हिंदी दिवस पर फडणवीस का बयान: वैश्विक मंचों पर मोदी की हिंदी सुन देश को होता है गर्व
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 सितंबर 2026 को नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में कहा कि वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदी में बोलते सुनना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया।
सम्मेलन का महत्व और पृष्ठभूमि
फडणवीस ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र में इस राष्ट्रीय आयोजन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे सम्मेलन केवल औपचारिकता बनकर रह जाते थे, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर इन्हें अलग-अलग राज्यों में बारी-बारी से आयोजित किया जाने लगा, जिससे भारतीय भाषाओं के प्रति जागरूकता देशभर में फैल सके।
भाषा नीति के इतिहास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 1963 में हिंदी और अंग्रेजी दोनों को राजभाषा का दर्जा मिलने से पूर्व ब्रिटिश काल में भी सरकारी कामकाज में हिंदी का व्यापक उपयोग होता था।
मोदी सरकार में मातृभाषाओं को मिला सम्मान
फडणवीस ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी ने पद संभाला है, तब से देशभर में मातृभाषाओं और आधिकारिक क्षेत्रीय भाषाओं को अभूतपूर्व सम्मान मिला है। उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा, 'आपको अपनी मातृभाषा सीखनी चाहिए और NEP स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देकर इसे सुनिश्चित करती है।'
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी — तब विपक्ष के नेता — संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले शुरुआती नेताओं में से थे। लेखक मुंशी प्रेमचंद के योगदान को याद करते हुए फडणवीस ने कहा कि उन्होंने बोलचाल की हिंदी को सरकारी कामकाज के लिए स्वीकार्य बनाने में अहम भूमिका निभाई।
अमित शाह का संबोधन: मराठी और भाषाई विविधता
गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन में क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर बल देते हुए कहा कि मराठी भाषा गहरे सम्मान की हकदार है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ही मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया। महाराष्ट्र को भारत का सबसे अधिक बहुभाषी राज्य बताते हुए उन्होंने इसकी विविधता की सराहना की।
स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक विनोबा भावे का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि भावे ने स्वयं माना था कि हिंदी के बिना वे भूदान और ग्रामदान का संदेश कश्मीर, असम और केरल तक नहीं पहुँचा सकते थे — राजभाषा ने उन्हें पूरे देश से जोड़ा।
सावरकर की भाषाई विरासत और 'शब्द सिंधु' पहल
गृह मंत्री ने महाराष्ट्र को वीर सावरकर की धरती बताया और कहा कि सावरकर न केवल स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे, बल्कि अपने युग के सबसे विद्वान भाषाविदों में से एक भी थे। उन्होंने लोकमान्य तिलक के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए मराठी भाषा को परिष्कृत किया और ऐसे शब्द गढ़े जो मराठी सहित अन्य राष्ट्रीय भाषाओं में स्वाभाविक रूप से अपनाए गए।
शाह ने बताया कि गृह मंत्रालय ने 'शब्द सिंधु' पहल के माध्यम से हिंदी में सावरकर की इस भाषाई विरासत को सम्मानित किया है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार NEP के तहत भारतीय भाषाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।