23 जुलाई 2026
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चंपावत का श्री गोलू देवता मंदिर: न्याय के देवता के दरबार में लाखों श्रद्धालुओं की अर्जी

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चंपावत का श्री गोलू देवता मंदिर: न्याय के देवता के दरबार में लाखों श्रद्धालुओं की अर्जी

सारांश

चंपावत का श्री गोलू देवता मंदिर — जहाँ अदालत से पहले भगवान के दरबार में कागज पर लिखी अर्जी पेश होती है। लाखों घंटियाँ, लाखों पूरी हुई मनोकामनाएँ। CM धामी ने एक्स पर वीडियो साझा कर इस अनूठी आस्था को देशभर के सामने रखा।

मुख्य बातें

श्री गोलू देवता मंदिर , चंपावत, उत्तराखंड में स्थित है और इसे 'न्याय के देवता' का दरबार माना जाता है।
भक्त यहाँ कागज पर लिखी अर्जी चढ़ाते हैं — यह परंपरा इस मंदिर को देश में अनूठा बनाती है।
मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु पीतल की घंटियाँ अर्पित करते हैं; मंदिर में लाखों घंटियाँ लटकी हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर दर्शन का आग्रह किया।
लोक मान्यता के अनुसार, गोलू देवता गौर भैरव (भगवान शिव) के रूप हैं और श्री कल्याण सिंह बिष्ट (कालबिष्ट) के रूप में अवतरित हुए थे।

उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित श्री गोलू देवता मंदिर देवभूमि का एक अनूठा आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु न्याय की आस लेकर पहुँचते हैं। गोलू देवता को कुमाऊँ अंचल में 'न्याय के परम देवता' और 'कलयुग के अवतारी राजा' के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर उस अटूट आस्था का प्रतीक है जहाँ भक्त अपनी पीड़ा की गुहार कागज पर लिखकर सीधे भगवान के दरबार में पेश करते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने की मंदिर की प्रशंसा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार, 23 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'चंपावत जिले में स्थित श्री गोलू देवता मंदिर आस्था और श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ अपनी मनोकामनाएँ और प्रार्थनाएँ लेकर आते हैं। श्री गोलू देवता को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है और भक्त उनके दरबार में अपनी समस्याओं के समाधान और न्याय की उम्मीद लेकर पहुँचते हैं। यदि आप चंपावत जाएँ, तो श्री गोलू देवता मंदिर के दर्शन करना न भूलें।'

अर्जी की अनूठी परंपरा

यह संभवतः देश का इकलौता मंदिर है जहाँ भक्त अपनी फ़रियाद कागज पर लिखकर भगवान को अर्पित करते हैं — अदालत की चौखट से पहले इस दरबार में न्याय माँगा जाता है। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त पीतल की घंटियाँ चढ़ाते हैं, यही कारण है कि मंदिर परिसर में लाखों की संख्या में घंटियाँ लटकी दिखाई देती हैं — हर घंटी एक पूरी हुई प्रार्थना की गवाह है।

गोलू देवता की लोक-कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

लोक मान्यताओं के अनुसार, गोलू देवता को गौर भैरव अर्थात भगवान शिव के एक रूप के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि श्री कल्याण सिंह बिष्ट (कालबिष्ट) का जन्म कत्युडा गाँव में हुआ था। बचपन से ही असाधारण शक्ति के स्वामी इस बालक ने क्षेत्र के दुष्ट तत्वों को परास्त कर गरीबों और दबे-कुचले लोगों की रक्षा की। लोक-कथाओं के अनुसार, एक षड्यंत्र में उनके निकट रिश्तेदार ने कुल्हाड़ी से उनका सिर काट दिया। मान्यता है कि उनका शरीर डाना गोलू गैराड़ (बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य के समीप) में गिरा और सिर कपड़खान में।

मंदिर में गोलू देवता सफ़ेद वस्त्र, सफ़ेद पगड़ी और सफ़ेद शॉल धारण किए विराजमान हैं। उनके भाई कलवा भैरव के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर परिसर के समीप गर्भ देवी शक्ति का मंदिर भी स्थित है, जो इस स्थल की आध्यात्मिक विविधता को और समृद्ध बनाता है।

आम जनता पर असर और पर्यटन महत्व

चंपावत का यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्तराखंड के सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री धामी की अपील के बाद इस मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हुई है, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।

आगे क्या

उत्तराखंड सरकार की ओर से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल के तहत चंपावत जिले के इस ऐतिहासिक मंदिर को और अधिक सुविधाजनक बनाने के प्रयास जारी हैं। गोलू देवता का यह दरबार आने वाले समय में भी कुमाऊँ अंचल की आस्था और न्याय की अटूट परंपरा का प्रतीक बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि न्यायिक पहुँच की कमी का प्रतिबिंब भी है। CM धामी का यह एक्स पोस्ट उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा लगता है, जो चारधाम यात्रा के बाद अब छोटे तीर्थ स्थलों को राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने का प्रयास है। हालाँकि, इस प्रचार के साथ-साथ मंदिर तक बुनियादी ढाँचे और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री गोलू देवता मंदिर कहाँ स्थित है?
श्री गोलू देवता मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है। यह कुमाऊँ अंचल का प्रमुख धार्मिक स्थल है और बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य के समीप डाना गोलू गैराड़ से भी जुड़ा है।
गोलू देवता को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है?
लोक मान्यताओं के अनुसार, गोलू देवता ने अपने जीवनकाल में गरीबों और दबे-कुचले लोगों की रक्षा की और अन्याय के विरुद्ध लड़े। इसी कारण उन्हें 'न्याय के देवता' के रूप में पूजा जाता है और भक्त उनके दरबार में कागज पर लिखी अर्जी चढ़ाकर न्याय की गुहार लगाते हैं।
गोलू देवता मंदिर में घंटियाँ चढ़ाने की परंपरा क्या है?
मान्यता है कि जब भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे मंदिर में पीतल की घंटी चढ़ाते हैं। इसी परंपरा के कारण मंदिर परिसर में लाखों की संख्या में घंटियाँ लटकी हुई दिखाई देती हैं।
गोलू देवता कौन थे और उनकी पौराणिक कथा क्या है?
लोक कथाओं के अनुसार, गोलू देवता का जन्म श्री कल्याण सिंह बिष्ट (कालबिष्ट) के रूप में कत्युडा गाँव में हुआ था। वे बचपन से शक्तिशाली थे और क्षेत्र के दुष्टों को परास्त कर जनरक्षक बने। एक षड्यंत्र में उनके निकट रिश्तेदार ने उनकी हत्या कर दी, जिसके बाद वे देवता के रूप में पूजे जाने लगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गोलू देवता मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसे 'आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र' बताया। उन्होंने लोगों से चंपावत जाने पर इस मंदिर के दर्शन करने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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