ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में समान वित्तीय सहायता मिले: बिहार मंत्री संतोष सुमन की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता संतोष कुमार सुमन ने 3 नवंबर 2026 को पटना से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में समान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की माँग उठाई। उन्होंने केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों से ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए एक व्यापक और एकसमान सहायता नीति तैयार करने का आग्रह किया।
मौजूदा स्थिति और असमानता
सुमन ने कहा कि फिलहाल केंद्र और राज्य सरकारें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के पात्र विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, परीक्षा शुल्क में छूट और नामांकन-शिक्षण शुल्क में सहायता की विभिन्न योजनाएँ चला रही हैं। ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को भी कुछ योजनाओं तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NIT) में पारिवारिक आय के आधार पर शिक्षण शुल्क में आंशिक छूट मिलती है, किंतु यह सुविधाएँ अभी तक व्यापक और एकसमान नहीं हैं।
उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में कोई छूट नहीं मिलती, जो एक बड़ी खामी है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उच्च शिक्षा की लागत लगातार बढ़ रही है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार बच्चे इसी वजह से प्रतियोगी परीक्षाओं से दूर रह जाते हैं।
सुमन की माँगें: समग्र नीति का खाका
संतोष सुमन ने एक समग्र नीति की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसके तहत UPSC, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) और संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन शुल्क में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को रियायत मिलनी चाहिए।
उन्होंने माँग की कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नामांकन एवं शिक्षण शुल्क में आय आधारित छूट दी जाए तथा IIT, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में ईडब्ल्यूएस छात्रवृत्ति की व्यवस्था हो। इसके अलावा छात्रावास, भोजनालय (मेस) और अन्य शैक्षणिक खर्चों के लिए भी सहायता का प्रावधान होना चाहिए।
सामाजिक बनाम आर्थिक न्याय का तर्क
सुमन ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग किसी भी वर्ग को मिलने वाली मौजूदा सुविधाओं में कटौती करने के उद्देश्य से नहीं है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का अपना संवैधानिक और सामाजिक उद्देश्य है, जबकि आर्थिक सहायता का आधार जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति होनी चाहिए।
उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' की भावना का हवाला देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय तभी अधिक व्यापक और प्रभावी होगा, जब उसके साथ आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण को वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिये लागू किया गया था, लेकिन इससे जुड़ी वित्तीय सहायता नीति अब भी अधूरी मानी जाती है।
अपील और आगे की राह
संतोष सुमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और सभी राज्य सरकारों से इस दिशा में ठोस पहल करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि आर्थिक अभाव किसी भी योग्य विद्यार्थी की उच्च शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए। आने वाले दिनों में यह माँग विधायी और नीतिगत स्तर पर कितनी तेजी पकड़ती है, यही इस पहल की असली कसौटी होगी।