15 सितंबर 2026
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अमित शाह के हिंदी बयान पर फडणवीस का बचाव — विपक्ष संदर्भ से हटाकर पेश कर रहा है

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अमित शाह के हिंदी बयान पर फडणवीस का बचाव — विपक्ष संदर्भ से हटाकर पेश कर रहा है

सारांश

नवी मुंबई के राजभाषा सम्मेलन में अमित शाह के बयान पर भड़की सियासत के बीच सीएम फडणवीस मैदान में उतरे और विपक्ष पर संदर्भ तोड़ने का आरोप लगाया। साथ ही मंत्रिमंडल ने चीनी मिलों, महा-टेक सेल और किसान भूमि वापसी पर बड़े फैसले किए।

मुख्य बातें

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 15 सितंबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह के हिंदी बयान का बचाव किया और विपक्ष पर संदर्भ से हटाकर पेश करने का आरोप लगाया।
शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने नवी मुंबई राजभाषा सम्मेलन में शाह के बयान की आलोचना की; मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर परोक्ष प्रतिक्रिया दी।
कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की मुंबई रैली को मुंबई पुलिस ने अनुमति नहीं दी; फडणवीस ने त्योहारी सत्र में कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता बताया।
महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी चीनी मिलों के लिए सॉफ्ट लोन और महा-टेक सेल के गठन को मंजूरी दी; सेल 25 नीतियों व 25 योजनाओं का मूल्यांकन करेगा।
अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गाँव के किसानों को कृषि भूमि वापस करने का ऐतिहासिक निर्णय; महाराष्ट्र कृषि भूमि अधिनियम, 1961 में संशोधन को मंजूरी।
दिशा सालियन मामले में सीबीआई एफआईआर पर फडणवीस ने कहा — दस्तावेज़ की समीक्षा अभी नहीं की; सीबीआई उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार काम कर रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिंदी-भाषा संबंधी बयान का पुरज़ोर बचाव किया। फडणवीस ने कहा कि विपक्ष शाह के भाषण की चुनिंदा व्याख्या कर रहा है और उनके शब्दों को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया जा रहा है।

विवाद की जड़ — नवी मुंबई राजभाषा सम्मेलन

विवाद की शुरुआत नवी मुंबई में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र को एक प्रमुख बहुभाषी राज्य बताया और कहा कि अपनी मातृभाषा के साथ-साथ एक और राष्ट्रीय भाषा सीखने का विरोध करने का कोई कारण नहीं है। इस वक्तव्य के बाद शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने तीखी आलोचना की।

अप्रत्यक्ष रूप से असहमति जताते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा: 'कौवे के श्राप से गाय नहीं मरती। अभी के लिए बस इतना ही।' यह संदेश राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से शाह के बयान पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा गया।

फडणवीस का पक्ष — मातृभाषा पर था जोर

मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री ने किसी भाषा का विरोध नहीं किया था, बल्कि भारतीय भाषाओं के महत्व और महाराष्ट्र में मराठी के सही दर्जे को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इस बयान को तोड़-मरोड़कर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है। गौरतलब है कि भाषा-विवाद महाराष्ट्र में हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है, और इस प्रकार की बहसें पहले भी राज्य की राजनीति को प्रभावित कर चुकी हैं।

जरांगे की रैली और कानून-व्यवस्था

कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की मुंबई में प्रस्तावित रैली के लिए मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि आगामी त्योहारी सत्र को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नए आवेदनों की योग्यता के आधार पर समीक्षा की जाएगी और राज्य सरकार पहले ही जरांगे की कई माँगें स्वीकार कर चुकी है, जबकि शेष माँगें अदालत के समक्ष लंबित हैं।

दिशा सालियन मामला और सीबीआई एफआईआर

दिशा सालियन मामले में राजनीतिक हस्तियों के नाम वाली सीबीआई की एफआईआर पर फडणवीस ने कहा कि उन्होंने अभी तक संबंधित दस्तावेज़ की समीक्षा नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार काम कर रही है और कानूनी प्रक्रिया के दौरान जल्दबाज़ी में अटकलें लगाने से बचना चाहिए।

मंत्रिमंडल के अहम फैसले — किसान, शासन और शहरी विकास

राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। गन्ना किसानों को राहत देने के लिए संकटग्रस्त सहकारी चीनी मिलों को आसान शर्तों पर सॉफ्ट लोन प्रदान करने की स्वीकृति दी गई, जिससे 2025-26 पेराई सत्र का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बकाया चुकाने और 2026-27 सत्र की सुचारू तैयारी में मदद मिलेगी।

