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क्या फरक्का जल संधि का नवीनीकरण भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई चुनौती बनेगा?

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क्या फरक्का जल संधि का नवीनीकरण भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई चुनौती बनेगा?

सारांश

बांग्लादेश में चुनावों के बाद नई सरकार का सामना फरक्का जल संधि के नवीनीकरण की चुनौती से होगा। यह संधि 2026 में समाप्त हो रही है और इसके लिए भारत के साथ नए सिरे से बातचीत करनी होगी। क्या होगा आगे? जानें इस लेख में।

मुख्य बातें

फरक्का जल संधि का नवीनीकरण भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यह संधि 2026 में समाप्त हो रही है।
पानी का वितरण एक संवेदनशील मुद्दा है।
बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता से बातचीत प्रभावित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी नवीनीकरण पर असर डाल सकता है।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फरक्का जल-बंटवारा संधि का नवीनीकरण बांग्लादेश में फरवरी के चुनावों के बाद बनने वाली नई सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होगा। यह संधि वर्ष 2026 में समाप्त हो रही है और इसमें स्वचालित विस्तार का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे दोनों देशों को नए सिरे से बातचीत करनी पड़ेगी।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित फरक्का बैराज दशकों से भारत-बांग्लादेश संबंधों का संवेदनशील केंद्र रहा है। इसका निर्माण मुख्य रूप से गंगा के पानी को हुगली नदी में मोड़ने और कोलकाता बंदरगाह की गाद हटाने के लिए किया गया था, लेकिन यह दक्षिण एशिया के जटिल सीमा-पार जल विवादों में से एक भी बन गया।

दिलचस्प बात यह है कि पहले के दोनों प्रमुख समझौते उस समय हुए थे, जब दोनों देशों में नई-नई सरकारें बनी थीं। पहला “फरक्का में गंगा जल बंटवारा समझौता” 7 नवंबर 1977 को ढाका में हुआ था। उस समय भारत में मार्च 1977 में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने थे, जबकि अप्रैल 1977 में मेजर जनरल जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने थे।

दूसरा बड़ा समझौता 12 दिसंबर 1996 को हुआ, जब भारत के प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना दोनों ही अपने-अपने पदों पर मात्र छह महीने पहले ही आए थे। दोनों ने जून 1996 में कार्यभार संभाला था।

इस बार स्थिति अलग है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक स्थिर और मजबूत सरकार है, जबकि बांग्लादेश लगभग 17 महीनों की राजनीतिक अस्थिरता के बाद लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस वर्ष आपसी सहमति से संधि का नवीनीकरण होता है, उसमें कुछ सुधार किए जाते हैं, या फिर यदि ढाका ऐसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के प्रभाव में आता है जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं, तो नई दिल्ली कड़ा रुख अपनाती है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, भारत अपने लोगों की सुरक्षा और देश की अखंडता की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के बाद, भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। यह फैसला भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाए गए व्यापक प्रतिकारात्मक कदमों का हिस्सा था।

फरक्का बैराज की परिकल्पना 1950 के दशक में की गई थी और इसका निर्माण 1975 में पूरा हुआ। इसका उद्देश्य गंगा से अधिकतम 40,000 क्यूसेक पानी हुगली नदी में मोड़ना था। हालांकि, बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) को आशंका थी कि इससे शुष्क मौसम में पानी की कमी होगी।

अप्रैल 1975 में बैराज के संचालन के बाद, जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर चल रहा था, दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। दीर्घकालिक समझौते के अभाव में 1970 और 1980 के दशकों में अस्थायी व्यवस्थाएं की गईं, लेकिन अविश्वास बना रहा।

1996 की संधि को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया। इसने गंगा जल के बंटवारे के लिए 30 वर्षों का ढांचा प्रदान किया। फरक्का में 10-दिवसीय अवधि के जल प्रवाह के आधार पर व्यवस्था तय की गई। इसके क्रियान्वयन की निगरानी एक संयुक्त समिति करती है।

हालांकि, संधि से तनाव कम हुआ, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई चुनौतियां बनी रहीं। जलवायु परिवर्तन और भारत के राज्यों में बढ़ता जल उपयोग शुष्क मौसम में प्रवाह को कम कर रहे हैं। बांग्लादेश का आरोप रहा है कि उसे कई बार, खासकर सूखे वर्षों में, तय हिस्से से कम पानी मिलता है।

पिछले एक दशक में भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, संपर्क और सुरक्षा सहयोग काफी बढ़ा है, लेकिन जल का मुद्दा बांग्लादेश में अब भी राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में फरक्का संधि का नवीनीकरण दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे की वास्तविक कसौटी साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को मजबूत करना होगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फरक्का जल संधि क्या है?
फरक्का जल संधि गंगा का पानी बंटवारे के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच एक समझौता है।
इस संधि का नवीनीकरण कब होगा?
यह संधि वर्ष 2026 में समाप्त हो रही है, इसलिए इसका नवीनीकरण फरवरी 2024 के चुनावों के बाद होगा।
फरक्का बैराज का महत्व क्या है?
फरक्का बैराज का निर्माण कोलकाता बंदरगाह की गाद हटाने और नौवहन क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया था।
बांग्लादेश को पानी की कमी का सामना क्यों करना पड़ता है?
बांग्लादेश का आरोप है कि भारत द्वारा पानी का अवरुद्ध होना उसके लिए समस्या उत्पन्न करता है, विशेषकर सूखे के मौसम में।
इस संधि के नवीनीकरण में क्या चुनौतियाँ हो सकती हैं?
राजनीतिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन और अविश्वास जैसे कारक संधि के नवीनीकरण में चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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