ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण में ऐतिहासिक कदम: जैसलमेर में दो GIB जंगल में छोड़े, भूपेंद्र यादव ने की वैज्ञानिकों की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 4 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। यह उपलब्धि करीब एक दशक की अटूट वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम है, जिसे देशभर के संरक्षण विशेषज्ञ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बता रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार सुबह केंद्रीय मंत्री यादव ने सैम डेजर्ट नेशनल पार्क, जैसलमेर में दोनों GIB को आज़ाद किया। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान वैज्ञानिक डॉ. सुतीर्थ दत्ता, डॉ. तुषना करकरिया और ऋषिका शर्मा भावुक हो गए। मंत्री यादव ने स्वयं एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'जब राजस्थान के सैम, डेजर्ट नेशनल पार्क में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स को जंगल में छोड़ा गया, तो डॉ. सुतीर्थ दत्ता, डॉ. तुषना करकरिया और ऋषिका शर्मा भावुक हो गए। कोई सोच भी सकता है कि कैसे कुछ लोग निस्वार्थ कामों के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर देते हैं।'
इससे एक दिन पहले शनिवार को मंत्री यादव ने रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया था और युवा शोधकर्ताओं व वैज्ञानिकों की संरक्षण कोशिशों की प्रशंसा की थी।
वैज्ञानिकों की सराहना
मंत्री यादव ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, 'उनकी और उस पूरी टीम की तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे, जिन्होंने इसे मुमकिन बनाया है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह बड़ी कामयाबी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ की लगभग एक दशक की अटूट लगन से संभव हो पाई है। साथ ही मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का वैज्ञानिक महत्व
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ में स्पष्ट किया कि कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए GIB को जंगल में छोड़ना, प्रजाति संरक्षण कार्यक्रम का अगला अहम चरण है। मंत्रालय के अनुसार, इससे कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने के प्रोटोकॉल को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी।
गौरतलब है कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत का एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी है, जिसकी आबादी में पिछले कुछ दशकों में भारी गिरावट आई है। यह संरक्षण कार्यक्रम कैप्टिव ब्रीडिंग और जंगल में पुनर्स्थापन — दोनों पहलुओं को एकसाथ आगे बढ़ा रहा है।
आम जनता और पर्यावरण पर असर
GIB की संख्या में होती गिरावट राजस्थान और गुजरात के शुष्क घास के मैदानों की पारिस्थितिकी के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। यह पहल न केवल एक दुर्लभ प्रजाति को बचाने की दिशा में एक सफल कदम है, बल्कि भारत की जैव विविधता संरक्षण क्षमताओं को भी वैश्विक मंच पर रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर ज़ोर दे रहा है।
क्या होगा आगे
मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आगे चलकर और अधिक कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा GIB को उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेजना है। इस पहले चरण से मिली वैज्ञानिक जानकारी भविष्य के पुनर्स्थापन प्रयासों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में सहायक होगी। वैज्ञानिक समुदाय इस अनुभव से सीखते हुए दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार करेगा।