फाल्टा उपचुनाव: भाजपा के देबांग्शु पांडा 31,065 वोटों से आगे, टीएमसी चौथे स्थान पर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के पुनर्मतदान की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने 24 मई 2026 को 8वें दौर तक अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर 31,065 वोटों की बड़ी बढ़त बना ली है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के आँकड़ों के अनुसार, यह बढ़त जैसे-जैसे मतगणना के दौर बढ़ रहे हैं, और पुख्ता होती जा रही है।
मतगणना के 8वें दौर तक का हाल
CEO कार्यालय के जारी आँकड़ों के अनुसार, 8वें दौर तक देबांग्शु पांडा को कुल 51,621 वोट मिले हैं। दूसरे स्थान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के उम्मीदवार शंभुनाथ कुर्मी हैं, जिन्हें 20,556 वोट मिले हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक 5,205 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान मात्र 2,570 वोट लेकर चौथे स्थान पर हैं।
ऐतिहासिक राजनीतिक संकेत
राजनीतिक दृष्टि से यह मतगणना एक महत्वपूर्ण संकेत दे रही है। 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका है जब CPI(M) ने वोट हासिल करने के मामले में TMC को पीछे छोड़ा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि फाल्टा में भाजपा की जीत पहले से लगभग तय मानी जा रही थी — असली मुकाबला दूसरे स्थान के लिए था, और उसमें CPI(M) का TMC से आगे निकलना चौंकाने वाला है।
विधानसभा में सीटों का समीकरण
यदि भाजपा की जीत अंतिम रूप से पुष्ट होती है, तो 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में दलीय स्थिति इस प्रकार होगी: भाजपा 208 सीटें, TMC 80 सीटें, आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) और कांग्रेस 2-2 सीटें, और CPI(M) तथा ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट के पास 1-1 सीट।
टीएमसी की अनुपस्थिति और जश्न का माहौल
मतगणना केंद्र पर जहांगीर खान और उनके पार्टी एजेंट अनुपस्थित रहे। खान ने पहले ही चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर दी थी। दूसरी ओर, भाजपा कार्यकर्ता बढ़ती बढ़त के साथ जश्न के मूड में नज़र आए। मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हो रही है और कुल 21 दौर होने हैं — दोपहर 1 बजे तक अंतिम परिणाम स्पष्ट होने की उम्मीद थी।
आगे क्या
फाल्टा का यह नतीजा पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के घटते जनाधार और भाजपा की बढ़ती पैठ का संकेत देता है। CPI(M) का पुनरुत्थान — भले ही सीमित — यह भी बताता है कि विपक्षी वोट अब एकजुट नहीं है। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह उपचुनाव सभी दलों के लिए एक अहम राजनीतिक बैरोमीटर साबित होगा।