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गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह निलंबित, गांजा मामले में एफआईआर न दर्ज करना बना मुख्य आरोप

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गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह निलंबित, गांजा मामले में एफआईआर न दर्ज करना बना मुख्य आरोप

सारांश

बिहार गृह विभाग ने गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को निलंबित किया है। 16 जून को गांजा बरामदगी के बाद एफआईआर न दर्ज करना, बिना सुरक्षा जांच के बाहरी लोगों को प्रवेश देना और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार — ये आरोप इस कार्रवाई की बुनियाद बने।

मुख्य बातें

बिहार गृह विभाग ने 26 जून 2025 को गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को निलंबित किया।
16 जून को बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास गांजा मिलने के बाद जेल अधीक्षक के निर्देश के बावजूद कथित तौर पर एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
आरोप है कि बिना सुरक्षा जांच के बाहरी लोगों को जेल में प्रवेश दिया गया और विजिटर रजिस्टर में नाम दर्ज नहीं किए गए।
जेल कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार और कैदियों के साथ मारपीट की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
निलंबन अवधि में मुख्यालय मुजफ्फरपुर स्थित खुदीराम बोस सेंट्रल जेल निर्धारित; जांच में दोष सिद्ध होने पर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव।

बिहार गृह विभाग ने 26 जून 2025 को गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उन पर लापरवाही, जेल नियमों के उल्लंघन और कैदियों से कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं। गृह विभाग के कारा प्रभाग ने विभागीय जांच के आदेश देते हुए उनका मुख्यालय मुजफ्फरपुर स्थित खुदीराम बोस सेंट्रल जेल निर्धारित किया है।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

16 जून को गया सेंट्रल जेल के एक वार्ड में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से कथित तौर पर गांजा बरामद हुआ। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, जेल अधीक्षक ने सुदर्शन प्रसाद सिंह को आरोपी बंदी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का स्पष्ट निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर यह कदम नहीं उठाया। गृह विभाग ने इसे कर्तव्य में गंभीर चूक माना है।

मुख्य आरोप

गृह विभाग के आदेश में सुदर्शन प्रसाद सिंह पर कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख है। आरोप है कि उन्होंने बिना अनिवार्य सुरक्षा जांच के कैदियों के परिजनों और बाहरी लोगों को अपने कार्यालय में प्रवेश दिया और उनके नाम जेल के विजिटर रजिस्टर में दर्ज नहीं किए। इसके अतिरिक्त, जेल सुरक्षा नियम लागू करने की कोशिश करने वाले सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा और आक्रामक व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिना उचित कारण के कैदियों के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया गया। विभाग का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कई बार मौखिक चेतावनियाँ दीं, किंतु कथित अनियमितताएँ जारी रहीं।

जेल कर्मचारियों की शिकायतें

जेल कर्मचारियों ने भी सुदर्शन प्रसाद सिंह के विरुद्ध औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करवाने की कोशिश पर उन्हें अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा। यह ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार की जेलों में अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

गृह विभाग ने सभी आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने तक सुदर्शन प्रसाद सिंह निलंबन पर रहेंगे। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो सेवा से बर्खास्तगी सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले की निगरानी अब सीधे गृह विभाग के स्तर पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रणालीगत ढिलाई के संकेत हैं। असली सवाल यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों की बार-बार मौखिक चेतावनियों के बावजूद लिखित कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई — और क्या विभागीय जांच इस बार सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगी या जवाबदेही की पूरी श्रृंखला की जाँच होगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुदर्शन प्रसाद सिंह को क्यों निलंबित किया गया?
बिहार गृह विभाग ने उन पर लापरवाही, जेल नियमों के उल्लंघन और कैदियों से कथित मिलीभगत के आरोपों के चलते निलंबन की कार्रवाई की। मुख्य आरोप यह है कि 16 जून को गांजा बरामद होने के बाद जेल अधीक्षक के निर्देश के बावजूद उन्होंने एफआईआर दर्ज नहीं कराई।
गया जेल में गांजा मामला क्या है?
16 जून को गया सेंट्रल जेल के एक वार्ड में तलाशी के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से कथित तौर पर गांजा बरामद हुआ। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, डिप्टी सुपरिटेंडेंट को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था, जिसका पालन नहीं हुआ।
निलंबन के दौरान सुदर्शन प्रसाद सिंह का मुख्यालय कहाँ होगा?
गृह विभाग के आदेश के अनुसार, विभागीय जांच पूरी होने तक उनका मुख्यालय मुजफ्फरपुर स्थित खुदीराम बोस सेंट्रल जेल निर्धारित किया गया है।
जांच में दोष सिद्ध होने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
यदि विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सुदर्शन प्रसाद सिंह के विरुद्ध सेवा से बर्खास्तगी सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। अभी मामले की जांच जारी है।
क्या जेल कर्मचारियों ने भी शिकायत दर्ज कराई है?
हाँ, जेल कर्मचारियों ने उनके विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि सुरक्षा नियम लागू करने की कोशिश पर वे सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे और बिना उचित कारण के कैदियों के साथ मारपीट करते थे।
राष्ट्र प्रेस
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