गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला: 'देश में सिविल वॉर कराना चाहते थे, चेहरा बेनकाब हुआ'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 3 नवंबर 2026 को पटना में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश में सिविल वॉर कराना चाहते थे और उनका मकसद था कि पुलिस गोली चलाए तथा सरकार गिर जाए। उन्होंने दावा किया कि यह साजिश अब बेनकाब हो चुकी है और इसमें बाहरी ताकतें, कट्टरपंथी तत्व तथा कई संगठन शामिल थे।
मुख्य आरोप और बयान
गिरिराज सिंह ने कहा, 'एक कॉकरोच था और उसका भी चेहरा बेनकाब हो गया। ये लोग देश के अंदर अराजकता का माहौल बनाना चाहते थे।' उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयानों — जैसे 'मोदी तीन महीने में हट जाएगा' — से यह जाहिर होता था कि उनके मन में किसी बड़े आंदोलन या सत्ता-परिवर्तन की उम्मीद थी।
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई से एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें कथित तौर पर गैर-मुसलमानों की दुकानों को लूटने और आग लगाने की बात थी। उनके अनुसार इस पूरे घटनाक्रम में कट्टरपंथी तत्व भी सक्रिय थे।
साजिश में बाहरी ताकतों का आरोप
गिरिराज सिंह ने दावा किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई पहली घटना में शाहीन बाग के लोग भी शामिल थे और कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कुछ मुस्लिम युवकों की भी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि देश में फ्रांस, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसी अस्थिर स्थिति पैदा करने की साजिश थी, जिसका खुलासा कथित तौर पर एक प्रतिष्ठित अमेरिकी न्यूज संस्थान ने भी किया।
नागरिकता और कानूनी मामलों पर हमला
केंद्रीय मंत्री ने सोनिया गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 12 वर्षों तक भारत की नागरिकता नहीं ली। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता का मामला लंबित है। गिरिराज सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'जो खुद बेल पर हों, वे दूसरे को जेल क्या भेजेंगे? खुद बेल पर हैं, पूरा परिवार बेल पर है।'
मतदाता सूची विवाद पर बयान
गिरिराज सिंह ने मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पूरे देश में लगभग 13 करोड़ संदिग्ध नामों की बात हुई, जिनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए भी शामिल थे। उनका आरोप था कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ऐसे लोगों को संरक्षण देते थे और उनके वोट लेते थे।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राष्ट्रपति को ज्ञापन देने की बात की, लेकिन लगभग पौने छह सौ घंटे बीत जाने के बाद भी कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया। उन्होंने चेताया कि झूठी बयानबाजी के लिए भी कानून में प्रावधान हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
गिरिराज सिंह के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची संशोधन और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि इस तरह के राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आगामी चुनावी मौसम की गर्मी को और तीखा कर सकते हैं।