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पश्चिम बंगाल SSC भर्ती घोटाला: ईडी ने पार्थ चटर्जी समेत कई आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में सप्लीमेंट्री शिकायत दर्ज की

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पश्चिम बंगाल SSC भर्ती घोटाला: ईडी ने पार्थ चटर्जी समेत कई आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में सप्लीमेंट्री शिकायत दर्ज की

सारांश

पश्चिम बंगाल का SSC भर्ती घोटाला अब PMLA कोर्ट में नए मोड़ पर है — ईडी ने पार्थ चटर्जी समेत प्रमुख आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल की है। ₹630 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई, 25,000 से अधिक रद्द नियुक्तियां और शेल कंपनियों का जाल — यह मामला पश्चिम बंगाल की सियासत और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा झटका है।

मुख्य बातें

ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 20 अगस्त 2025 को PMLA स्पेशल कोर्ट, कोलकाता में पार्थ चटर्जी , अर्पिता मुखर्जी और कुंतल घोष समेत कई आरोपियों के खिलाफ पहली सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दर्ज की।
घोटाले में अपराध से हुई कमाई का आंकड़ा कम से कम ₹630.40 करोड़ आंका गया है; ईडी ने SSC और प्राइमरी टीचर घोटाले में मिलाकर ₹702 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की।
ग्रुप-सी पदों के लिए उम्मीदवारों से ₹15-16 लाख और ग्रुप-डी पदों के लिए ₹10-12 लाख तक की अवैध वसूली हुई।
अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से ₹49.80 करोड़ नकद और ₹5.08 करोड़ मूल्य का सोना-गहने जब्त किए गए।
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अप्रैल 2025 को WBCSSC की भर्ती प्रक्रिया को धोखाधड़ी से दूषित मानते हुए 25,000 से अधिक नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 20 अगस्त 2025 को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित एसएससी ग्रुप-सी और ग्रुप-डी स्टाफ भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी, कुंतल घोष और अन्य आरोपियों के विरुद्ध स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए), कोलकाता में पहली सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। यह शिकायत 22 जनवरी 2025 को दर्ज मूल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के क्रम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत दायर की गई है।

घोटाले की पृष्ठभूमि और जांच का आधार

ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी, कोलकाता द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच का केंद्र पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (WBCSSC) के माध्यम से ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर की गई भर्ती में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताएं हैं। इन अपराधों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अप्रैल 2025 को अपने ऐतिहासिक फैसले में WBCSSC की पूरी भर्ती प्रक्रिया को धोखाधड़ी से दूषित करार देते हुए 25,000 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।

घोटाले के तरीके: ओएमआर हेरफेर से लेकर रैंक जंपिंग तक

पीएमएलए के तहत जांच में सामने आया है कि भर्ती घोटाला कई स्तरों पर अंजाम दिया गया — ओएमआर स्कोर में हेरफेर, रैंक जंपिंग, जाली और पिछली तारीख के सिफारिश पत्र जारी करना, पैनल की समय-सीमा समाप्त होने के बाद अवैध नियुक्तियां करना, और तय भर्ती प्रक्रियाओं को दरकिनार कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाना। जांच के अनुसार, शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रभारी मंत्री पार्थ चटर्जी का WBCSSC और उससे संबद्ध संस्थाओं पर पूरा नियंत्रण था और उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्तियों को प्रभावित किया।

जांच में यह भी पता चला है कि उनके निर्देशों पर अयोग्य उम्मीदवारों की सूचियां तैयार की गईं और प्रसन्न कुमार रॉय तथा उनके सहयोगियों जैसे बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए सिफारिश व नियुक्ति पत्र जारी कराए गए।

उम्मीदवारों से वसूली: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक

जांच के अनुसार, बिचौलियों और एजेंटों के एक संगठित नेटवर्क ने पक्की सरकारी नौकरी का वादा करके इच्छुक उम्मीदवारों से अवैध रकम वसूली। ग्रुप-सी पदों के लिए ₹15-16 लाख और ग्रुप-डी पदों के लिए ₹10-12 लाख तक की रकम वसूल की गई, जबकि अलग-अलग पदों के लिए यह राशि ₹10 लाख से ₹20 लाख तक रही। प्रसन्ना कुमार रॉय मुख्य बिचौलिए के रूप में काम करते थे और अपने साथियों के साथ मिलकर अपराध से अर्जित धन को एकत्र और वितरित करते थे।

