कानपुर: गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा गायब, सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने खून से लिखी चिट्ठी
सारांश
मुख्य बातें
कानपुर में स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अमिताभ बाजपेयी ने 17 मई 2026 को प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में अपने खून से पत्र लिखकर जिला प्रशासन से जवाब माँगा है। उनका आरोप है कि मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान हटाई गई यह प्रतिमा आज तक पुनर्स्थापित नहीं की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक अमिताभ बाजपेयी के अनुसार, कानपुर मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा को उस स्थान से हटा दिया गया था। मेट्रो परियोजना पूरी होने के बाद जब प्रतिमा की खोज शुरू की गई, तो पता चला कि वह अभी तक स्थापित नहीं हुई। बाजपेयी ने बताया कि प्रतिमा की तलाश के लिए उन्होंने एक अभियान भी चलाया।
उन्होंने कहा, 'जब यह अभियान शुरू हुआ तो प्रतिमा रखने वाले लोग खुद सामने आए और गुंडागर्दी करने लगे। प्रशासन उनसे प्रतिमा तक नहीं ले पाया।' इसके बाद जिलाधिकारी (डीएम) को पत्र लिखा गया। प्रतिमा स्थापना की जगह भी बदल दी गई, जिसे विधायक ने स्वीकार कर लिया — फिर भी प्रतिमा अब तक स्थापित नहीं हुई।
खून से पत्र क्यों
बाजपेयी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इससे पहले कई बार साधारण पत्र लिखे, किंतु प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनके शब्दों में, 'पेन से कई बार चिट्ठी लिखी, लेकिन अधिकारियों को समझ नहीं आया, इसलिए खून से चिट्ठी लिखने की नौबत आई। शायद अब उनकी बात समझ आए।' यह कदम प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग प्रतिमा को अपने कब्जे में रखे हैं, वे शहर में खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि प्रशासन न उन्हें गिरफ्तार कर पा रहा है और न ही प्रतिमा बरामद कर पा रहा है।
उत्तर प्रदेश कैबिनेट विस्तार पर निशाना
इसी बातचीत में अमिताभ बाजपेयी ने उत्तर प्रदेश में हाल के कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे में हो रही देरी पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 'डबल इंजन की सरकार के दोनों इंजन आपस में टकरा रहे हैं — यह सत्ता की टकराहट है।' उनके अनुसार, पहले की तरह इस बार भी मंत्री केंद्र की इच्छा से बने हैं।
बाजपेयी ने यह भी कहा कि अधिकतर महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री के पास हैं और मुख्यमंत्री इन्हें बाँटना नहीं चाहते। उनके शब्दों में, 'जो लोग मंत्री बने हैं, वे कुछ गाड़ियों और सिपाहियों के लिए मंत्री हैं — इन्हें जल्दी विभाग नहीं मिलने वाला।'
गणेश शंकर विद्यार्थी कौन थे
गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख पत्रकार और समाज सुधारक थे, जो कानपुर से गहरे रूप से जुड़े थे। 1931 के कानपुर साम्प्रदायिक दंगों के दौरान दोनों समुदायों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी विरासत को लेकर इस तरह का विवाद सार्वजनिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।
आगे क्या
अब तक जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विधायक अमिताभ बाजपेयी का कहना है कि यदि प्रतिमा शीघ्र स्थापित नहीं की गई, तो वे आंदोलन का दायरा बढ़ाएँगे। यह मामला कानपुर में स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिए एक कसौटी बन गया है।