10 अगस्त 2026
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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तमिलनाडु से पकड़ा ₹50,000 इनामी जालसाज, 12 साल से था फरार

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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तमिलनाडु से पकड़ा ₹50,000 इनामी जालसाज, 12 साल से था फरार

सारांश

12 साल की फरारी, एक पोल्ट्री फार्म और ₹50,000 का इनाम — दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी और अंतर-राज्यीय समन्वय से जाली लेटरहेड मामले के आरोपी मनोहरन कंधसामी को तमिलनाडु के तिरुचेंगोडे से दबोचा।

मुख्य बातें

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के तिरुचेंगोडे से ₹50,000 इनामी आरोपी मनोहरन कंधसामी (62 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
आरोपी 2014 से पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 'अपराधी' घोषित था और 12 साल से फरार था।
मामला एफआईआर 33/2008 धारा 465/468 आईपीसी से जुड़ा है — जाली लेटरहेड और राजनीतिक-सरकारी कार्यालयों के नकली दस्तावेज।
गिरफ्तारी से पहले एक महीने से अधिक तकनीकी निगरानी और तमिलनाडु में फील्ड इंटेलिजेंस की गई।
डीसीपी आदित्य गौतम के पर्यवेक्षण में एसीपी सतेंद्र मोहन के नेतृत्व वाली टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के तिरुचेंगोडे से ₹50,000 के इनामी घोषित अपराधी मनोहरन कंधसामी को गिरफ्तार कर लिया। 12 साल से फरार यह आरोपी जाली लेटरहेड से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल जालसाजी मामले में वांछित था और 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा 'अपराधी' घोषित किया जा चुका था।

मामले की पृष्ठभूमि

2007 में हैदराबाद निवासी विजय कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि धर्मशाला में ठहरने के दौरान उनके सोने के गहने और कीमती सामान चोरी हो गए। इस पर एफआईआर 384/2007 धारा 380 आईपीसी के तहत दर्ज की गई।

जांच में कर्नाटक के मंगलुरु निवासी मनोहरन कंधसामी को संदिग्ध पाया गया। उसके पास से चोरी का सामान तो बरामद नहीं हुआ, लेकिन कई प्रिंटेड और खाली लेटरहेड मिले जो कथित तौर पर जाने-माने राजनीतिक कार्यालयों और सरकारी अधिकारियों के नाम पर थे। जांच में सभी दस्तावेज नकली पाए गए। इसके बाद एफआईआर 33/2008 धारा 465/468 आईपीसी के तहत पीएस मंदिर मार्ग, नई दिल्ली में जालसाजी का अलग मामला दर्ज हुआ और दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।

फरारी और इनाम का ऐलान

आरोपी को एक बार गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, परंतु करीब एक महीने बाद उसे जमानत मिल गई। जमानत मिलते ही वह जानबूझकर अदालत में पेश होना बंद कर फरार हो गया। लगातार गैर-हाजिरी के कारण 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट ने उसे 'अपराधी' घोषित किया और बाद में उसकी गिरफ्तारी पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया गया।

तकनीकी निगरानी से हुई गिरफ्तारी

डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम के पर्यवेक्षण और एसीपी सेंट्रल रेंज सतेंद्र मोहन के नेतृत्व में इंस्पेक्टर महिपाल सिंह, एसआई अंकित, एसआई गौरव और अन्य की विशेष टीम गठित की गई। एचसी नवीन ने तकनीकी विश्लेषण कर आरोपी के मोबाइल नंबर का पता लगाया।

एक महीने से अधिक की तकनीकी निगरानी और तमिलनाडु में फील्ड इंटेलिजेंस के बाद टीम ने आरोपी को तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में एक गोदाम में ट्रेस किया, जहाँ वह पोल्ट्री का काम कर रहा था।

पूछताछ में खुलासा

पूछताछ में 62 वर्षीय मनोहरन ने बताया कि जमानत पर छूटने के बाद उसे दोबारा जेल जाने का डर था, इसलिए वह फरार हो गया। उसने अपने पुराने संपर्क तोड़ दिए और परिवार के साथ तमिलनाडु में बस गया, जहाँ वह पोल्ट्री फार्म चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं।

पुलिस का बयान

डीसीपी आदित्य गौतम ने कहा, 'कोई भी ठिकाना कानून की पहुंच से बाहर नहीं है। इसे हमने तकनीकी निगरानी और अंतर-राज्यीय समन्वय से साबित किया है।' यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि लंबे समय से फरार अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक असुविधाजनक सवाल भी उठाती है — जमानत मिलने के बाद आरोपी बिना किसी बाधा के 12 साल तक क्यों फरार रहा? 2014 में 'अपराधी' घोषित होने और इनाम घोषित होने के बावजूद इतने वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, न्यायिक निगरानी और पुलिस फॉलो-अप की खामियों को उजागर करता है। एक पोल्ट्री फार्म की आड़ में परिवार सहित बसे आरोपी को ट्रेस करने में एक दशक से अधिक लगना यह भी दर्शाता है कि अंतर-राज्यीय समन्वय की प्रणाली अभी भी प्रतिक्रियाशील है, सक्रिय नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोहरन कंधसामी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
मनोहरन कंधसामी को जाली लेटरहेड से जुड़े जालसाजी मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला एफआईआर 33/2008 धारा 465/468 आईपीसी के तहत पीएस मंदिर मार्ग, नई दिल्ली में दर्ज है, जिसमें राजनीतिक कार्यालयों और सरकारी अधिकारियों के नाम पर नकली दस्तावेज बनाने का आरोप है।
आरोपी कितने समय से फरार था और उसे कहाँ से पकड़ा गया?
आरोपी 2014 से, यानी लगभग 12 साल से, फरार था। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने उसे 4 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में एक गोदाम से गिरफ्तार किया, जहाँ वह पोल्ट्री का काम कर रहा था।
मनोहरन कंधसामी पर ₹50,000 का इनाम क्यों घोषित था?
आरोपी को जमानत मिलने के बाद वह जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। लगातार गैर-हाजिरी के कारण 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट ने उसे 'अपराधी' घोषित किया और बाद में उसकी गिरफ्तारी पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया गया।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने आरोपी को कैसे ट्रेस किया?
एचसी नवीन ने तकनीकी विश्लेषण कर आरोपी के मोबाइल नंबर का पता लगाया। इसके बाद एक महीने से अधिक की तकनीकी निगरानी और तमिलनाडु में फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर डीसीपी आदित्य गौतम के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने आरोपी को तिरुचेंगोडे में ट्रेस किया।
इस मामले की शुरुआत कैसे हुई थी?
2007 में हैदराबाद निवासी विजय कुमार ने शिकायत दी थी कि धर्मशाला में ठहरने के दौरान उनके सोने के गहने और कीमती सामान चोरी हो गए। जांच में मनोहरन के पास से जाली लेटरहेड मिले, जिसके बाद अलग से जालसाजी का मामला दर्ज किया गया और दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
राष्ट्र प्रेस
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