जांच में ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाले में अपराध से हुई कमाई का आंकड़ा कम से कम ₹630.40 करोड़ आंका गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, वास्तविक रकम इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि रैंक जंपिंग, पैनल के बाहर की नियुक्तियां और आरटीआई/री-इवैल्यूएशन प्रणाली में हेरफेर जैसे अन्य तरीके भी इस घोटाले में शामिल थे।

अर्पिता मुखर्जी और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

जांच में सामने आया है कि अर्पिता मुखर्जी अवैध फंड की संरक्षक के रूप में काम करती थीं और उन्हें कई शेल व डमी कंपनियों में डायरेक्टर और शेयरहोल्डर बनाया गया था। इन कंपनियों का उपयोग अवैध कमाई को छिपाने और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था। प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले से जुड़े एक अलग मामले में मुखर्जी के ठिकानों पर छापे के दौरान लगभग ₹49.80 करोड़ नकद और लगभग ₹5.08 करोड़ मूल्य का सोना और गहने जब्त किए गए थे।

जांच के अनुसार, भर्ती घोटाले से मिले फंड का उपयोग करके आरोपी व्यक्तियों और उनके सहयोगियों से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से कई अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं।

ईडी की अब तक की कार्रवाई और आगे की राह

ईडी ने अब तक एसएससी ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाले में लगभग ₹247.35 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। एसएससी और प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले के सभी मामलों को मिलाकर ईडी अब तक ₹702 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त कर चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय के 3 अप्रैल 2025 के फैसले के बाद, जिसमें 25,000 से अधिक नियुक्तियां रद्द की गईं, यह सप्लीमेंट्री शिकायत जांच को अगले कानूनी चरण में ले जाने की दिशा में एक अहम कदम है। अब सभी निगाहें PMLA कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संगठित आपराधिक ढांचे का प्रमाण बन चुका है — जिसमें मंत्री से लेकर बिचौलिए तक की सक्रिय भागीदारी जांच में सामने आई है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 25,000 से अधिक नियुक्तियां रद्द किए जाने के बावजूद, उन हजारों वैध उम्मीदवारों के पुनर्वास का सवाल अभी अनुत्तरित है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी। ₹630 करोड़ से अधिक की अनुमानित अवैध कमाई यह भी दर्शाती है कि सार्वजनिक भर्ती प्रणाली में निगरानी तंत्र कितना खोखला रहा। असली परीक्षा यह है कि क्या PMLA कोर्ट में दाखिल यह सप्लीमेंट्री शिकायत दोषसिद्धि तक पहुंचती है — क्योंकि भारत में हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामलों में अभियोजन की दर ऐतिहासिक रूप से निराशाजनक रही है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल SSC ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाला क्या है?
यह पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (WBCSSC) के जरिए ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर की गई भर्ती में बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें ओएमआर स्कोर हेरफेर, रैंक जंपिंग और अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्ति शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अप्रैल 2025 को 25,000 से अधिक नियुक्तियां रद्द कर दीं।
ईडी ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने SSC ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाले में लगभग ₹247.35 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। SSC और प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले के सभी मामलों में मिलाकर ₹702 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है, और अब 20 अगस्त 2025 को PMLA कोर्ट में सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल की गई है।
पार्थ चटर्जी की इस घोटाले में क्या भूमिका बताई गई है?
जांच के अनुसार, शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रभारी मंत्री पार्थ चटर्जी का WBCSSC पर पूरा नियंत्रण था और उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्तियों को प्रभावित किया। उनके निर्देशों पर अयोग्य उम्मीदवारों की सूचियां तैयार की गईं और बिचौलियों के जरिए नियुक्ति पत्र जारी कराए गए।
अर्पिता मुखर्जी की इस मामले में क्या भूमिका है?
जांच के अनुसार, अर्पिता मुखर्जी अवैध फंड की संरक्षक के रूप में काम करती थीं और उन्हें कई शेल व डमी कंपनियों में डायरेक्टर और शेयरहोल्डर बनाया गया था। उनके ठिकानों पर छापे में लगभग ₹49.80 करोड़ नकद और ₹5.08 करोड़ मूल्य का सोना-गहने जब्त किए गए।
इस घोटाले से उम्मीदवारों को कितना नुकसान हुआ और क्या होगा आगे?
ग्रुप-सी पदों के लिए ₹15-16 लाख और ग्रुप-डी पदों के लिए ₹10-12 लाख तक की अवैध वसूली की गई, और घोटाले की कुल रकम कम से कम ₹630.40 करोड़ आंकी गई है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 25,000 से अधिक नियुक्तियां रद्द होने के बाद, अब PMLA कोर्ट में सप्लीमेंट्री शिकायत पर सुनवाई अगला अहम चरण है।
राष्ट्र प्रेस
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