24 अक्टूबर 2026
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ग्रैप-1 लागू होने के बाद भी नोएडा में धूल का कहर, यूपीपीसीबी की निगरानी पर उठे सवाल

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ग्रैप-1 लागू होने के बाद भी नोएडा में धूल का कहर, यूपीपीसीबी की निगरानी पर उठे सवाल

सारांश

ग्रैप-1 लागू होने के बाद भी नोएडा की सड़कों पर धूल का सिलसिला जारी है। यूपीपीसीबी की निगरानी टीमें मैदान में हैं, लेकिन निर्माण स्थलों पर लापरवाही और बेरोकटोक आवाजाही से प्रदूषण नियंत्रण के दावे खोखले नज़र आ रहे हैं। जवाबदेही और ठोस कार्रवाई के बिना ग्रैप महज कागज़ी कवायद बनकर रह सकता है।

मुख्य बातें

ग्रैप-1 लागू होने के बावजूद नोएडा की सड़कों पर 24 अक्टूबर 2026 को धूल उड़ती दिखी।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने निगरानी टीमें तैनात करने का दावा किया, लेकिन ज़मीनी असर सीमित।
नोएडा प्राधिकरण के निर्माण कार्य और सामग्री से लदे वाहन धूल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत बताए जा रहे हैं।
नियमित पानी छिड़काव, सामग्री ढकने और मलबे के उचित निस्तारण जैसे उपायों की प्रभावी पालना ज़रूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल निरीक्षण नहीं, उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई और विभागों के बीच बेहतर समन्वय ज़रूरी है।

नोएडा की सड़कों पर 24 अक्टूबर 2026 को भी धूल का सिलसिला जारी रहा, जबकि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू किया जा चुका है। शहर के विभिन्न इलाकों में उड़ती धूल और बेरोकटोक जारी निर्माण कार्यों के चलते वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

ज़मीनी हालत और प्रशासनिक दावों के बीच खाई

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) का दावा है कि प्रदूषण स्तर पर नज़र रखने के लिए कई टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं और हॉटस्पॉट चिह्नित कर वहाँ रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। हालाँकि, ज़मीनी स्तर पर तस्वीर अलग नज़र आती है — शहर के कई हिस्सों में वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल के गुबार उठते स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गौरतलब है कि ग्रैप का पहला चरण लागू होते ही संबंधित विभागों को प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर तत्काल नियंत्रण के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद नोएडा में धूल नियंत्रण के ठोस उपाय अभी तक प्रभावी रूप से लागू होते नहीं दिख रहे।

निर्माण कार्य बने प्रमुख कारण

नोएडा प्राधिकरण की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर विकास और निर्माण कार्य लगातार जारी हैं। निर्माण स्थलों पर मिट्टी, मलबे और अन्य निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन में लापरवाही बरतने पर धूल के कण हवा में घुलते रहते हैं।

इसके अलावा, निर्माण सामग्री से लदे वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और सड़कों पर जमा मिट्टी भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाले अहम कारकों में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, मलबे का समुचित निस्तारण और निर्माण स्थलों के आसपास नियमित सफाई — ये उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए जाएँ तो धूल प्रदूषण काफी हद तक नियंत्रित हो सकता है।

जवाबदेही और समन्वय की ज़रूरत

आलोचकों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल निरीक्षण पर्याप्त नहीं है — नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई भी उतनी ही ज़रूरी है। निर्माण स्थलों पर मानकों की अनदेखी, सड़कों पर मिट्टी का जमाव और धूल नियंत्रण उपायों की अनुपस्थिति जैसी स्थितियों में संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी के मौसम से पहले वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेता है। पिछले कई वर्षों का अनुभव यह दर्शाता है कि ग्रैप के नियम कागज़ों पर तो होते हैं, लेकिन ज़मीन पर उनकी पालना अक्सर अधूरी रहती है।

आम जनता पर असर

सड़कों पर उड़ती धूल का सबसे अधिक खामियाजा आसपास के रिहायशी इलाकों के निवासियों, पैदल चलने वाले राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को उठाना पड़ता है। श्वास संबंधी बीमारियों, आँखों में जलन और एलर्जी की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से साँस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक है। ऐसे में यूपीपीसीबी, नोएडा प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर धूल-प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई की दरकार है।

क्या होगा आगे

यदि ग्रैप-1 के तहत निर्धारित उपायों को कड़ाई से लागू नहीं किया गया, तो वायु गुणवत्ता के और बिगड़ने पर ग्रैप-2 या उससे ऊँचे चरण लागू किए जा सकते हैं, जिसमें और अधिक सख्त प्रतिबंध शामिल होते हैं। विभागों को चिह्नित हॉटस्पॉट पर नियमित सफाई, पानी का छिड़काव और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी, तभी प्रदूषण नियंत्रण के दावे ज़मीन पर सच साबित हो पाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

निर्माण, और खोखले दावे। यूपीपीसीबी की निगरानी टीमें कागज़ों पर सक्रिय हैं, लेकिन जब तक उल्लंघन पर दंड की व्यवस्था पारदर्शी और त्वरित नहीं होगी, ग्रैप एक मौसमी रस्म से आगे नहीं बढ़ेगा। असली समस्या नियमों की कमी नहीं, बल्कि उनकी पालना सुनिश्चित कराने की इच्छाशक्ति और विभागीय जवाबदेही की है। जब तक नोएडा प्राधिकरण, यूपीपीसीबी और स्थानीय प्रशासन के बीच वास्तविक समन्वय नहीं बनेगा, तब तक एनसीआर के निवासी हर अक्टूबर में उसी ज़हरीली हवा में साँस लेते रहेंगे।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रैप-1 क्या है और यह नोएडा में कब लागू हुआ?
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू की जाने वाली चरणबद्ध व्यवस्था है। इसका पहला चरण (ग्रैप-1) अक्टूबर 2026 में लागू किया गया है, जिसके तहत निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, वाहन प्रदूषण जाँच और कूड़ा जलाने पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं।
नोएडा में ग्रैप-1 लागू होने के बाद भी धूल क्यों उड़ रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, निर्माण स्थलों पर मिट्टी और मलबे के उचित प्रबंधन में लापरवाही, निर्माण सामग्री से लदे वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही और पानी के छिड़काव जैसे ज़रूरी उपायों की प्रभावी पालना न होना इसके प्रमुख कारण हैं। यूपीपीसीबी की निगरानी टीमें तैनात हैं, लेकिन उल्लंघन पर कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है।
यूपीपीसीबी प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठा रहा है?
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) का दावा है कि प्रदूषण स्तर पर नज़र रखने के लिए कई टीमें मैदान में हैं और हॉटस्पॉट चिह्नित कर वहाँ रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। हालाँकि, ज़मीनी हालात यह बताते हैं कि निगरानी और कार्रवाई के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।
धूल प्रदूषण से नोएडा के निवासियों को क्या नुकसान हो सकता है?
सड़कों पर उड़ती धूल से श्वास संबंधी बीमारियाँ, आँखों में जलन और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से दमा या अन्य साँस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए क्या-क्या ज़रूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, मलबे का उचित निस्तारण, और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर त्वरित कार्रवाई ज़रूरी है। इसके साथ ही यूपीपीसीबी, नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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