14 सितंबर 2026
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हिंदी दिवस पर फडणवीस बोले — वैश्विक मंचों पर मोदी की हिंदी देती है गर्व, शाह ने मराठी को बताया शास्त्रीय गौरव

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हिंदी दिवस पर फडणवीस बोले — वैश्विक मंचों पर मोदी की हिंदी देती है गर्व, शाह ने मराठी को बताया शास्त्रीय गौरव

सारांश

हिंदी दिवस पर नवी मुंबई में जुटे देश के दो शीर्ष नेता — CM फडणवीस ने वैश्विक मंचों पर मोदी की हिंदी को राष्ट्रीय गर्व बताया, तो गृह मंत्री शाह ने मराठी के शास्त्रीय दर्जे और सावरकर की भाषाई विरासत को रेखांकित किया। भाषा नीति पर यह सम्मेलन NEP और राजभाषा के व्यापक एजेंडे से जुड़ा संकेत है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 सितंबर 2026 को नवी मुंबई में छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित किया।
फडणवीस ने कहा — वैश्विक मंचों पर PM मोदी को हिंदी में बोलते देखना देश को गर्व से भरता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने ही मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।
शाह ने विनोबा भावे का उद्धरण देते हुए हिंदी को राष्ट्रीय एकता की भाषा बताया।
गृह मंत्रालय ने 'शब्द सिंधु' पहल के जरिए सावरकर की भाषाई विरासत को सम्मानित किया।
नई शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर दोनों नेताओं ने जोर दिया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 सितंबर 2026 को नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में कहा कि वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदी में बोलते हुए सुनना देश को गर्व से भर देता है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय भाषा आयोजन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सम्मिलित हुए।

सम्मेलन की पृष्ठभूमि और महत्व

फडणवीस ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि जहाँ पहले इस प्रकार के सम्मेलन केवल औपचारिकता बनकर रह जाते थे, वहीं गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर इन्हें अलग-अलग राज्यों में बारी-बारी से आयोजित किया जाने लगा है। यह आयोजन महाराष्ट्र में होना स्वयं में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह राज्य भारत की भाषाई विविधता का प्रतीक है।

उन्होंने भाषा नीति के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य की चर्चा करते हुए बताया कि 1963 में हिंदी और अंग्रेजी दोनों को राजभाषा का दर्जा मिलने से पहले भी ब्रिटिश शासनकाल में सरकारी कामकाज के लिए हिंदी का व्यापक उपयोग होता था।

मोदी सरकार और मातृभाषाओं को सम्मान

फडणवीस ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी ने पद संभाला है, देशभर में मातृभाषाओं और आधिकारिक क्षेत्रीय भाषाओं को अभूतपूर्व सम्मान मिला है। उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा, 'आपको अपनी मातृभाषा सीखनी चाहिए और नई शिक्षा नीति स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देकर इसे सुनिश्चित करती है।'

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए बताया कि वे विपक्ष के नेता रहते हुए भी संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले शुरुआती नेताओं में से थे। इसके साथ ही उन्होंने साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की भूमिका को रेखांकित किया, जिन्होंने बोलचाल की हिंदी को सरकारी कामकाज के लिए स्वीकार्य बनाने में अहम योगदान दिया।

अमित शाह का संबोधन — मराठी और भाषाई विरासत

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर जोर दिया और कहा कि मराठी भाषा गहरे सम्मान की हकदार है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ही मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया। शाह ने महाराष्ट्र को भारत का सर्वाधिक बहुभाषी राज्य बताते हुए इसकी भाषाई विविधता की सराहना की।

हिंदी की राष्ट्रीय एकता में भूमिका को रेखांकित करते हुए शाह ने स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक विनोबा भावे के शब्दों का हवाला दिया — 'अगर मैंने हिंदी का इस्तेमाल न किया होता, तो मैं कश्मीर, असम और केरल के हर गाँव तक भूदान और ग्रामदान का क्रांतिकारी संदेश नहीं पहुँचा पाता। राजभाषा ने ही मुझे देश भर के लोगों से संवाद करने में सक्षम बनाया।'

सावरकर की भाषाई विरासत और 'शब्द सिंधु' पहल

शाह ने महाराष्ट्र को वीर सावरकर की धरती बताते हुए कहा कि वे न केवल स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे, बल्कि अपने समय के सबसे विद्वान भाषाविदों में से एक थे। उन्होंने लोकमान्य तिलक के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए मराठी भाषा को परिष्कृत किया और कई ऐसे नए शब्द गढ़े जो बाद में मराठी और अन्य राष्ट्रीय भाषाओं में स्वाभाविक रूप से अपनाए गए।

गृह मंत्री ने बताया कि गृह मंत्रालय ने 'शब्द सिंधु' पहल के माध्यम से हिंदी में सावरकर की इस भाषाई विरासत को सम्मानित किया है। साथ ही उन्होंने NEP का संदर्भ देते हुए बल दिया कि बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए मातृभाषा में बुनियादी शिक्षा अपरिहार्य है।

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं के संवर्धन और राजभाषा नीति के क्रियान्वयन को लेकर सक्रियता से काम कर रही है। आगामी दिनों में राज्यों में राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन पर केंद्र की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि राजभाषा नीति का जमीनी क्रियान्वयन — खासकर गैर-हिंदी भाषी राज्यों में — अभी भी विवाद का विषय बना हुआ है। 'शब्द सिंधु' जैसी पहलें प्रतीकात्मक रूप से मजबूत हैं, लेकिन सरकारी कामकाज में भारतीय भाषाओं की वास्तविक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ठोस संस्थागत बदलाव की प्रतीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन 2026 कहाँ और क्यों आयोजित हुआ?
यह सम्मेलन 14 सितंबर 2026 को नवी मुंबई में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ। गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर इसे अलग-अलग राज्यों में बारी-बारी से आयोजित करने की परंपरा शुरू की गई है, जिससे राजभाषा नीति का राष्ट्रव्यापी विस्तार हो सके।
CM फडणवीस ने PM मोदी की हिंदी को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदी में बोलते हुए सुनना पूरे देश को गर्व से भर देता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देशभर में मातृभाषाओं और आधिकारिक क्षेत्रीय भाषाओं को अभूतपूर्व सम्मान मिला है।
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा कब और किसने दिया?
गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। यह निर्णय महाराष्ट्र की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
'शब्द सिंधु' पहल क्या है?
'शब्द सिंधु' गृह मंत्रालय की एक पहल है, जिसके माध्यम से हिंदी में वीर सावरकर की भाषाई विरासत को सम्मानित किया गया है। सावरकर ने मराठी भाषा को परिष्कृत करने और कई नए शब्द गढ़ने में अहम योगदान दिया था, जो बाद में अन्य भारतीय भाषाओं में भी अपनाए गए।
नई शिक्षा नीति (NEP) और मातृभाषा में शिक्षा का क्या संबंध है?
नई शिक्षा नीति (NEP) बच्चों की प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में देने को प्राथमिकता देती है। CM फडणवीस और गृह मंत्री शाह दोनों ने सम्मेलन में दोहराया कि बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए मातृभाषा में बुनियादी शिक्षा अपरिहार्य है और NEP इसी दिशा में ठोस कदम उठाती है।
राष्ट्र प्रेस
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