10 जुलाई 2026
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फाल्टा उपचुनाव: 2024 में 89% वोट के बाद TMC चौथे स्थान पर, BJP की एक लाख से ज्यादा वोटों की जीत

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फाल्टा उपचुनाव: 2024 में 89% वोट के बाद TMC चौथे स्थान पर, BJP की एक लाख से ज्यादा वोटों की जीत

सारांश

2024 में 89% वोट और 1.68 लाख की बढ़त के बाद, TMC फाल्टा उपचुनाव में महज 4% पर सिमट गई — और BJP ने एक लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। 'सिंघम बनाम पुष्पा' नैरेटिव ने इस स्थानीय मुकाबले को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया।

मुख्य बातें

21 मई 2026 को फाल्टा उपचुनाव के पुनर्मतदान में BJP ने 71% वोट के साथ एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2024 के लोकसभा चुनाव के 89% वोट से गिरकर इस उपचुनाव में महज 4% पर आ गई और चौथे स्थान पर रही।
CPI(M) को 19% वोट मिले, जबकि 2024 में उसे 1% से भी कम वोट मिले थे।
29 अप्रैल की मतदान प्रक्रिया EVM छेड़छाड़ के आरोपों के चलते चुनाव आयोग ने रद्द की थी।
TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने उपचुनाव से नाम वापस लिया; IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा की तैनाती ने 'सिंघम बनाम पुष्पा' नैरेटिव को जन्म दिया।
2024 में अभिषेक बनर्जी ने फाल्टा में 1.68 लाख वोटों की बढ़त बनाई थी — डायमंड हार्बर के सातों विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 21 मई 2026 को हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार को एक लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) — जिसे 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र में 89 प्रतिशत वोट मिले थे — इस बार चौथे स्थान पर सिमट गई और उसे महज चार प्रतिशत वोट ही मिले।

सिंघम बनाम पुष्पा: चुनावी नैरेटिव की पृष्ठभूमि

इस उपचुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने का काम एक अनोखे नैरेटिव ने किया — 'सिंघम बनाम पुष्पा'भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी अजय पाल शर्मा, जो उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं, को चुनाव आयोग ने फाल्टा में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था। उनकी सख्त और निष्पक्ष कार्यशैली के कारण उन्हें 'सिंघम' का लेबल दिया गया।

दूसरी ओर, तेलुगू ब्लॉकबस्टर फिल्म से प्रेरित 'पुष्पा' का नाम तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के लिए इस्तेमाल किया गया, जिन्हें कुछ हलकों में एक स्थानीय बाहुबली के रूप में बताया जाता है। हालांकि जहांगीर खान ने अंततः उपचुनाव की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया और दावा किया कि यह फाल्टा में शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए किया गया।

29 अप्रैल की वोटिंग रद्द, फिर 21 मई को पुनर्मतदान

29 अप्रैल को हुई मतदान प्रक्रिया को चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से छेड़छाड़ और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया। इसके बाद 21 मई को पुनर्मतदान कराया गया, जिसमें BJP को 71 प्रतिशत और CPI(M) को 19 प्रतिशत वोट मिले। रिपोर्टों के अनुसार, विजेता और उपविजेता को छोड़कर अन्य सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

2024 की जीत से 2026 की हार: आंकड़ों का विरोधाभास

यह नतीजे इसलिए और भी चौंकाने वाले हैं क्योंकि फाल्टा, डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है — जहां TMC के महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने 2024 में 7 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। चुनाव आयोग के फॉर्म-20 के अनुसार, फाल्टा में अभिषेक बनर्जी ने करीब 1.68 लाख वोटों की बढ़त बनाई थी, जो डायमंड हार्बर के सातों विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक थी।

तुलनात्मक रूप से, 2024 के लोकसभा चुनाव में CPI(M) को फाल्टा में एक प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे, जबकि इस उपचुनाव में उसी पार्टी ने 19 प्रतिशत वोट हासिल कर दूसरा स्थान पाया। यह बदलाव राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है।

डायमंड हार्बर मॉडल की साख पर सवाल

विधानसभा के बाकी क्षेत्रों में TMC ने डायमंड हार्बर, बिष्णुपुर, महेशतला, बज-बज और मेटियाबुरुज सीटें बचा लीं, लेकिन BJP ने सतगछिया सीट पर 401 वोटों के मामूली अंतर से कब्जा जमाया। गौरतलब है कि राज्य चुनावों में भी TMC ने 2011 में CPI(M) से यह सीट जीतने के बाद लगातार बढ़त बनाए रखी थी — 2011 में 27,000, 2016 में 23,000 और 2021 में 40,000 से अधिक वोटों का अंतर रहा था।

आलोचकों ने आरोप लगाया कि ये नतीजे सत्ता के खेल और डराने-धमकाने की राजनीति के परिणाम थे। वहीं, अभिषेक बनर्जी और उनकी पार्टी ने इन नतीजों का श्रेय प्रशासन की जनकेंद्रित पहलों — जिनमें स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं में सुधार शामिल है — और पार्टी के मजबूत संगठन को दिया।

आगे की राह

फाल्टा का यह नतीजा पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई बहस की शुरुआत करता है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह उपचुनाव TMC के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यह देखना होगा कि क्या पार्टी इस झटके से सबक लेकर अपनी रणनीति बदलती है या 'डायमंड हार्बर मॉडल' की पुरानी सफलताओं पर निर्भर रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 2026 के विधानसभा चुनावों में TMC की रणनीति क्या होगी — और क्या पार्टी नेतृत्व इस संकेत को गंभीरता से लेगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फाल्टा उपचुनाव 2026 में किसने जीत हासिल की?
21 मई 2026 को हुए पुनर्मतदान में BJP के उम्मीदवार ने CPI(M) के उम्मीदवार को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया। BJP को 71% और CPI(M) को 19% वोट मिले, जबकि TMC चौथे स्थान पर रही।
29 अप्रैल की वोटिंग क्यों रद्द की गई?
चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुई मतदान प्रक्रिया को EVM से छेड़छाड़ और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया था। इसके बाद 21 मई को पुनर्मतदान कराया गया।
'सिंघम बनाम पुष्पा' नैरेटिव क्या था?
IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को उनकी सख्त पुलिसिंग के कारण 'सिंघम' कहा गया, जिन्हें चुनाव आयोग ने फाल्टा में पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। TMC उम्मीदवार जहांगीर खान को 'पुष्पा' का नाम दिया गया, जो कुछ हलकों में स्थानीय बाहुबली के रूप में जाने जाते हैं।
2024 में TMC की फाल्टा में क्या स्थिति थी?
2024 के लोकसभा चुनाव में TMC को फाल्टा में 89% वोट मिले थे और अभिषेक बनर्जी ने यहाँ 1.68 लाख वोटों की बढ़त बनाई थी — जो डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के सातों विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक थी। 2026 के उपचुनाव में यह घटकर 4% रह गई।
फाल्टा उपचुनाव का डायमंड हार्बर मॉडल पर क्या असर पड़ा?
फाल्टा की हार ने 'डायमंड हार्बर मॉडल' की साख पर सवाल खड़े किए हैं। आलोचकों ने इसे सत्ता की राजनीति और डराने-धमकाने का परिणाम बताया, जबकि अभिषेक बनर्जी ने इसे जनकेंद्रित विकास कार्यों से जोड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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