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गाजियाबाद में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

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गाजियाबाद में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

सारांश

गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग ने एक चलती कार में पोर्टेबल मशीन से चल रही अवैध भ्रूण लिंग जांच का पर्दाफाश किया। चार संदिग्ध हिरासत में हैं और मुख्य आरोपी पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। यह खुलासा पीसीपीएनडीटी निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

5 जुलाई 2026 की देर रात गाजियाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़ हुआ।
कार ( UP 14 FL 9355 ) में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भस्थ शिशु का लिंग बताए जाने का आरोप है।
संदीप, सलमान, शाहिद और तस्लीम — चार संदिग्धों को मौके से हिरासत में लिया गया।
मुख्य आरोपी संदीप के विरुद्ध पूर्व में भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटे हैं।
पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत भ्रूण लिंग जांच पर भारत में पूर्ण प्रतिबंध है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में 5 जुलाई 2026 की देर रात स्वास्थ्य विभाग ने एक चलती कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के ज़रिए अवैध भ्रूण लिंग जांच करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। कोतवाली थाना क्षेत्र में रोकी गई कार (UP 14 FL 9355) से चार संदिग्धों — संदीप, सलमान, शाहिद और तस्लीम — को हिरासत में लिया गया है। इस खुलासे ने पीसीपीएनडीटी निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मुखबिर की सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार देर रात कार्रवाई की। आरोप है कि कार के भीतर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के माध्यम से गर्भस्थ शिशु का लिंग बताया जा रहा था — जो गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। वाहन को कोतवाली क्षेत्र में रोककर मौके पर ही चारों को हिरासत में ले लिया गया।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल

यह खुलासा इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह गिरोह खुलेआम शहर की सड़कों पर सक्रिय था। सवाल उठ रहे हैं कि पीसीपीएनडीटी सेल और स्वास्थ्य विभाग की नियमित जांच व्यवस्था इतने समय तक इस नेटवर्क को क्यों नहीं पकड़ सकी। आलोचकों का कहना है कि मुखबिर की सूचना पर निर्भर रहना प्रणालीगत निगरानी की विफलता को दर्शाता है।

मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास

सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए मुख्य आरोपी संदीप के विरुद्ध पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद वह कथित तौर पर इस अवैध कारोबार को संचालित करता रहा, जो विभागीय समन्वय में खामियों की ओर इशारा करता है।

जांच की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से चारों आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह से और कौन-कौन जुड़े हैं और यह अवैध धंधा कितने समय से चल रहा था।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि भ्रूण लिंग जांच भारत में पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के तहत पूर्णतः प्रतिबंधित है और दोषी पाए जाने पर तीन से पाँच वर्ष की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में लिंगानुपात सुधार के लिए सरकार की ओर से विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पोर्टेबल उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला पर अंकुश नहीं लगाया जाता, ऐसे गिरोह सक्रिय रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तीन दशक पुराने पीसीपीएनडीटी कानून की व्यावहारिक विफलता का प्रमाण है। जब मुख्य आरोपी पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं और फिर भी वह सड़क पर यह धंधा चला रहा था, तो सवाल सिर्फ गिरोह का नहीं — विभागीय समन्वय और डेटाबेस साझेदारी का भी है। पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड उपकरणों की अनियंत्रित बिक्री और किराये पर उपलब्धता इस अवैध उद्योग की असली रीढ़ है, जिस पर नीतिगत ध्यान अब तक अपर्याप्त रहा है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजियाबाद में चलती कार में भ्रूण लिंग जांच का मामला क्या है?
5 जुलाई 2026 की देर रात गाजियाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने एक चलती कार को रोककर उसमें पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अवैध भ्रूण लिंग जांच करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। चार संदिग्धों को मौके से हिरासत में लिया गया।
इस मामले में किन्हें गिरफ्तार किया गया है?
संदीप, सलमान, शाहिद और तस्लीम — इन चार संदिग्धों को कार से हिरासत में लिया गया है। सूत्रों के अनुसार मुख्य आरोपी संदीप के विरुद्ध पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
भ्रूण लिंग जांच पर भारत में क्या कानून है?
भारत में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम, 1994 के तहत भ्रूण लिंग जांच पूर्णतः प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर तीन से पाँच वर्ष की सज़ा और आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
आलोचकों का कहना है कि यदि शहर में खुलेआम चलती कार में यह अवैध नेटवर्क सक्रिय था, तो पीसीपीएनडीटी सेल की नियमित जांच व्यवस्था इसे पहले क्यों नहीं पकड़ सकी। कार्रवाई मुखबिर की सूचना पर हुई, न कि विभाग की स्वतः निगरानी से।
आगे जांच में क्या पता लगाने की कोशिश हो रही है?
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस गिरोह से और कौन-कौन जुड़े हैं, पोर्टेबल मशीन कहाँ से आई और यह अवैध धंधा कितने समय से चल रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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