गुजरात में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई: 15 दिन के अभियान में 38 चिह्नित, 35 एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने राज्यव्यापी 15 दिवसीय अभियान के तहत बिना मान्यता प्राप्त योग्यता के चिकित्सा करने वाले 38 संदिग्ध फर्जी डॉक्टरों की पहचान की है और इनमें से 35 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को गांधीनगर में यह जानकारी दी। यह अभियान गुजरात में अवैध चिकित्सा पद्धति के विरुद्ध अब तक के सबसे व्यापक प्रशासनिक प्रयासों में से एक माना जा रहा है।
अभियान की रूपरेखा
विभाग द्वारा गठित 298 संयुक्त टीमों ने स्थानीय पुलिस, अपराध शाखा और विशेष अभियान समूह (एसओजी) के साथ समन्वय करते हुए राज्य के सभी जिलों में निरीक्षण किया। यह अभियान अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) राजीव तोपनो और स्वास्थ्य आयुक्त रतनकंवर गढ़वी के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में चलाया गया। प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समितियों का गठन भी किया गया है, जिनमें तालुका स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी, पुलिस सब-इंस्पेक्टर, हेड कांस्टेबल, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और तलती-सह-मंत्री शामिल हैं।
जिलेवार मामले
राजकोट में सर्वाधिक 17 संदिग्ध फर्जी डॉक्टर चिह्नित किए गए। इसके बाद सूरत में 9, गिर सोमनाथ में 3 और सुरेंद्रनगर में 2 मामले सामने आए। मंत्री पानशेरिया के अनुसार, शेष मामले अन्य जिलों से एक-एक करके दर्ज हुए, जिससे कुल एफआईआर की संख्या 35 हो गई।
फरार संदिग्धों पर नज़र
अभियान के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कुछ संदिग्ध चिकित्सकों ने संयुक्त टीमों के पहुँचने से पहले ही अपने क्लीनिक और औषधालय बंद कर भागने की कोशिश की। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ऐसे संदिग्धों की तलाशी और निगरानी जारी रखे हुए हैं, ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी की जा सके। गौरतलब है कि इन समितियों को स्थानीय मुखबिरों की सूचनाओं के आधार पर भी कार्रवाई का अधिकार दिया गया है।
आम नागरिकों पर असर और सरकार की अपील
मंत्री पानशेरिया ने नागरिकों, गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे बिना मान्यता प्राप्त डिग्री के चिकित्सा करने वाले किसी भी संदिग्ध की सूचना निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), पुलिस स्टेशन या एसओजी में दें। उन्होंने कहा, 'सरकारी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुफ्त इलाज, दवाएं और प्रयोगशाला निदान परीक्षण प्रदान करते हैं। अयोग्य चिकित्सकों द्वारा उपचार से मरीजों को स्थायी नुकसान हो सकता है और उनके जीवन को खतरा हो सकता है।' मंत्री ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि वे केवल एमबीबीएस, आयुर्वेद, होम्योपैथी या अन्य सरकारी मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम धारक पंजीकृत चिकित्सकों से ही इलाज कराएं।
अभियान आगे भी जारी रहेगा
पानशेरिया ने स्पष्ट किया कि यह अभियान दीपावली और त्योहारों के बाद भी निरंतर जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अयोग्य चिकित्सकों द्वारा इलाज के कारण मरीजों के नुकसान की घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। अभियान की निरंतरता इस बात का संकेत देती है कि सरकार इस मुद्दे पर दीर्घकालिक नीति के तहत कदम उठा रही है।