अमित शाह के हिंदी बयान पर फडणवीस का बचाव — विपक्ष संदर्भ से हटाकर पेश कर रहा है
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिंदी-भाषा संबंधी बयान का पुरज़ोर बचाव किया। फडणवीस ने कहा कि विपक्ष शाह के भाषण की चुनिंदा व्याख्या कर रहा है और उनके शब्दों को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया जा रहा है।
विवाद की जड़ — नवी मुंबई राजभाषा सम्मेलन
विवाद की शुरुआत नवी मुंबई में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र को एक प्रमुख बहुभाषी राज्य बताया और कहा कि अपनी मातृभाषा के साथ-साथ एक और राष्ट्रीय भाषा सीखने का विरोध करने का कोई कारण नहीं है। इस वक्तव्य के बाद शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने तीखी आलोचना की।
अप्रत्यक्ष रूप से असहमति जताते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा: 'कौवे के श्राप से गाय नहीं मरती। अभी के लिए बस इतना ही।' यह संदेश राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से शाह के बयान पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा गया।
फडणवीस का पक्ष — मातृभाषा पर था जोर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री ने किसी भाषा का विरोध नहीं किया था, बल्कि भारतीय भाषाओं के महत्व और महाराष्ट्र में मराठी के सही दर्जे को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इस बयान को तोड़-मरोड़कर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है। गौरतलब है कि भाषा-विवाद महाराष्ट्र में हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है, और इस प्रकार की बहसें पहले भी राज्य की राजनीति को प्रभावित कर चुकी हैं।
जरांगे की रैली और कानून-व्यवस्था
कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की मुंबई में प्रस्तावित रैली के लिए मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि आगामी त्योहारी सत्र को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नए आवेदनों की योग्यता के आधार पर समीक्षा की जाएगी और राज्य सरकार पहले ही जरांगे की कई माँगें स्वीकार कर चुकी है, जबकि शेष माँगें अदालत के समक्ष लंबित हैं।
दिशा सालियन मामला और सीबीआई एफआईआर
दिशा सालियन मामले में राजनीतिक हस्तियों के नाम वाली सीबीआई की एफआईआर पर फडणवीस ने कहा कि उन्होंने अभी तक संबंधित दस्तावेज़ की समीक्षा नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार काम कर रही है और कानूनी प्रक्रिया के दौरान जल्दबाज़ी में अटकलें लगाने से बचना चाहिए।
मंत्रिमंडल के अहम फैसले — किसान, शासन और शहरी विकास
राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। गन्ना किसानों को राहत देने के लिए संकटग्रस्त सहकारी चीनी मिलों को आसान शर्तों पर सॉफ्ट लोन प्रदान करने की स्वीकृति दी गई, जिससे 2025-26 पेराई सत्र का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बकाया चुकाने और 2026-27 सत्र की सुचारू तैयारी में मदद मिलेगी।
सरकार की योजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए महाराष्ट्र तकनीकी सहायता सेल ('महा-टेक') के गठन को भी मंजूरी दी गई। आईआईएम मुंबई और सेंटर फॉर प्लानिंग एंड पॉलिसी रिसर्च के साथ मिलकर यह सेल अगले वर्ष राज्य की 25 अहम नीतियों और 25 बड़ी कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन करेगा।
अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गाँव (श्रीरामपुर तालुका) के किसानों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने महाराष्ट्र राज्य कृषि निगम के पास मौजूद कृषि भूमि उनके मूल मालिकों को वापस करने का निर्णय लिया। इस हस्तांतरण को सुगम बनाने के लिए महाराष्ट्र कृषि भूमि अधिनियम, 1961 में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।
इसके अलावा, नासिक नगर निगम की इमारत में महाराष्ट्र साहित्य परिषद की नासिक शाखा के लिए स्टडी सेंटर और लाइब्रेरी हेतु लीज डीड रजिस्ट्रेशन पर स्टाम्प ड्यूटी से पूर्ण छूट को मंजूरी दी गई। वर्धा जिले में अरवी नगर परिषद को कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए 6,240.30 वर्ग मीटर सरकारी भूमि निःशुल्क हस्तांतरित करने की भी स्वीकृति मिली। मुंबई पुलिस हाउसिंग टाउनशिप प्रोजेक्ट के चेयरमैन कार्यालय के लिए चार नए प्रशासनिक पद सृजित करने और उनके व्यय की प्रशासनिक मंजूरी भी दी गई।
इन निर्णयों के साथ महाराष्ट्र सरकार आने वाले दिनों में इनके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेगी।