मार्शल आर्ट्स टीचर से हत्यारा बना यूट्यूबर सलीम गिरफ्तार, 31 साल पुरानी मर्डर मिस्ट्री का खुलासा

Click to start listening
मार्शल आर्ट्स टीचर से हत्यारा बना यूट्यूबर सलीम गिरफ्तार, 31 साल पुरानी मर्डर मिस्ट्री का खुलासा

सारांश

दिल्ली पुलिस ने 31 साल पुराने अपहरण-हत्याकांड में 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर सलीम वास्तिक को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। 1995 में 13 वर्षीय बच्चे की हत्या के दोषी इस शख्स ने खुद को मृत घोषित कर नई पहचान बनाई और यूट्यूब पर शोहरत कमाई। एक बॉलीवुड निर्माता ने बायोपिक के लिए ₹15 लाख एडवांस भी दिया था।

Key Takeaways

  • यूट्यूबर सलीम वास्तिक को 25 अप्रैल 2025 को गाजियाबाद के लोनी से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया।
  • 20 जनवरी 1995 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का अपहरण कर ₹30,000 फिरौती मांगी गई और बाद में हत्या कर दी गई।
  • 5 अगस्त 1997 को अदालत ने सलीम और सह-आरोपी अनिल को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
  • 24 नवंबर 2000 को अंतरिम जमानत मिलने के बाद सलीम फरार हो गया और उसने खुद को मृत घोषित करवाकर नई पहचान बनाई।
  • फरार होने के बाद सलीम हरियाणा के करनाल-अंबाला में छिपा रहा और 2010 से लोनी में 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर के रूप में सक्रिय था।
  • गिरफ्तारी से पहले एक बॉलीवुड निर्माता ने उसकी बायोपिक के लिए ₹15 लाख का एडवांस चेक दिया था।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल। दिल्ली पुलिस ने 31 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड में एक चौंकाने वाली गिरफ्तारी को अंजाम दिया है। यूट्यूबर सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया है, जो 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक 13 वर्षीय बच्चे संदीप बंसल के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी था। सजा सुनाए जाने के बाद जमानत पर छूटकर फरार हुए इस शख्स ने खुद को मृत घोषित करवाकर नई पहचान बनाई और 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर के रूप में प्रसिद्धि हासिल की।

शामली से दिल्ली तक: एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक की अपराध की राह

सलीम वास्तिक की कहानी उत्तर प्रदेश के शामली जिले के नानूपुरा इलाके से शुरू होती है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, उसने शामली में शाओलिन कुंग फू मार्शल आर्ट की विधिवत ट्रेनिंग ली। रोजगार की तलाश में वह अपने परिवार के साथ दिल्ली आ गया और दरियागंज स्थित रामजस स्कूल में मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक के पद पर काम करने लगा।

इसके समानांतर, वह मुस्तफाबाद से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में जैकेट सप्लाई के कारोबार में भी सक्रिय हो गया। इसी दौरान उसकी मुलाकात सह-आरोपी अनिल से हुई, जो आगे चलकर इस जघन्य अपराध का मुख्य सूत्रधार बना।

20 जनवरी 1995: अपहरण और फिरौती की खौफनाक वारदात

20 जनवरी 1995 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे का अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उस कारोबारी को फोन किया गया और बच्चे की सुरक्षित वापसी के बदले ₹30,000 की फिरौती मांगी गई।

कॉलर ने निर्देश दिया कि फिरौती की राशि लोनी फ्लाईओवर के पास बस स्टैंड पर ले जाकर बागपत जाने वाली बस में सामान रखने की जगह पर छोड़ी जाए। साथ ही यह कड़ी चेतावनी भी दी गई कि पुलिस को सूचित करने पर बच्चे की जान ले ली जाएगी। हालांकि परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश बच्चे की हत्या कर दी गई।

जांच के दौरान एक पड़ोसी के बयान के आधार पर रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक सलीम खान पर संदेह हुआ, जिसने बच्चे को उस समय के आसपास सलीम के साथ देखा था। पुलिस टीम जब उसके घर पहुंची तो वह मौजूद था। पूछताछ में उसने मुस्तफाबाद स्थित भागीरथी वाटर पंप के पास एक नाले का ठिकाना बताया, जहां से बच्चे का शव बरामद हुआ।

दोषसिद्धि, जमानत और फरारी: न्याय से 24 साल की भागमभाग

जांच में सामने आया कि अनिल ने ही फिरौती के लिए फोन किया था और किसी अमीर परिवार के बच्चे के अपहरण का विचार सलीम को दिया था। 4 फरवरी 1995 को अनिल ने अदालत में आत्मसमर्पण किया। उसकी झुग्गी से मृतक की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग जैसे अहम साक्ष्य भी बरामद हुए।

5 अगस्त 1997 को अदालत ने दोनों आरोपियों — सलीम और अनिल — को दोषी ठहराते हुए जुर्माने सहित आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। अपील लंबित रहने के दौरान 24 नवंबर 2000 को सलीम को अंतरिम जमानत मिली, जिसके बाद वह आत्मसमर्पण किए बिना फरार हो गया।

नई पहचान, नया धर्म और यूट्यूब पर शोहरत

फरार होने के बाद सलीम ने हरियाणा के करनाल और अंबाला में छिपकर अलमारी बनाने का काम किया। 2010 में वह स्थायी रूप से गाजियाबाद के लोनी में बस गया। यहां उसने सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद के नाम से नई पहचान बनाई और महिलाओं के कपड़ों और अन्य सामानों की दुकान खोली।

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि उसने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर में खुद को मृत घोषित करवा दिया। इस्लाम छोड़कर नई धार्मिक पहचान अपनाई और 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर के रूप में सोशल मीडिया पर काफी प्रसिद्धि हासिल कर ली। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक अपराधी डिजिटल दुनिया की आड़ में दशकों तक कानून की पकड़ से बाहर रह सकता है।

क्राइम ब्रांच की कार्रवाई और बॉलीवुड बायोपिक का खुलासा

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को जघन्य अपराधों में शामिल फरार अपराधियों पर निगरानी का काम सौंपा गया था। इसी ऑपरेशन के तहत एक गुप्त सूचना मिली कि 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर सलीम वास्तिक दरअसल 31 साल पुराने अपहरण और हत्याकांड का दोषी है जिसने खुद को मृत घोषित करवाया था।

कड़कड़डूमा कोर्ट से मामले का विवरण जुटाया गया। फिंगरप्रिंट मिलान और पुरानी तस्वीरों के जरिए पुष्टि हुई कि यह वही सलीम है। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस की मदद से उसे शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में सलीम ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया — एक मशहूर बॉलीवुड फिल्म निर्माता ने उससे संपर्क किया था और उसकी जिंदगी पर बायोपिक बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस सिलसिले में उसे कॉन्ट्रैक्ट के एडवांस के तौर पर ₹15 लाख का चेक भी मिला था।

यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली और फरार अपराधियों की निगरानी के लिए एक बड़ी चुनौती को उजागर करता है। अब देखना होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित अपील और नई परिस्थितियों में अदालत क्या रुख अपनाती है और सलीम को उसके जघन्य अपराध की पूरी सजा मिल पाती है या नहीं।

Point of View

वह डिजिटल युग में यूट्यूब पर लाखों की फॉलोइंग बना रहा था। यह सवाल उठता है कि क्या हमारी जमानत और फरारी निगरानी प्रणाली इतनी कमजोर है कि एक उम्रकैद का दोषी 31 साल तक सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रह सके? बॉलीवुड बायोपिक का प्रस्ताव यह भी दर्शाता है कि समाज में अपराधियों के 'ग्लैमराइजेशन' की प्रवृत्ति कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

यूट्यूबर सलीम वास्तिक को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
सलीम वास्तिक को 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल के अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया। अदालत ने 1997 में उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन वह जमानत के बाद फरार हो गया था।
सलीम वास्तिक ने 31 साल तक पुलिस से कैसे बचा रहा?
सलीम ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को धोखा देने के लिए खुद को मृत घोषित करवाया, धर्म परिवर्तन किया और सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद नाम से नई पहचान बनाई। 2010 से वह गाजियाबाद के लोनी में रह रहा था और 'एक्स-मुस्लिम' यूट्यूबर के रूप में सक्रिय था।
सलीम वास्तिक का मार्शल आर्ट्स से क्या संबंध था?
सलीम ने उत्तर प्रदेश के शामली में शाओलिन कुंग फू मार्शल आर्ट सीखा था। दिल्ली आने के बाद वह दरियागंज के रामजस स्कूल में मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक के रूप में काम करता था, जहीं से वह अपराध की दुनिया में खिंचा।
सलीम वास्तिक के बारे में बॉलीवुड बायोपिक का क्या मामला है?
पूछताछ के दौरान सलीम ने खुलासा किया कि एक मशहूर बॉलीवुड फिल्म निर्माता उसकी जिंदगी पर बायोपिक बनाना चाहते थे और उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट के एडवांस के तौर पर ₹15 लाख का चेक भी दिया था। फिल्म निर्माता की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस मामले में सह-आरोपी अनिल का क्या हुआ?
सह-आरोपी अनिल ने 4 फरवरी 1995 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। उसकी झुग्गी से मृतक की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग बरामद हुए थे। 1997 में उसे भी आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
Nation Press