जीएनएफसी के 50 साल: गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल ने 2047 तक ₹70,000 करोड़ के विस्तार का विजन रखा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार, 16 जून को भरूच जिले के नर्मदा नगर में आयोजित गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (जीएनएफसी) के स्वर्ण जयंती समारोह में कंपनी को 2047 तक अपना प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो मौजूदा ₹7,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹70,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य दिया। उनके अनुसार, यह विस्तार जीएनएफसी को 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर राष्ट्र' के राष्ट्रीय संकल्प में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाली कंपनी के रूप में स्थापित करेगा।
पाँच दशकों का सफर और राष्ट्रीय योगदान
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि जीएनएफसी के पाँच दशकों का सफर गुजरात के औद्योगिक और कृषि विकास की कहानी का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने इस यात्रा को 'आत्मनिर्भर भारत' के व्यापक लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि कंपनी की स्थापना मूलतः उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरकों की आपूर्ति के ज़रिए कृषि उत्पादकता को सहारा देने, रासायनिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हुई थी।
पटेल ने जीएनएफसी की गोल्डन जुबली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन के 12 साल पूरे होने से जोड़ा और कहा कि इस अवधि में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को अधिक कुशल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने में केंद्र सरकार की पेशेवर नीति की अहम भूमिका रही है।
विकसित भारत 2047 के अनुरूप रोडमैप
मुख्यमंत्री ने जीएनएफसी से आग्रह किया कि वह 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप अपना दीर्घकालिक रोडमैप लागू करे और आने वाले दशकों में निवेश योजनाओं को उल्लेखनीय रूप से विस्तारित करे। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने भी 'विकसित गुजरात 2047' रोडमैप के तहत राज्य के छह क्षेत्रों में संतुलित और समग्र विकास की दीर्घकालिक रणनीति तैयार की है।
गुजरात की नई औद्योगिक नीति का उल्लेख करते हुए जीएनएफसी के चेयरमैन और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा घोषित 25 से 30 प्रतिशत तक के प्रोत्साहन से कंपनी की परियोजनाओं की व्यवहार्यता बेहतर होगी और दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को गति मिलेगी।
नीम प्रोजेक्ट और महिला सशक्तिकरण
पटेल ने जीएनएफसी के 'नीम प्रोजेक्ट' की विशेष सराहना की, जिसके अंतर्गत नीम के बीज के तेल का उपयोग यूरिया की कोटिंग और जैविक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल से ग्रामीण महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों को नीम के बीज संग्रह कार्य में शामिल किया गया, जिससे 4.50 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री ने भरूच जिले के 50 गाँवों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू की गई '50 विकसित गाँव: विजन 2047' पहल के लिए भी कंपनी को बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने नर्मदा नगर टाउनशिप में नमो वडवन मियावाकी फॉरेस्ट और ऑक्सीजन पार्क का उद्घाटन किया, एक कम्युनिटी साइंस सेंटर का शुभारंभ किया और जीएनएफसी के पाँच दशकों के इतिहास को समेटने वाली एक कॉफी-टेबल बुक भी जारी की।
शेयरधारकों और कर्मचारियों को श्रेय
जीएनएफसी के चेयरमैन मनोज कुमार दास ने 1991 में 'गुजरात दर्शन' दौरे के दौरान कंपनी की अपनी पहली यात्रा को याद करते हुए कहा, 'जीएनएफसी अपनी शुरुआती सोच से कहीं आगे निकल गई है और एक बहुत बड़ी कंपनी बन गई है।' उन्होंने कंपनी की सफलता का श्रेय लगभग 2.73 लाख शेयरधारकों, कर्मचारियों, अधिकारियों, आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों को दिया जिन्होंने पाँच दशकों में इसके विकास में योगदान दिया।
दास ने यह भी बताया कि जीएनएफसी ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पोषण के क्षेत्र में सीएसआर पहलों पर लगभग ₹200 करोड़ खर्च किए हैं। कंपनी भरूच जिले में लगभग 50 गाँवों को गोद लेकर उन्हें मॉडल गाँवों के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है।
आगे की राह
दास ने स्पष्ट किया कि जीएनएफसी 'मजबूत करना, विस्तार करना और विविधता लाना' की त्रिस्तरीय रणनीति के साथ उभरते वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाएगी। राज्य सरकार की सभी कंपनियों ने 'विजन 2047' दस्तावेज़ को अपनाया है, और जीएनएफसी का यह विस्तार लक्ष्य उसी दिशा में एक महत्त्वाकांक्षी कदम है।