सिक्किम में IS से जुड़ा 19 वर्षीय गिरफ्तार, पुलिस बोली — राज्य में कोई आतंकी नेटवर्क नहीं
सारांश
मुख्य बातें
सिक्किम पुलिस ने 1 जुलाई 2026 को गंगटोक के नाम नांग निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद अर्जू को कथित इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि राज्य में किसी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक साजिश के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं — यह मामला फिलहाल एकल व्यक्ति के कथित ऑनलाइन सेल्फ-रेडिकलाइजेशन तक सीमित है।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
सदर थाना पुलिस ने दिल्ली पुलिस के सहयोग से संयुक्त अभियान में मोहम्मद अर्जू को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई राज्य स्पेशल ब्रांच और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच का नेतृत्व डीएसपी मिंग्यूर टेंपो नादिक कर रहे हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बिना किसी प्रत्यक्ष संपर्क के ऑनलाइन चरमपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ।
छापेमारी में क्या मिला
लोअर एमजी मार्ग, नाम नांग रोड स्थित आरोपी के घर पर छापेमारी के दौरान परिवार के छह सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया और लैपटॉप, आईपैड तथा पेन ड्राइव जब्त किए गए। आरोपी के सैमसंग मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में चरमपंथी एप्लीकेशन, 'GIM (Group of Islamic Members)' नामक इंस्टाग्राम ग्रुप से जुड़ी सक्रिय चैट, आतंकी फंडिंग पर बातचीत और भारत तथा पाकिस्तान के लोगों से संपर्क के रिकॉर्ड मिले।
जांचकर्ताओं को चरमपंथी विचारधारा के समर्थन से जुड़े ChatGPT बातचीत के रिकॉर्ड भी प्राप्त हुए। परिवार के अन्य पाँच सदस्यों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया
गंगटोक रेंज के डीआईजी और पुलिस प्रवक्ता तेनजिंग लोडेन लेपचा ने कहा, 'सिक्किम पुलिस सभी नागरिकों को आश्वस्त करना चाहती है कि फिलहाल राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द या कानून-व्यवस्था के लिए किसी आसन्न खतरे की कोई खुफिया सूचना नहीं है। अभी तक राज्य में किसी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक कोण का कोई प्रमाण नहीं मिला है।'
लेपचा ने यह भी कहा कि जांच में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संकेत मिले हैं, जिनकी केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर गहन जांच की जा रही है। उन्होंने अभिभावकों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों से डिजिटल माध्यमों पर फैलाए जा रहे चरमपंथी कंटेंट के प्रति सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देने का आग्रह किया। गौरतलब है कि मामले का सार्वजनिक खुलासा इसलिए देर से किया गया क्योंकि विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ सूचनाओं का सत्यापन आवश्यक था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, 2008 की धारा-6 के तहत आवश्यक रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारियों को भेज दी गई है।
विधायक की चिंता और माँगें
अपर बर्तुक के विधायक काला राय ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि सिक्किम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरा राज्य है और ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पाकिस्तान के दो संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अतीत में उल्फा का एक शीर्ष नेता कई वर्षों तक राज्य में रहकर स्कूल में पढ़ाता रहा था।
राय ने प्रशासन से बाहरी लोगों के सत्यापन अभियान को तेज करने, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों का व्यापक सत्यापन कराने तथा मकान मालिकों की जवाबदेही तय करने की माँग की।
आगे की जांच
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में ऑनलाइन सेल्फ-रेडिकलाइजेशन के मामले सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक उभरती चुनौती बन रहे हैं। जांच में अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पड़ताल जारी है और केंद्रीय एजेंसियाँ राज्य पुलिस के साथ समन्वय में काम कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि यह घटना एकाकी मामला है या किसी व्यापक नेटवर्क की कड़ी।