फखरूल हसन ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर उठाए सवाल, भाजपा की दबाव की राजनीति का किया जिक्र
सारांश
Key Takeaways
- फखरूल हसन ने कांग्रेस के टिकट विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की।
- भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
- नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को छलावा बताया गया।
- राज्यपाल के मामले में ममता बनर्जी की चिंता को उचित माना गया।
- रूस से तेल खरीदने पर सरकार को स्वतंत्रता से फैसले लेने की सलाह दी गई।
लखनऊ, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरूल हसन चांद ने कांग्रेस पर आरोप लगने के बाद किसी भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और इस पर समाजवादी पार्टी का कोई रिएक्शन देना उचित नहीं होगा।
उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि जब किसी पार्टी में किसी नेता को टिकट नहीं मिलता, तो आक्रोश और असंतोष की भावना उत्पन्न होती है, और ऐसे में आरोप लगाना सामान्य है। यह केवल कांग्रेस में ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों में भी देखा गया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे को लेकर चिंता जताई है। इस पर फखरूल हसन ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह चिंतित होना उचित है। राज्यपाल को बिना मुख्यमंत्री की सलाह के हटाना सही नहीं है।
सपा प्रवक्ता ने भाजपा की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि जहां भाजपा की सरकार नहीं है, वहां राज्यपाल पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। यह प्रशासनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
फखरूल हसन ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय को 'भाजपा का छलावा' करार दिया। उन्होंने कहा कि अब देखना होगा कि बिहार में मुख्यमंत्री की कमान किसे सौंपी जाती है। भाजपा को स्पष्ट करना होगा कि सीएम की कमान किसे दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा अपने साथियों को धोखा दिया है, चाहे वह महाराष्ट्र की बात हो या अन्य प्रदेशों की। यह आश्चर्य की बात है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने का निर्णय ले रहे हैं। इससे कई सवाल उठ रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार में भाजपा दबाव की राजनीति कर रही है, जो स्वीकार नहीं की जा सकती।
साथ ही, सपा प्रवक्ता ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमें देशहित के फैसले के लिए अमेरिका की अनुमति नहीं लेनी चाहिए। अमेरिका के बयान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को स्वतंत्रता से देशहित में निर्णय लेने चाहिए।