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७ साल बाद पकड़ा गया कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद तस्लीम, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उदयपुर से किया गिरफ्तार

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७ साल बाद पकड़ा गया कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद तस्लीम, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उदयपुर से किया गिरफ्तार

सारांश

सात साल की फरारी खत्म — अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उदयपुर में संयुक्त अभियान चलाकर १९९२ के राधिका जिमखाना नरसंहार के दोषी और अब्दुल लतीफ गैंग के पूर्व शूटर मोहम्मद तस्लीम को दबोचा। आरोपी ने नई पहचान और प्रॉपर्टी कारोबार की आड़ में खुद को छुपाए रखा था।

मुख्य बातें

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने २१ जून को कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद तस्लीम को उदयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया।
तस्लीम २०१९ में पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था और लगभग ७ वर्षों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
वह १९९२ के राधिका जिमखाना नरसंहार में दोषी है, जिसमें ९ लोगों की मौत हुई थी और एके-४७ का इस्तेमाल हुआ था।
सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा था।
वह पूर्व राज्यसभा सांसद रऊफ वलीउल्लाह की हत्या मामले में भी आरोपी है।
गिरफ्तारी के बाद तस्लीम को साबरमती सेंट्रल जेल भेजा जा रहा है।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने २१ जून २०२६ को कुख्यात अब्दुल लतीफ गैंग के पूर्व शूटर मोहम्मद तस्लीम उर्फ मोहम्मद तस्लीम मोहम्मद उमर शेख को उदयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया। तस्लीम २०१९ में पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था और लगभग सात वर्षों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। वह १९९२ के राधिका जिमखाना नरसंहार मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट चुका है और पूर्व राज्यसभा सांसद रऊफ वलीउल्लाह की हत्या मामले में भी आरोपी है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, मोहम्मद तस्लीम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान, ठिकाना और संपर्क माध्यम लगातार बदले। उसने उदयपुर में शादी की और संपत्ति कारोबार (प्रॉपर्टी डीलिंग) शुरू किया ताकि वह आम नागरिक की तरह दिखे और पुलिस की नज़र से बचा रहे। विशेष मानव और तकनीकी खुफिया जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे राजस्थान में ट्रेस किया और एक संयुक्त अभियान में दबोच लिया।

गिरफ्तारी के बाद तस्लीम को पुलिस हिरासत में अहमदाबाद लाया गया, जहाँ से आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे साबरमती सेंट्रल जेल भेजा जा रहा है।

राधिका जिमखाना नरसंहार: पृष्ठभूमि

१९९२ में अहमदाबाद के ओधव इलाके में स्थित राधिका जिमखाना क्लब पर हथियारबंद हमलावरों ने ऑटोमैटिक हथियारों — जिनमें एके-४७ भी शामिल थी — से अंधाधुंध फायरिंग की थी। यह हमला प्रतिद्वंद्वी शराब माफिया हंसराज त्रिवेदी को निशाना बनाकर किया गया था। इस नरसंहार में नौ लोगों की मौत हुई थी और इसे राज्य में संगठित अपराध के इतिहास में असॉल्ट राइफल के शुरुआती इस्तेमाल के मामलों में से एक माना जाता है।

तस्लीम को इस मामले में दोषी ठहराया गया था और सर्वोच्च न्यायालय ने भी उसकी आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा था। गौरतलब है कि २०१६ की पैरोल के दौरान भी उसने नई पहचान बनाने की कोशिश की थी।

रऊफ वलीउल्लाह हत्याकांड से संबंध

तस्लीम पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता रऊफ वलीउल्लाह की हत्या मामले में भी आरोपी है। रिपोर्टों के अनुसार, वलीउल्लाह को कथित तौर पर गैंग गतिविधियों को उजागर करने की कोशिश के कारण निशाना बनाया गया था।

