3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: ईडी ने पार्थ चटर्जी के खिलाफ दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की, ₹301.58 करोड़ की कुर्की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: ईडी ने पार्थ चटर्जी के खिलाफ दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की, ₹301.58 करोड़ की कुर्की

सारांश

पश्चिम बंगाल के स्कूल भर्ती घोटाले में ईडी ने तीसरी बार शिकंजा कसा — पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के खिलाफ दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल हुई। ₹301.58 करोड़ की कुर्की के साथ यह मामला अदालती कार्यवाही के निर्णायक दौर में पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

ईडी ने 25 जून 2026 को पीएमएलए की विशेष अदालत में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की।
आरोपियों में पार्थ चटर्जी (पूर्व शिक्षा मंत्री, TMC महासचिव) और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी शामिल हैं।
जांच में कथित तौर पर ओएमआर स्कोर हेराफेरी , अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्ति और अवैध रिश्वत का खुलासा हुआ।
इस मामले में अब तक तीन अंतरिम कुर्की आदेश जारी; कुल कुर्की राशि ₹301.58 करोड़ ।
यह चार्जशीट 18 अप्रैल 2024 की मूल शिकायत और 18 अक्टूबर 2025 की पहली पूरक चार्जशीट के बाद दाखिल की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित स्कूल शिक्षक भर्ती घोटाले में 25 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की। यह चार्जशीट पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध दाखिल की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने इस मामले में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। इससे पहले 18 अप्रैल 2024 को मूल चार्जशीट और 18 अक्टूबर 2025 को पहली पूरक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अनुसूचित अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।

घोटाले का स्वरूप: क्या-क्या सामने आया

पीएमएलए के तहत की गई जांच में कथित तौर पर सामने आया कि ओएमआर स्कोर में हेराफेरी की गई, व्यक्तित्व परीक्षा के अंकों में हेरफेर किया गया, अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रूप से नियुक्त किया गया और पैनल की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नियुक्तियाँ जारी रहीं। जांच एजेंसी के अनुसार, हजारों उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर शिक्षण पदों पर नियुक्त किया गया या नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया, जिससे योग्य उम्मीदवार अपनी वैध नौकरियों से वंचित रह गए।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रियाओं पर न्यायिक और जांच एजेंसियों की निगरानी पहले से ही कड़ी हो चुकी है।

पार्थ चटर्जी की कथित भूमिका

ईडी के अनुसार, पार्थ चटर्जी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC), पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विभिन्न बिचौलियों के साथ मिलीभगत कर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया और उसे सुविधाजनक बनाया। जांच में यह भी कथित तौर पर सामने आया कि अयोग्य उम्मीदवारों से नियुक्ति और सिफारिश के बदले अवैध रिश्वत ली गई।

धन शोधन और संपत्ति कुर्की

जांच एजेंसी के अनुसार, आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित कर वैध संपत्ति के रूप में दर्शाया गया। इस मामले में अब तक कुल तीन अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त राशि ₹301.58 करोड़ है।

आगे क्या होगा

दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल होने के साथ यह मामला अदालती कार्यवाही के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। विशेष पीएमएलए अदालत में सुनवाई की अगली तारीख से यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों पर आरोप तय होने की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें संस्थागत मिलीभगत के नए आयाम सामने आ रहे हैं। पार्थ चटर्जी पहले से जेल में हैं और TMC ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दूरी बना ली है, फिर भी यह मामला राज्य की शासन-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। असली चिंता उन हजारों योग्य उम्मीदवारों की है जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में हैं — चार्जशीट की संख्या बढ़ने से उनकी नौकरी वापस नहीं आती। बिना त्वरित अदालती सुनवाई और ठोस पुनर्वास नीति के, यह मामला सुर्खियों में तो बना रहेगा, लेकिन पीड़ितों को राहत मिलना अभी दूर है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी की दूसरी चार्जशीट क्या है?
यह ईडी द्वारा पीएमएलए की विशेष अदालत में 25 जून 2026 को दाखिल दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत है, जो पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी और अन्य के खिलाफ है। यह 18 अप्रैल 2024 की मूल चार्जशीट और 18 अक्टूबर 2025 की पहली पूरक चार्जशीट के क्रम में दाखिल की गई है।
इस घोटाले में पार्थ चटर्जी की क्या भूमिका बताई गई है?
ईडी के अनुसार, पार्थ चटर्जी ने WBSSC, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और बिचौलियों के साथ मिलकर अपने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। जांच में कथित तौर पर अवैध रिश्वत लेने और धन शोधन की बात भी सामने आई है।
इस मामले में अब तक कितनी संपत्ति कुर्क की गई है?
ईडी ने इस मामले में अब तक तीन अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए हैं, जिनकी कुल राशि ₹301.58 करोड़ है। यह राशि आपराधिक गतिविधियों से अर्जित और विभिन्न माध्यमों से शोधित धन से जुड़ी संपत्तियों की है।
इस घोटाले से कौन-से उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं?
जांच के अनुसार, हजारों योग्य उम्मीदवारों को उनकी वैध नियुक्तियों से वंचित किया गया क्योंकि अयोग्य उम्मीदवारों को रिश्वत के बदले शिक्षण पदों पर नियुक्त या अनुशंसित किया गया था। ओएमआर स्कोर और व्यक्तित्व परीक्षा के अंकों में हेरफेर कर यह किया गया।
इस मामले में आगे क्या कानूनी प्रक्रिया होगी?
दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला पीएमएलए की विशेष अदालत में सुनवाई के अगले चरण में जाएगा, जिसमें आरोप तय करने की प्रक्रिया केंद्रीय होगी। इससे पहले सीबीआई की जांच और ईडी की कुर्की कार्यवाही समानांतर चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले