पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: ईडी ने पार्थ चटर्जी के खिलाफ दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की, ₹301.58 करोड़ की कुर्की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित स्कूल शिक्षक भर्ती घोटाले में 25 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की। यह चार्जशीट पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध दाखिल की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने इस मामले में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। इससे पहले 18 अप्रैल 2024 को मूल चार्जशीट और 18 अक्टूबर 2025 को पहली पूरक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अनुसूचित अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।
घोटाले का स्वरूप: क्या-क्या सामने आया
पीएमएलए के तहत की गई जांच में कथित तौर पर सामने आया कि ओएमआर स्कोर में हेराफेरी की गई, व्यक्तित्व परीक्षा के अंकों में हेरफेर किया गया, अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रूप से नियुक्त किया गया और पैनल की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नियुक्तियाँ जारी रहीं। जांच एजेंसी के अनुसार, हजारों उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर शिक्षण पदों पर नियुक्त किया गया या नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया, जिससे योग्य उम्मीदवार अपनी वैध नौकरियों से वंचित रह गए।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रियाओं पर न्यायिक और जांच एजेंसियों की निगरानी पहले से ही कड़ी हो चुकी है।
पार्थ चटर्जी की कथित भूमिका
ईडी के अनुसार, पार्थ चटर्जी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC), पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विभिन्न बिचौलियों के साथ मिलीभगत कर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया और उसे सुविधाजनक बनाया। जांच में यह भी कथित तौर पर सामने आया कि अयोग्य उम्मीदवारों से नियुक्ति और सिफारिश के बदले अवैध रिश्वत ली गई।
धन शोधन और संपत्ति कुर्की
जांच एजेंसी के अनुसार, आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित कर वैध संपत्ति के रूप में दर्शाया गया। इस मामले में अब तक कुल तीन अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त राशि ₹301.58 करोड़ है।
आगे क्या होगा
दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल होने के साथ यह मामला अदालती कार्यवाही के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। विशेष पीएमएलए अदालत में सुनवाई की अगली तारीख से यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों पर आरोप तय होने की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।