एसटी हसन
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद एसटी हसन और विधायक मनोज कुमार पारस ने 8 जुलाई 2026 को लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई, राम मंदिर चंदा विवाद, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति और उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं ने केंद्र व राज्य सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के आरोप लगाए।
ईडी की छापेमारी पर सपा का पलटवार
झांसी से सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव के यहाँ ईडी की छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए एसटी हसन ने कहा, 'यह कोई नई बात नहीं है। मौजूदा सरकारें केंद्रीय जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। जनता इस स्थिति को समझ रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। भविष्य में समाजवादी पार्टी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।'
सपा विधायक मनोज कुमार पारस ने भी इसी सुर में आरोप लगाया कि 'ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। कई मामलों में जांच के बाद संबंधित लोग निर्दोष पाए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा है।'
राम मंदिर चंदा विवाद: निष्पक्ष जांच की मांग
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर एसटी हसन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यदि किसी ने भगवान राम के नाम पर अनियमितता की है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने वाले लोगों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार करने का साहस न कर सके।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'भगवान राम की मर्यादा राजनीति से कहीं ऊपर है, और धार्मिक आस्था के मामलों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।'
हसन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का किसी जाति या राजनीतिक दल से संबंध होना उसे कानून से ऊपर नहीं बनाता — दोषी पाए जाने पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति पर एतराज
वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य की नियुक्ति के मुद्दे पर एसटी हसन ने कहा, 'धार्मिक संस्थाओं का संचालन संबंधित धर्म के लोगों के हाथ में होना चाहिए। जिस प्रकार किसी मुस्लिम को मंदिर ट्रस्ट का सदस्य नहीं बनाया जाता, उसी प्रकार वक्फ जैसी धार्मिक संस्था के प्रबंधन में भी अन्य धर्मों के लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि वक्फ व्यवस्था धार्मिक और सामाजिक कल्याण से जुड़ी संस्था है, इसलिए इसकी प्रकृति को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाने चाहिए।
पेपर लीक और यूपी सरकार पर निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक मनोज कुमार पारस ने कहा, 'सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। परीक्षार्थी पूरे वर्ष मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।' उन्होंने मांग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाए और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अधिक गंभीरता दिखाए।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में सपा के ये बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।