पुलिस की प्रतिक्रिया

डीसीपी (क्राइम ब्रांच) अजीत राजियन ने बताया कि आरोपी पैरोल के बाद से फरार था और अपनी पहचान बदलकर तथा संपत्ति कारोबार के ज़रिए पुलिस से बचता रहा। उन्होंने कहा, '१९९२ में अहमदाबाद के राधिका जिमखाना में एक बेहद चर्चित हमला हुआ था, जिसमें नौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी। यह अहमदाबाद का पहला मामला था, जिसमें एके-४७ जैसे ऑटोमैटिक हथियार का इस्तेमाल हुआ था।'

राजियन ने आगे कहा, 'मुख्य आरोपी तस्लीम उमर शेख है। उसे पहले आजीवन कारावास की सज़ा हुई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। वह २०१९-२० से पैरोल जंप करके फरार था। खुफिया जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच टीम ने उसे उदयपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।'

आगे क्या होगा

पुलिस अब तस्लीम के हाल के संपर्कों और गतिविधियों की जाँच कर रही है। उसके फरारी के दौरान बनाए गए नेटवर्क और संभावित आपराधिक संबंधों की भी पड़ताल की जाएगी। यह गिरफ्तारी १९९० के दशक के अहमदाबाद गैंग युग के एक अहम अध्याय को नई कानूनी जाँच के दायरे में लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उसने शादी की और संपत्ति कारोबार भी चलाया। यह अकेला मामला नहीं है; गुजरात और देश के अन्य राज्यों में पैरोल जंप के मामले बार-बार सामने आते हैं, फिर भी व्यवस्थागत सुधार की गति धीमी रही है। १९९२ का राधिका जिमखाना नरसंहार संगठित अपराध के उस दौर की याद दिलाता है जब राज्य में गैंग युद्ध अपने चरम पर था — और यह गिरफ्तारी उस अध्याय की अधूरी जवाबदेही को फिर से केंद्र में लाती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहम्मद तस्लीम कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
मोहम्मद तस्लीम अब्दुल लतीफ गैंग का पूर्व शूटर है, जिसे १९९२ के राधिका जिमखाना नरसंहार में दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी। वह २०१९ में पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था, जिसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उसे उदयपुर से गिरफ्तार किया।
१९९२ का राधिका जिमखाना नरसंहार क्या था?
१९९२ में अहमदाबाद के ओधव इलाके में स्थित राधिका जिमखाना क्लब पर हथियारबंद हमलावरों ने एके-४७ सहित ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग की थी, जिसमें ९ लोगों की मौत हुई थी। यह हमला प्रतिद्वंद्वी शराब माफिया हंसराज त्रिवेदी को निशाना बनाकर किया गया था और इसे राज्य में असॉल्ट राइफल के शुरुआती इस्तेमाल के मामलों में गिना जाता है।
तस्लीम ७ साल तक पुलिस से कैसे बचता रहा?
पुलिस के अनुसार, तस्लीम ने उदयपुर में शादी की और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया ताकि वह आम नागरिक की तरह दिखे। उसने लगातार अपनी पहचान, ठिकाना और संपर्क माध्यम बदले। विशेष मानव और तकनीकी खुफिया जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच ने अंततः उसे राजस्थान में ट्रेस किया।
रऊफ वलीउल्लाह हत्याकांड में तस्लीम की क्या भूमिका बताई गई है?
तस्लीम पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता रऊफ वलीउल्लाह की हत्या मामले में आरोपी है। रिपोर्टों के अनुसार, वलीउल्लाह को कथित तौर पर गैंग गतिविधियों को उजागर करने की कोशिश के कारण निशाना बनाया गया था।
अब तस्लीम के खिलाफ आगे क्या होगा?
गिरफ्तारी के बाद तस्लीम को अहमदाबाद लाया गया है और साबरमती सेंट्रल जेल भेजा जा रहा है। पुलिस उसके फरारी के दौरान बनाए गए संपर्कों और गतिविधियों की जाँच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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