8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है, राम मंदिर चंदा विवाद की निष्पक्ष जांच हो: एसटी हसन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है, राम मंदिर चंदा विवाद की निष्पक्ष जांच हो: एसटी हसन

सारांश

सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन और विधायक मनोज कुमार पारस ने ईडी को राजनीतिक हथियार बताया, राम मंदिर चंदा विवाद में निष्पक्ष जांच की मांग की और वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति पर कड़ा एतराज जताया — यूपी की राजनीति में एजेंसियों के इस्तेमाल का विवाद एक बार फिर केंद्र में।

मुख्य बातें

सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने 8 जुलाई 2026 को कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग हो रहा है।
झांसी के पूर्व सपा विधायक दीप नारायण यादव के यहाँ ईडी की छापेमारी पर सपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
हसन ने राम मंदिर चंदा विवाद में निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा की मांग की।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति को हसन ने धार्मिक स्वायत्तता के विरुद्ध बताया।
विधायक मनोज कुमार पारस ने पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए यूपी सरकार पर युवाओं के भविष्य के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद एसटी हसन और विधायक मनोज कुमार पारस ने 8 जुलाई 2026 को लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई, राम मंदिर चंदा विवाद, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति और उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं ने केंद्र व राज्य सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के आरोप लगाए।

ईडी की छापेमारी पर सपा का पलटवार

झांसी से सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव के यहाँ ईडी की छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए एसटी हसन ने कहा, 'यह कोई नई बात नहीं है। मौजूदा सरकारें केंद्रीय जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। जनता इस स्थिति को समझ रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। भविष्य में समाजवादी पार्टी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।'

सपा विधायक मनोज कुमार पारस ने भी इसी सुर में आरोप लगाया कि 'ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। कई मामलों में जांच के बाद संबंधित लोग निर्दोष पाए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा है।'

राम मंदिर चंदा विवाद: निष्पक्ष जांच की मांग

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर एसटी हसन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यदि किसी ने भगवान राम के नाम पर अनियमितता की है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने वाले लोगों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार करने का साहस न कर सके।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'भगवान राम की मर्यादा राजनीति से कहीं ऊपर है, और धार्मिक आस्था के मामलों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।'

हसन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का किसी जाति या राजनीतिक दल से संबंध होना उसे कानून से ऊपर नहीं बनाता — दोषी पाए जाने पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति पर एतराज

वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य की नियुक्ति के मुद्दे पर एसटी हसन ने कहा, 'धार्मिक संस्थाओं का संचालन संबंधित धर्म के लोगों के हाथ में होना चाहिए। जिस प्रकार किसी मुस्लिम को मंदिर ट्रस्ट का सदस्य नहीं बनाया जाता, उसी प्रकार वक्फ जैसी धार्मिक संस्था के प्रबंधन में भी अन्य धर्मों के लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि वक्फ व्यवस्था धार्मिक और सामाजिक कल्याण से जुड़ी संस्था है, इसलिए इसकी प्रकृति को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाने चाहिए।

पेपर लीक और यूपी सरकार पर निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक मनोज कुमार पारस ने कहा, 'सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। परीक्षार्थी पूरे वर्ष मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।' उन्होंने मांग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाए और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अधिक गंभीरता दिखाए।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में सपा के ये बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार राम मंदिर चंदा विवाद को इसमें जोड़ना रणनीतिक है। यह सपा को हिंदू आस्था के रक्षक की भूमिका में पेश करने का प्रयास है, जो परंपरागत रूप से BJP का राजनीतिक क्षेत्र रहा है। वक्फ बोर्ड पर उनका बयान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है — जबकि पेपर लीक का मुद्दा युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश है। असली सवाल यह है कि क्या ये बयान ज़मीनी राजनीति में परिवर्तित होंगे, या केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहेंगे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसटी हसन ने ईडी पर क्या आरोप लगाए हैं?
सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकारें ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और डराने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। यह प्रतिक्रिया झांसी के पूर्व सपा विधायक दीप नारायण यादव के यहाँ ईडी की छापेमारी के बाद आई।
राम मंदिर चंदा विवाद में सपा की क्या मांग है?
एसटी हसन ने मांग की है कि यदि राम मंदिर के नाम पर किसी ने अनियमितता की है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम की मर्यादा राजनीति से ऊपर है और धार्मिक आस्था का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य की नियुक्ति पर एसटी हसन का क्या कहना है?
हसन ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन संबंधित धर्म के लोगों के हाथ में होना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे किसी मुस्लिम को मंदिर ट्रस्ट का सदस्य नहीं बनाया जाता। उनके अनुसार वक्फ बोर्ड एक धार्मिक और सामाजिक कल्याण संस्था है, इसलिए इसकी प्रकृति को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिए जाने चाहिए।
सपा विधायक मनोज कुमार पारस ने यूपी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
विधायक मनोज कुमार पारस ने कहा कि यूपी सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षार्थियों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और सरकार को परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी व सुरक्षित बनाना चाहिए।
दीप नारायण यादव के यहाँ ईडी की छापेमारी क्यों हुई?
स्रोत के अनुसार झांसी से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव के यहाँ ईडी ने छापेमारी की, जिस पर सपा नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई बताया। छापेमारी के विशिष्ट कारणों का विवरण अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 4 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले