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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की रीवाइल्डिंग शुरू: जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क से दो जीआईबी जंगल में छोड़े गए

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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की रीवाइल्डिंग शुरू: जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क से दो जीआईबी जंगल में छोड़े गए

सारांश

विलुप्ति की कगार पर खड़े ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए एक दशक की कोशिशें अब फल दे रही हैं — जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में दो कैप्टिव ब्रेड जीआईबी पक्षियों को जंगल में छोड़ा गया। ₹9.25 करोड़ की बिना खंभों वाली विशेष एवियरी से शुरू हुई यह रीवाइल्डिंग यात्रा थार के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक नई उम्मीद है।

मुख्य बातें

जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में 3 अक्टूबर 2026 को कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को रीवाइल्डिंग प्रक्रिया के तहत जंगल में छोड़ने की शुरुआत हुई।
रामदेवरा में निर्मित विशेष रीवाइल्डिंग एवियरी बिना खंभों की है; निर्माण लागत ₹9.25 करोड़ राजस्थान सरकार ने वहन की।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे एक दशक की संरक्षण यात्रा की बड़ी उपलब्धि बताया और WII के वैज्ञानिकों व स्थानीय समुदायों की भूमिका सराही।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल होकर इसे 'प्रदेश के लिए गर्व का दिन' बताया।
जीआईबी थार पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण प्रजाति है और मध्य एशियाई फ्लाईवे के प्रवासी पक्षियों के लिए भी प्रमुख पड़ाव का काम करती है।
संरक्षण कार्यक्रम से स्थानीय समुदायों को इको टूरिज्म के जरिए आर्थिक लाभ मिलने की भी उम्मीद है।

राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में 3 अक्टूबर 2026 को एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार किए गए दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) को सॉफ्ट रिलीज सुविधा से प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया आरंभ की गई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस अवसर पर कहा कि जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम अब रीवाइल्डिंग के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है, जो पिछले एक दशक की अथक मेहनत का परिणाम है।

रीवाइल्डिंग का महत्व और प्रक्रिया

सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया के तहत कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार पक्षियों को सीधे जंगल में छोड़ने की बजाय पहले एक विशेष रीवाइल्डिंग एवियरी में रखा जाता है, जहाँ वे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलते हैं। रामदेवरा में स्थापित यह एवियरी बिना खंभों के बनाई गई है, जिससे पक्षियों को उड़ान भरने के लिए पर्याप्त खुला आकाश उपलब्ध होता है। इस अनूठी संरचना का निर्माण राजस्थान वन विभाग ने राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से कराया है, जिसके लिए राज्य सरकार ने ₹9.25 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था।

इस एवियरी को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों की सलाह पर तैयार किया गया है। यहाँ पक्षियों को अपनी उड़ान क्षमता विकसित करने, प्राकृतिक व्यवहार सीखने और जंगल के वातावरण के अनुकूल होने का अवसर दिया जाता है।

एक दशक की संरक्षण यात्रा

गौरतलब है कि एक समय विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को बचाने के लिए लगभग दस वर्ष पहले कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इस यात्रा पर तैयार एक ब्रोशर भी कार्यक्रम के दौरान जारी किया गया। रामदेवरा और सम में स्थित जीआईबी कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर की प्रगति की समीक्षा भी इस अवसर पर की गई।

भूपेंद्र यादव ने इस कार्यक्रम की सफलता में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, वन विभाग के अधिकारियों, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों को श्रेय दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह संरक्षण कार्यक्रम अब दुनिया के लिए एक आदर्श उदाहरण बन चुका है।

राजस्थान सरकार की भूमिका

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने राज्य पक्षी की रीवाइल्डिंग को "पूरे प्रदेश के लिए गर्व का दिन" बताया। शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से थार की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहे इस पक्षी को विलुप्त होने से बचाने में सफलता मिली है। राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा सहित केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

पारिस्थितिकी और आर्थिक महत्व

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड थार के पारिस्थितिकी तंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजाति है। उन्होंने घास के मैदानों के संरक्षण, भूमि क्षरण रोकने और मध्य एशियाई फ्लाईवे से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए जीआईबी के आवास की भूमिका को रेखांकित किया।

यादव ने यह भी बताया कि इस संरक्षण कार्यक्रम की सफलता से पर्यावरणीय लाभ के साथ साथ स्थानीय समुदायों को इको टूरिज्म के माध्यम से आर्थिक अवसर भी मिलेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब जीआईबी की संख्या गंभीर रूप से कम होने के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया जा चुका है।

आगे क्या होगा

रीवाइल्डिंग एवियरी में रखे गए दो जीआईबी पक्षियों को पूरी तरह से प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया रविवार को पूर्ण होनी थी। इस कार्यक्रम की सफलता भविष्य में और अधिक कैप्टिव ब्रीडिंग पक्षियों को जंगल में छोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे थार के रेगिस्तान में इस दुर्लभ प्रजाति की आबादी को धीरे धीरे पुनर्स्थापित किया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — कैप्टिव ब्रीडिंग से जंगल तक का सफर दुनियाभर में कई प्रजातियों के लिए अत्यंत कठिन साबित हुआ है। भारत में जीआईबी की कुल संख्या अभी भी अनुमानित रूप से 150 से कम बताई जाती है, और ओवरहेड बिजली लाइनों से टकराने का खतरा अब भी बना हुआ है — एक ऐसी समस्या जिसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद पूरी तरह हल नहीं किया जा सका है। केवल दो पक्षियों को छोड़ना प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, किंतु प्रजाति की दीर्घकालिक पुनर्स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर सफल रीवाइल्डिंग, निरंतर निगरानी और ऊर्जा अवसंरचना से जुड़े ढाँचागत सुधार अनिवार्य होंगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) रीवाइल्डिंग कार्यक्रम क्या है?
यह राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में चलाया जा रहा संरक्षण कार्यक्रम है, जिसके तहत कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षियों को विशेष एवियरी के माध्यम से प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाकर जंगल में वापस छोड़ा जाता है। 3 अक्टूबर 2026 को दो जीआईबी पक्षियों को इस प्रक्रिया के तहत सॉफ्ट रिलीज किया गया।
रीवाइल्डिंग एवियरी क्या है और यह कहाँ बनाई गई है?
रामदेवरा, राजस्थान में बनाई गई यह विशेष एवियरी बिना खंभों के निर्मित है, जिससे पक्षी स्वतंत्र रूप से उड़ान भर सकें और प्राकृतिक व्यवहार सीख सकें। इसे राजस्थान वन विभाग ने ₹9.25 करोड़ की लागत से बनवाया है और WII के वैज्ञानिकों की सलाह पर तैयार किया गया है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को क्यों बचाना जरूरी है?
जीआईबी थार के पारिस्थितिकी तंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजाति है, जो घास के मैदानों के स्वास्थ्य का सूचक है और मध्य एशियाई फ्लाईवे के प्रवासी पक्षियों के लिए प्रमुख पड़ाव का काम करती है। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत संकटग्रस्त घोषित है और इसकी कुल संख्या 150 से भी कम बताई जाती है।
इस संरक्षण कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार की क्या भूमिका रही है?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया, जबकि राजस्थान सरकार ने ₹9.25 करोड़ की रीवाइल्डिंग एवियरी का निर्माण कराया। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्थल का दौरा किया और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े।
इस कार्यक्रम से स्थानीय समुदायों को क्या फायदा होगा?
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम की सफलता से स्थानीय समुदायों को इको टूरिज्म के माध्यम से आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही थार के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य में सुधार से क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों को भी दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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