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जैसलमेर डेजर्ट नेशनल पार्क में दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड रिहा, भूपेंद्र यादव ने बताया ऐतिहासिक कदम

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जैसलमेर डेजर्ट नेशनल पार्क में दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड रिहा, भूपेंद्र यादव ने बताया ऐतिहासिक कदम

सारांश

लगभग एक दशक की कैप्टिव-ब्रीडिंग के बाद, दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जैसलमेर के रेगिस्तान में छोड़ा गया — यह भारत की सबसे खतरे में पड़ी पक्षी प्रजाति के संरक्षण में एक ऐतिहासिक मोड़ है, जो आने वाले पुनर्स्थापना प्रयासों के लिए मॉडल बन सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैसलमेर के सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को रिहा किया।
ये पक्षी कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार किए गए थे और लगभग एक दशक की वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम हैं।
रिहाई से एक दिन पहले मंत्री ने रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर का दौरा कर शोधकर्ताओं की सराहना की।
पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि इससे पुनर्स्थापना प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी।
GIB अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' श्रेणी में आता है और भारत की सबसे खतरे में पड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार किए गए दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। यह रिहाई लगभग एक दशक की वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम बताई जा रही है और इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।

क्या हुआ और कब

मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'एक अहम कदम उठाते हुए, आज सुबह जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम इलाके में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स को छोड़ा गया।' उन्होंने इसे वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ की वर्षों की अथक मेहनत का फल बताया। रिहाई से एक दिन पहले, शनिवार को यादव ने रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर का दौरा कर युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की सराहना की।

संरक्षण कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए पक्षियों को जंगल में छोड़ना 'प्रजाति को बचाने के कार्यक्रम का अगला अहम कदम है।' इससे प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' श्रेणी में रखा गया है, और यह भारत की सबसे खतरे में पड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है।

प्रधानमंत्री को धन्यवाद

मंत्री यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उनके निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मैं पीएम मोदी का लगातार मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं, जिससे हमारी वैज्ञानिक कम्युनिटी जीआईबी समेत सभी प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम कर पा रही है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी जैव विविधता संरक्षण नीतियों को वैश्विक मंचों पर प्रदर्शित करने में सक्रिय रहा है।

वैज्ञानिक महत्व

गौरतलब है कि यह संरक्षण कार्यक्रम सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है। कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार पक्षियों को जंगल में पुनर्स्थापित करने की यह विधि न केवल GIB की आबादी बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में इसी तरह की अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए मॉडल भी बन सकती है।

आगे की राह

मंत्रालय के अनुसार, इस रिहाई के बाद प्राप्त वैज्ञानिक डेटा का उपयोग पक्षियों को प्राकृतिक आवास में वापस लाने के प्रोटोकॉल को और परिष्कृत करने में किया जाएगा। दीर्घकालिक लक्ष्य कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार और अधिक पक्षियों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में वापस भेजना है, ताकि जैसलमेर के रेगिस्तान में GIB की स्थायी आबादी फिर से स्थापित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन GIB की जंगली आबादी जिस गहरे संकट में है, उसके मुकाबले यह पहला सावधान कदम भर है। असली चुनौती यह है कि कैप्टिव-ब्रेड पक्षी जंगल में जीवित रह पाते हैं या नहीं — बिजली की तारें, शिकार और आवास का सिकुड़ना अभी भी सबसे बड़े खतरे हैं जिन पर नीतिगत ध्यान अपेक्षित है। एक दशक की मेहनत के बाद भी यदि पुनर्स्थापना प्रोटोकॉल अभी 'विकसित' हो रहे हैं, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या संरक्षण कार्यक्रम की गति प्रजाति की गिरावट की गति से मेल खा पा रही है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड क्या है और यह इतना दुर्लभ क्यों है?
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) भारत की सबसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों में से एक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'Critically Endangered' श्रेणी में रखा गया है। आवास का नष्ट होना, बिजली की तारों से टकराव और शिकार इसकी आबादी में भारी गिरावट के मुख्य कारण हैं।
जैसलमेर में GIB को क्यों छोड़ा गया?
राजस्थान का थार रेगिस्तान ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का प्राकृतिक आवास है। सैम डेजर्ट नेशनल पार्क को इस प्रजाति की पुनर्स्थापना के लिए उपयुक्त पाया गया, और यहाँ कैप्टिव-ब्रेड पक्षियों को छोड़कर जंगली आबादी को फिर से बसाने की कोशिश की जा रही है।
इस संरक्षण कार्यक्रम में कौन शामिल है?
इस कार्यक्रम में सरकारी एजेंसियाँ, वन विभाग, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्थानीय समुदाय मिलकर काम कर रहे हैं। रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर में युवा शोधकर्ताओं ने लगभग एक दशक तक इन पक्षियों का कैप्टिव-ब्रीडिंग के माध्यम से संरक्षण किया।
इस रिहाई का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, इस रिहाई से कैप्टिव-ब्रेड पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने के प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी। यह डेटा भविष्य में और अधिक पक्षियों की रिहाई की योजना बनाने में काम आएगा।
राष्ट्र प्रेस
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