5 नवंबर 2026
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गिरनार लिली परिक्रमा 20 नवंबर से: जूनागढ़ प्रशासन ने किया मार्ग निरीक्षण, पानी की कमी पर अलर्ट

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गिरनार लिली परिक्रमा 20 नवंबर से: जूनागढ़ प्रशासन ने किया मार्ग निरीक्षण, पानी की कमी पर अलर्ट

सारांश

गुजरात के जूनागढ़ में 20 नवंबर से शुरू होने वाली गिरनार लिली परिक्रमा के लिए प्रशासन और संतों ने मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया। इस बार कम वर्षा के कारण सतही जल उपलब्ध नहीं है — नए बोरवेल तैयार किए जा रहे हैं और बुजुर्गों व बच्चों से परिक्रमा टालने की अपील की गई है।

मुख्य बातें

गिरनार लिली परिक्रमा 20 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि से 24 नवंबर तक आयोजित होगी।
जिला प्रशासन , साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने 5 नवंबर को परिक्रमा मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया।
इस वर्ष कम वर्षा के कारण नदियाँ और सतही जल स्रोत सूखे हैं; प्रशासन ने नए बोरवेल तैयार किए हैं।
गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश पर परिक्रमा मार्ग पर प्लास्टिक ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
कलेक्टर योगेश चौधरी ने बुजुर्गों और बच्चों को इस बार परिक्रमा टालने की अपील की।
पिछली परिक्रमा भारी वर्षा के कारण रद्द की गई थी; इस बार मौसम अनुकूल है लेकिन जल संकट चुनौती बना हुआ है।

गुजरात के जूनागढ़ में 20 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि से शुरू होने वाली गिरनार लिली परिक्रमा की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। 5 नवंबर को जिला प्रशासन, साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से परिक्रमा मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया और पेयजल, सुरक्षा व अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। इस वर्ष कम वर्षा के कारण जल संकट एक प्रमुख चुनौती बनकर उभरा है।

परिक्रमा का कार्यक्रम और श्रद्धालुओं की भागीदारी

गिरनार लिली परिक्रमा 20 नवंबर की मध्यरात्रि 12 बजे से आरंभ होगी और 24 नवंबर तक जारी रहेगी। पाँच दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। प्रशासन ने अगले 15 दिनों में परिक्रमा मार्ग पर सुविधाएँ और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा है।

गौरतलब है कि पिछली बार भारी वर्षा के कारण यह परिक्रमा रद्द करनी पड़ी थी। इस बार मौसम अनुकूल है, किंतु वर्षा की कमी ने पेयजल की उपलब्धता पर दबाव डाला है।

पेयजल संकट और प्रशासन की तैयारी

कलेक्टर योगेश चौधरी ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार वर्षा काफ़ी कम हुई है, जिसके कारण परिक्रमा मार्ग पर बहने वाली नदियाँ और सतही जल स्रोत इस वर्ष उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'परिक्रमा के समय पीने के पानी की समस्या न रहे, इसके लिए प्रशासन की ओर से नए बोरवेल तैयार किए जा रहे हैं। हम यह विश्वास दिलाते हैं कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को पानी की समस्या नहीं होगी।'

संत इंद्रभारती बापू ने बताया कि कई बोरवेल सूख चुके हैं और पानी की कुछ कमी है। उन्होंने कहा, 'संतों, प्रशासन, सांसद, विधायक और सभी पदाधिकारियों ने मिलकर गिरनार परिक्रमा के मार्ग का निरीक्षण किया। वन विभाग और उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया है कि जंगल के अंदर कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक नहीं ले जा सकता।'

पर्यावरण संरक्षण और हाईकोर्ट के निर्देश

गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के तहत परिक्रमा मार्ग पर प्लास्टिक ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। वन विभाग ने यह भी अपील की है कि जंगल में सूखे पत्तों की अधिकता को देखते हुए श्रद्धालु धूणा और चूल्हा जलाते समय विशेष सावधानी बरतें, ताकि आग लगने जैसी किसी दुर्घटना से बचा जा सके।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर न्यायालयों और प्रशासन की सक्रिय भूमिका बढ़ रही है।

बुजुर्गों और बच्चों को सावधानी की अपील

कलेक्टर योगेश चौधरी ने पानी की कमी और बढ़ते तापमान को देखते हुए बुजुर्गों और छोटे बच्चों से इस बार परिक्रमा टालने की अपील की है। उन्होंने कहा, 'हम सभी से अपील करते हैं कि जो बुजुर्ग हैं और बच्चे हैं, वे अपनी परिक्रमा टाल सकते हैं।' यह अपील श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए की गई है।

प्रशासन ने आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि वन विभाग द्वारा तैयार परिक्रमा मार्ग पर व्यवस्थाएँ संतोषजनक पाई गई हैं और आगामी दिनों में इन्हें और सुदृढ़ किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कम वर्षा से उत्पन्न जल संकट एक गंभीर चेतावनी है जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लाखों श्रद्धालुओं के लिए महज़ बोरवेल की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं — इसका जवाब अभी भी अधर में है। बुजुर्गों और बच्चों को 'परिक्रमा टालने' की अपील प्रशासन की सदाशयता दर्शाती है, परंतु यह एक बड़े सवाल को भी उठाती है: क्या प्रशासन को बड़े पैमाने पर भीड़ नियंत्रण और आपात स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त योजना पहले से बनानी चाहिए थी? धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की अनदेखी देश में अनेक हादसों की जड़ रही है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिरनार लिली परिक्रमा 2026 कब शुरू होगी?
गिरनार लिली परिक्रमा 2026 में 20 नवंबर की मध्यरात्रि 12 बजे से शुरू होकर 24 नवंबर तक चलेगी। इस पाँच दिवसीय धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के भाग लेने की उम्मीद है।
गिरनार परिक्रमा मार्ग पर इस बार पानी की व्यवस्था कैसी है?
इस वर्ष कम वर्षा के कारण परिक्रमा मार्ग पर नदियाँ और सतही जल स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। जूनागढ़ प्रशासन ने नए बोरवेल तैयार किए हैं और कलेक्टर योगेश चौधरी ने आश्वस्त किया है कि श्रद्धालुओं को पेयजल की समस्या नहीं होगी।
गिरनार परिक्रमा मार्ग पर प्लास्टिक प्रतिबंध क्यों है?
गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के तहत परिक्रमा मार्ग पर प्लास्टिक ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और जंगल में आग से बचाव के लिए यह नियम सख्ती से लागू किया है।
क्या बुजुर्ग और बच्चे इस बार गिरनार परिक्रमा में शामिल हो सकते हैं?
प्रशासन ने बुजुर्गों और छोटे बच्चों से इस बार परिक्रमा टालने की अपील की है। पानी की कमी और बढ़ते तापमान को देखते हुए कलेक्टर योगेश चौधरी ने यह सुझाव दिया है, हालाँकि कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
पिछली गिरनार लिली परिक्रमा क्यों रद्द की गई थी?
पिछली गिरनार लिली परिक्रमा भारी वर्षा के कारण रद्द करनी पड़ी थी। इस बार बारिश नहीं हुई है, जिससे मार्ग साफ है, परंतु इसी कारण जल स्रोतों पर दबाव आ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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