जैसलमेर डेजर्ट नेशनल पार्क में दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड रिहा, भूपेंद्र यादव ने बताया ऐतिहासिक कदम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार किए गए दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। यह रिहाई लगभग एक दशक की वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम बताई जा रही है और इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।
क्या हुआ और कब
मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'एक अहम कदम उठाते हुए, आज सुबह जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम इलाके में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स को छोड़ा गया।' उन्होंने इसे वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ की वर्षों की अथक मेहनत का फल बताया। रिहाई से एक दिन पहले, शनिवार को यादव ने रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर का दौरा कर युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की सराहना की।
संरक्षण कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए पक्षियों को जंगल में छोड़ना 'प्रजाति को बचाने के कार्यक्रम का अगला अहम कदम है।' इससे प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' श्रेणी में रखा गया है, और यह भारत की सबसे खतरे में पड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है।
प्रधानमंत्री को धन्यवाद
मंत्री यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उनके निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मैं पीएम मोदी का लगातार मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं, जिससे हमारी वैज्ञानिक कम्युनिटी जीआईबी समेत सभी प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम कर पा रही है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी जैव विविधता संरक्षण नीतियों को वैश्विक मंचों पर प्रदर्शित करने में सक्रिय रहा है।
वैज्ञानिक महत्व
गौरतलब है कि यह संरक्षण कार्यक्रम सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है। कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार पक्षियों को जंगल में पुनर्स्थापित करने की यह विधि न केवल GIB की आबादी बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में इसी तरह की अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए मॉडल भी बन सकती है।
आगे की राह
मंत्रालय के अनुसार, इस रिहाई के बाद प्राप्त वैज्ञानिक डेटा का उपयोग पक्षियों को प्राकृतिक आवास में वापस लाने के प्रोटोकॉल को और परिष्कृत करने में किया जाएगा। दीर्घकालिक लक्ष्य कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार और अधिक पक्षियों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में वापस भेजना है, ताकि जैसलमेर के रेगिस्तान में GIB की स्थायी आबादी फिर से स्थापित हो सके।