७ साल बाद पकड़ा गया कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद तस्लीम, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उदयपुर से किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने २१ जून २०२६ को कुख्यात अब्दुल लतीफ गैंग के पूर्व शूटर मोहम्मद तस्लीम उर्फ मोहम्मद तस्लीम मोहम्मद उमर शेख को उदयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया। तस्लीम २०१९ में पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था और लगभग सात वर्षों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। वह १९९२ के राधिका जिमखाना नरसंहार मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट चुका है और पूर्व राज्यसभा सांसद रऊफ वलीउल्लाह की हत्या मामले में भी आरोपी है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद तस्लीम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान, ठिकाना और संपर्क माध्यम लगातार बदले। उसने उदयपुर में शादी की और संपत्ति कारोबार (प्रॉपर्टी डीलिंग) शुरू किया ताकि वह आम नागरिक की तरह दिखे और पुलिस की नज़र से बचा रहे। विशेष मानव और तकनीकी खुफिया जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे राजस्थान में ट्रेस किया और एक संयुक्त अभियान में दबोच लिया।
गिरफ्तारी के बाद तस्लीम को पुलिस हिरासत में अहमदाबाद लाया गया, जहाँ से आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे साबरमती सेंट्रल जेल भेजा जा रहा है।
राधिका जिमखाना नरसंहार: पृष्ठभूमि
१९९२ में अहमदाबाद के ओधव इलाके में स्थित राधिका जिमखाना क्लब पर हथियारबंद हमलावरों ने ऑटोमैटिक हथियारों — जिनमें एके-४७ भी शामिल थी — से अंधाधुंध फायरिंग की थी। यह हमला प्रतिद्वंद्वी शराब माफिया हंसराज त्रिवेदी को निशाना बनाकर किया गया था। इस नरसंहार में नौ लोगों की मौत हुई थी और इसे राज्य में संगठित अपराध के इतिहास में असॉल्ट राइफल के शुरुआती इस्तेमाल के मामलों में से एक माना जाता है।
तस्लीम को इस मामले में दोषी ठहराया गया था और सर्वोच्च न्यायालय ने भी उसकी आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा था। गौरतलब है कि २०१६ की पैरोल के दौरान भी उसने नई पहचान बनाने की कोशिश की थी।
रऊफ वलीउल्लाह हत्याकांड से संबंध
तस्लीम पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता रऊफ वलीउल्लाह की हत्या मामले में भी आरोपी है। रिपोर्टों के अनुसार, वलीउल्लाह को कथित तौर पर गैंग गतिविधियों को उजागर करने की कोशिश के कारण निशाना बनाया गया था।
पुलिस की प्रतिक्रिया
डीसीपी (क्राइम ब्रांच) अजीत राजियन ने बताया कि आरोपी पैरोल के बाद से फरार था और अपनी पहचान बदलकर तथा संपत्ति कारोबार के ज़रिए पुलिस से बचता रहा। उन्होंने कहा, '१९९२ में अहमदाबाद के राधिका जिमखाना में एक बेहद चर्चित हमला हुआ था, जिसमें नौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी। यह अहमदाबाद का पहला मामला था, जिसमें एके-४७ जैसे ऑटोमैटिक हथियार का इस्तेमाल हुआ था।'
राजियन ने आगे कहा, 'मुख्य आरोपी तस्लीम उमर शेख है। उसे पहले आजीवन कारावास की सज़ा हुई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। वह २०१९-२० से पैरोल जंप करके फरार था। खुफिया जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच टीम ने उसे उदयपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।'
आगे क्या होगा
पुलिस अब तस्लीम के हाल के संपर्कों और गतिविधियों की जाँच कर रही है। उसके फरारी के दौरान बनाए गए नेटवर्क और संभावित आपराधिक संबंधों की भी पड़ताल की जाएगी। यह गिरफ्तारी १९९० के दशक के अहमदाबाद गैंग युग के एक अहम अध्याय को नई कानूनी जाँच के दायरे में लाती है।