15 अगस्त 2026
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80वें स्वतंत्रता दिवस पर हुसैन दलवई: गांधी-आंबेडकर के विचार जीवित, संविधान की रक्षा हर नागरिक का फर्ज

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80वें स्वतंत्रता दिवस पर हुसैन दलवई: गांधी-आंबेडकर के विचार जीवित, संविधान की रक्षा हर नागरिक का फर्ज

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने गांधी-आंबेडकर की विरासत को याद दिलाया, मोदी सरकार को नागरिक अधिकारों पर सतर्क रहने की नसीहत दी और 'वंदे मातरम' को नई शुरुआत की तरह पेश करने पर सवाल उठाया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर गांधी-आंबेडकर की विचारधारा को प्रासंगिक बताया।
भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की रक्षा प्रत्येक नागरिक और सरकार की जिम्मेदारी है।
उमर खालिद और शरजील इमाम की कानूनी स्थिति का उदाहरण देते हुए संवैधानिक अधिकारों पर चिंता जताई।
RSS द्वारा तिरंगा फहराने को सकारात्मक बताया, लेकिन केवल प्रतीकात्मक कदम पर्याप्त नहीं बताया।
'वंदे मातरम' को लाल किले पर पहली बार गाए जाने की तरह पेश करने को अनुचित करार दिया।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधन, महात्मा गांधी की विचारधारा और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी। दलवई ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का उत्सव जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि देश के सामने खड़े बुनियादी सवालों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक

दलवई ने कहा कि महात्मा गांधी ने जो वैचारिक मार्ग दिखाया, वह आज भी उन जगहों पर जीवित है जहाँ लोग उस रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने हाल के जन-आंदोलनों और उनमें छात्रों की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गांधीवादी चेतना के जीवित रहने का प्रमाण है। गौरतलब है कि 80 वर्षों की स्वतंत्रता के बाद भी गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांत लोकतांत्रिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं।

आंबेडकर और संविधान की अहमियत

कांग्रेस नेता ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान-निर्माण में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वयं महात्मा गांधी ने बाबासाहेब का सम्मान किया और उनके कार्य को ऐतिहासिक माना। दलवई के अनुसार, आंबेडकर ने अथक परिश्रम के बाद देश को जो संविधान दिया, उसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक और सरकार की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत संविधान के माध्यम से चलेगा — यह देश की मूल आत्मा है।

मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया और नागरिक अधिकारों पर चेतावनी

प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन पर टिप्पणी करते हुए दलवई ने कहा कि यदि सरकार पिछली कांग्रेस सरकारों के कार्यों से आगे जाने का संकल्प लेती है तो यह स्वागतयोग्य है। हालाँकि, उन्होंने सरकार को संविधान-प्रदत्त नागरिक अधिकारों के प्रति सतर्क रहने की नसीहत दी। दलवई ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति और संघर्ष की स्वतंत्रता देता है और इस स्वतंत्रता पर किसी को आँच नहीं आनी चाहिए। उन्होंने उमर खालिद और शरजील इमाम की लंबे समय से चल रही कानूनी स्थिति का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि एक ओर संविधान की दुहाई दी जाती है और दूसरी ओर संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करने वाली परिस्थितियाँ बनी रहती हैं।

आरएसएस और तिरंगे पर बयान

दलवई ने कहा कि पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लोग तिरंगा नहीं फहराते थे, लेकिन अब वे तिरंगा लगाने लगे हैं — यह बदलाव सकारात्मक है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि केवल प्रतीकात्मक कदम पर्याप्त नहीं हैं; सही मायनों में देश और संविधान के लिए काम करना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस को सभी मिलकर मनाएँ और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करें।

'वंदे मातरम' विवाद पर स्पष्टीकरण

लाल किले पर 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर दलवई ने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की धरोहर है और इसे पहले भी अनेक अवसरों पर गाया जाता रहा है। उन्होंने आपत्ति जताई कि इसे आज पहली बार गाए जाने की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है। कांग्रेस के कार्यकाल में भी 'वंदे मातरम' को कार्यक्रमों में स्थान दिया जाता था — इस ऐतिहासिक तथ्य को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये वक्तव्य विपक्षी एकजुटता को नई दिशा देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे उठाने का समय और तरीका यह संकेत देता है कि विपक्ष सांस्कृतिक प्रतीकों की राजनीति में पिछड़ने के जोखिम से सचेत है। RSS पर नरम रुख और सरकार पर तीखी आलोचना — यह संतुलन बताता है कि कांग्रेस व्यापक गठबंधन बनाने और कट्टर विरोध के बीच की पतली रेखा पर चल रही है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने स्वतंत्रता दिवस पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 15 अगस्त 2026 को कहा कि गांधी और आंबेडकर के विचार आज भी जीवित हैं और संविधान की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार को नागरिक अधिकारों के प्रति सतर्क रहने की नसीहत दी।
दलवई ने उमर खालिद और शरजील इमाम का उल्लेख क्यों किया?
दलवई ने उमर खालिद और शरजील इमाम की लंबे समय से चल रही कानूनी स्थिति का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि एक ओर संविधान की बात की जाती है और दूसरी ओर संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करने वाली परिस्थितियाँ बनी रहती हैं।
'वंदे मातरम' पर दलवई का क्या रुख रहा?
दलवई ने कहा कि 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता आंदोलन की धरोहर है और पहले भी गाया जाता रहा है। उन्होंने इसे आज पहली बार गाए जाने की तरह पेश करने को अनुचित बताया और कहा कि कांग्रेस के दौर में भी इसे कार्यक्रमों में स्थान दिया जाता था।
दलवई ने RSS के बारे में क्या कहा?
दलवई ने कहा कि पहले RSS के लोग तिरंगा नहीं फहराते थे, लेकिन अब फहराने लगे हैं — यह सकारात्मक बदलाव है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि केवल प्रतीकात्मक कदम पर्याप्त नहीं हैं; सही मायनों में देश और संविधान के लिए काम करना ज़रूरी है।
दलवई ने कांग्रेस सरकारों के योगदान का जिक्र किस संदर्भ में किया?
दलवई ने आजादी के बाद बिजली, बड़े बांध, सड़कों, पुलों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण में कांग्रेस सरकारों की भूमिका का उल्लेख किया। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की पृष्ठभूमि में की गई, जिसमें उन्होंने पिछली सरकारों से आगे जाने की बात कही थी।
राष्ट्र प्रेस
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