उत्तराखंड में गोलू देवता का अनोखा मंदिर: जहाँ भक्त न्याय पाने के लिए याचिका लगाते हैं
सारांश
मुख्य बातें
अल्मोड़ा, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ भव्य मंदिरों और उनसे जुड़ी अद्भुत कथाएँ देखने को मिलती हैं। ये मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थरों से नहीं बने हैं, बल्कि यहाँ भक्तों की आस्था और विश्वासन्याय की गुहार लगाते हैं, को न्याय के देवता का मंदिर माना जाता है।
यह मंदिर भैरवनाथ या गौर भैरव के रूप में भगवान शिव का अवतार माना जाता है। यहाँ भक्त अपनी समस्याओं की लिखित याचिकाएँ डालते हैं और मान्यता है कि गोलू देवता तुरंत न्याय प्रदान करते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मंदिर की पहचान वहाँ लटकी हजारों तांबे की घंटियों से होती है। जब किसी भक्त की इच्छा पूरी होती है, तो वह मंदिर में घंटी चढ़ाता है। यही कारण है कि आज वहाँ हजारों घंटियाँ झूलती हुई दिखाई देती हैं। कई भक्त अदालती मामलों की याचिकाएँ और लिखित अर्जियाँ भी यहाँ डालते हैं।
किसान राम सिंह के बारे में एक कहानी है, जो अल्मोड़ा के पास रहते थे। उनके भाई के साथ जमीन के बंटवारे को लेकर सालों से विवाद था। अदालत में साल गुजर गए लेकिन न्याय नहीं मिला। किसी ने उन्हें चिताई गोलू देवता मंदिर के बारे में बताया। राम सिंह ने विश्वास के साथ वहाँ जाकर अपनी समस्या की याचिका डाली और भगवान से न्याय की गुहार लगाई।
आश्चर्यजनक रूप से कुछ महीनों बाद उनके भाई ने खुद बुलाकर समझौता कर लिया और जमीन का सही बंटवारा हो गया। राम सिंह मानते हैं कि गोलू देवता ने ही उन्हें तुरंत न्याय दिलाया। इच्छा पूरी होने पर उन्होंने मंदिर में एक बड़ी घंटी चढ़ाई। यह परंपरा आज भी जारी है।
किंवदंतियों के अनुसार, गोलू देवता को गौर भैरव के रूप में भगवान शिव का अवतार माना जाता है। कुमाऊं क्षेत्र में इन्हें न्याय का देवता कहा जाता है। लोक कथा के अनुसार, श्री कल्याण सिंह बिष्ट का जन्म कत्युडा गाँव में हुआ था। वे बेहद छोटी उम्र में ही शक्तिशाली हो गए और क्षेत्र के शैतानों को परास्त कर सभी की रक्षा करने लगे। एक षड्यंत्र में उनके रिश्तेदार ने उनकी हत्या कर दी। उनका शरीर डाना गोलू गैराड़ में गिरा और सिर कपड़खान में। यहाँ गोलू देवता सफेद कपड़ों और पगड़ी में विराजमान हैं।
कुमाऊं के कई गाँवों में गोलू देवता को कुल देवता या इष्ट देवता के रूप में पूजा जाता है। चिताई के अलावा गैराड़, चंपावत और घोड़ाखाल में भी उनके प्रसिद्ध मंदिर हैं।
चिताई गोलू देवता मंदिर अल्मोड़ा शहर से केवल ८-१० किलोमीटर दूर जागेश्वर धाम रोड पर स्थित है। अल्मोड़ा से टैक्सी, बस या निजी वाहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है। गैराड़ गोलू मंदिर बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य के मुख्य द्वार से करीब २ किलोमीटर और अल्मोड़ा से लगभग १५ किलोमीटर दूर है। पूरे क्षेत्र का सड़क नेटवर्क अच्छा है। दिल्ली या अन्य शहरों से टैक्सी लेकर सीधे पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो अल्मोड़ा से करीब ११० किलोमीटर दूर है। काठगोदाम से दिल्ली, लखनऊ और देहरादून के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं। स्टेशन से अल्मोड़ा तक टैक्सी या बस ले सकते हैं। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जो अल्मोड़ा से लगभग १२७ किलोमीटर और गैराड़ से करीब १४७ किलोमीटर दूर है। पंतनगर से अल्मोड़ा पहुँचकर आगे टैक्सी से मंदिर तक जा सकते हैं।