सरकार की योजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए महाराष्ट्र तकनीकी सहायता सेल ('महा-टेक') के गठन को भी मंजूरी दी गई। आईआईएम मुंबई और सेंटर फॉर प्लानिंग एंड पॉलिसी रिसर्च के साथ मिलकर यह सेल अगले वर्ष राज्य की 25 अहम नीतियों और 25 बड़ी कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन करेगा।

अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गाँव (श्रीरामपुर तालुका) के किसानों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने महाराष्ट्र राज्य कृषि निगम के पास मौजूद कृषि भूमि उनके मूल मालिकों को वापस करने का निर्णय लिया। इस हस्तांतरण को सुगम बनाने के लिए महाराष्ट्र कृषि भूमि अधिनियम, 1961 में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।

इसके अलावा, नासिक नगर निगम की इमारत में महाराष्ट्र साहित्य परिषद की नासिक शाखा के लिए स्टडी सेंटर और लाइब्रेरी हेतु लीज डीड रजिस्ट्रेशन पर स्टाम्प ड्यूटी से पूर्ण छूट को मंजूरी दी गई। वर्धा जिले में अरवी नगर परिषद को कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए 6,240.30 वर्ग मीटर सरकारी भूमि निःशुल्क हस्तांतरित करने की भी स्वीकृति मिली। मुंबई पुलिस हाउसिंग टाउनशिप प्रोजेक्ट के चेयरमैन कार्यालय के लिए चार नए प्रशासनिक पद सृजित करने और उनके व्यय की प्रशासनिक मंजूरी भी दी गई।

इन निर्णयों के साथ महाराष्ट्र सरकार आने वाले दिनों में इनके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

महायुति के एक ऐसे मुख्यमंत्री की तरफ से आया जो खुद मराठी मानस की नब्ज़ जानते हैं। राज ठाकरे का परोक्ष कटाक्ष यह बताता है कि सहयोगी दलों में भी असहजता है, भले ही वे सीधे टकराव से बच रहे हों। असली सवाल यह है कि केंद्र की भाषा नीति और महाराष्ट्र की क्षेत्रीय अस्मिता के बीच यह तनाव चुनावी वर्षों में कितनी बार 'संदर्भ से हटकर' उभरेगा।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने हिंदी पर क्या कहा था जिससे विवाद हुआ?
गृह मंत्री अमित शाह ने नवी मुंबई के राजभाषा सम्मेलन में कहा था कि महाराष्ट्र एक प्रमुख बहुभाषी राज्य है और अपनी मातृभाषा के साथ-साथ एक और राष्ट्रीय भाषा सीखने का विरोध करने का कोई कारण नहीं है। इस बयान पर शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने आपत्ति जताई।
सीएम फडणवीस ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विपक्ष शाह के भाषण की चुनिंदा व्याख्या कर रहा है और उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शाह ने मातृभाषा और मराठी के महत्व पर जोर दिया था, न कि किसी भाषा का विरोध किया।
राज ठाकरे ने इस मामले में क्या प्रतिक्रिया दी?
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लिखा — 'कौवे के श्राप से गाय नहीं मरती। अभी के लिए बस इतना ही।' यह संदेश अमित शाह के बयान पर परोक्ष असहमति के रूप में देखा गया, हालाँकि उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया।
महाराष्ट्र कैबिनेट ने 15 सितंबर को कौन-से बड़े फैसले किए?
कैबिनेट ने सहकारी चीनी मिलों के लिए सॉफ्ट लोन, महाराष्ट्र तकनीकी सहायता सेल ('महा-टेक') के गठन और अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गाँव के किसानों को कृषि भूमि वापसी का ऐतिहासिक निर्णय किया। इसके साथ ही नासिक में स्टाम्प ड्यूटी छूट और वर्धा में भूमि हस्तांतरण को भी मंजूरी दी गई।
मनोज जरांगे पाटिल की मुंबई रैली पर सरकार का क्या रुख है?
मुंबई पुलिस ने कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की प्रस्तावित रैली को अनुमति नहीं दी। सीएम फडणवीस ने कहा कि आगामी त्योहारी सत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और नए आवेदनों की योग्यता के आधार पर समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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