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भारत-बांग्लादेश साझा नदियों पर द्विपक्षीय तंत्र मौजूद, गंगा जल संधि पर बोला विदेश मंत्रालय

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भारत-बांग्लादेश साझा नदियों पर द्विपक्षीय तंत्र मौजूद, गंगा जल संधि पर बोला विदेश मंत्रालय

सारांश

भारत-बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियाँ हैं और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि गंगा जल बंटवारा संधि सहित सभी मुद्दे संयुक्त नदी आयोग के स्ट्रक्चर्ड द्विपक्षीय ढाँचे में देखे जाएँगे। दिसंबर 2026 में 1996 की फरक्का संधि की समाप्ति निकट है, और BNP नेता मिर्ज़ा फखरुल की टिप्पणियों ने नवीनीकरण की राजनीति को नई गर्मी दे दी है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 2 जून को कहा कि भारत-बांग्लादेश साझा नदी मुद्दों के लिए द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।
दोनों देशों के बीच कुल 54 साझा नदियाँ हैं, जिनकी निगरानी संयुक्त नदी आयोग करता है।
1996 की गंगा जल बंटवारा संधि 30 वर्ष के लिए थी और दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।
संधि के तहत फरक्का में 10 दिन के प्रवाह मापन के आधार पर पानी बँटता है; न्यूनतम 35,000 क्यूसेक की गारंटी है।
BNP महासचिव मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कथित तौर पर कहा कि द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य संधि के नवीनीकरण पर टिका है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार, 2 जून को स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच साझा नदियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित द्विपक्षीय तंत्र पहले से मौजूद है, और गंगा जल बंटवारा संधि से जुड़े मामलों पर भी इसी ढाँचे के तहत विचार किया जाएगा। यह बयान बांग्लादेश की राजनीतिक हलचलों के बीच आया है, जहाँ दिसंबर 2026 में संधि की समाप्ति को लेकर बहस तेज़ हो चुकी है।

विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण

नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव और स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्री मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर की हालिया टिप्पणियों पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया।

जायसवाल ने कहा, “भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियाँ मिलती हैं और हमारे पास एक संयुक्त नदी आयोग है, जो दोनों देशों के बीच साझा सभी नदियों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड द्विपक्षीय सिस्टम है। हम नदियों पर अपने स्ट्रक्चर्ड द्विपक्षीय सहयोग के हिस्से के तौर पर इन मामलों को भी देखेंगे।”

BNP नेता की टिप्पणी की पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, आलमगीर ने कथित तौर पर कहा था कि बांग्लादेश और भारत के बीच मज़बूत संबंधों का भविष्य गंगा जल बंटवारा समझौते के नवीनीकरण पर टिका है। इस संधि को आमतौर पर फरक्का संधि के नाम से भी जाना जाता है और यह दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।

1996 की संधि और उसका ढाँचा

मौजूदा गंगा जल बंटवारा संधि पर भारत और बांग्लादेश ने 1996 में हस्ताक्षर किए थे और इसे एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना गया था। संधि ने कठिन शुष्क मौसम (जनवरी से मई) के दौरान गंगा के पानी के बँटवारे के लिए 30 वर्ष का ढाँचा दिया।

इसके क्रियान्वयन की निगरानी एक संयुक्त आयोग करता है, जो फरक्का में 10 दिनों के प्रवाह मापन के आधार पर काम करता है और विवादों के समाधान के लिए भी ज़िम्मेदार है। कुछ विशेष परिस्थितियों में हर देश के लिए न्यूनतम 35,000 क्यूसेक पानी की गारंटी का प्रावधान है।

क्रियान्वयन की चुनौतियाँ

यद्यपि इस संधि से तनाव कम हुआ, फिर भी इसके अमल में कई व्यावहारिक मुश्किलें सामने आईं। जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पीछे हटने और भारत के राज्यों में ऊपरी धारा (अपस्ट्रीम) में बढ़ते जल उपयोग के कारण शुष्क मौसम में नदी का प्रवाह घटा है, जिससे आवंटन की प्रतिबद्धताएँ पूरी करना और कठिन हो गया है।

बांग्लादेश आलोचकों का कहना है कि उसे अक्सर अपने हिस्से से कम पानी मिलता है, खासकर सूखे के वर्षों में, जबकि भारत हाइड्रोलॉजिकल बाधाओं का हवाला देता रहा है।

आगे क्या

संधि के इसी वर्ष के अंत में समाप्त होने के मद्देनज़र, इसका नवीनीकरण आने वाले महीनों में भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय वार्ता का केंद्रीय एजेंडा बनने की उम्मीद है। दोनों पक्षों की पैरवी अब इस बात पर तय करेगी कि अगला ढाँचा कैसा रूप लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बदले हुए बांग्लादेश के साथ भारत की कूटनीतिक केमिस्ट्री की पहली बड़ी परीक्षा होगी। शेख हसीना के बाद के राजनीतिक परिदृश्य में BNP जैसी ताकतों के स्वर तेज़ हैं, और ‘नवीनीकरण’ अब घरेलू राजनीति का औज़ार बनता दिख रहा है। दूसरी ओर, जलवायु परिवर्तन और अपस्ट्रीम खपत के कारण असली प्रवाह घट चुका है — यानी कोई भी नया फॉर्मूला 1996 की मान्यताओं पर खड़ा नहीं रह सकता। विदेश मंत्रालय का ‘स्ट्रक्चर्ड मैकेनिज़्म’ वाला जवाब संतुलित ज़रूर है, लेकिन समय कम है और दाँव बड़े।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा जल बंटवारा संधि क्या है और यह कब समाप्त हो रही है?
यह भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई 30 वर्षीय संधि है, जो शुष्क मौसम (जनवरी-मई) में फरक्का बैराज से गंगा के पानी के बँटवारे का ढाँचा तय करती है। इसे फरक्का संधि भी कहा जाता है और यह दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।
विदेश मंत्रालय ने मिर्ज़ा फखरुल की टिप्पणी पर क्या कहा?
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियाँ हैं और संयुक्त नदी आयोग के रूप में एक स्ट्रक्चर्ड द्विपक्षीय तंत्र पहले से मौजूद है। गंगा जल बंटवारा सहित सभी मुद्दे इसी ढाँचे के तहत देखे जाएँगे।
भारत और बांग्लादेश के बीच कितनी साझा नदियाँ बहती हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियाँ साझा रूप से बहती हैं। इनसे जुड़े मामलों की निगरानी संयुक्त नदी आयोग करता है।
संधि के क्रियान्वयन में मुख्य चुनौतियाँ क्या रही हैं?
जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पीछे हटने और अपस्ट्रीम भारतीय राज्यों में बढ़ती जल खपत के कारण शुष्क मौसम में गंगा का प्रवाह कम हुआ है, जिससे आवंटन प्रतिबद्धताएँ पूरी करना कठिन हो गया है। बांग्लादेश आरोप लगाता रहा है कि उसे हिस्से से कम पानी मिलता है, जबकि भारत हाइड्रोलॉजिकल बाधाओं का हवाला देता है।
संधि के नवीनीकरण से क्या उम्मीद है?
चूँकि संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, इसका नवीनीकरण आने वाले महीनों में भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय बातचीत का अहम मुद्दा बनने की उम्मीद है। नया ढाँचा बदले हुए जलवायु और राजनीतिक संदर्भ में बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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