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वढ़वाण बांधणी कला: सुरेंद्रनगर की 75% आबादी की आजीविका, देश-विदेश तक पहुँची पहचान

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वढ़वाण बांधणी कला: सुरेंद्रनगर की 75% आबादी की आजीविका, देश-विदेश तक पहुँची पहचान

सारांश

वढ़वाण की बांधणी कला सिर्फ हस्तशिल्प नहीं — यह एक पूरे शहर की अर्थव्यवस्था है। 75% आबादी की आजीविका, महिला सशक्तीकरण का जीवंत मॉडल, और अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच — सुरेंद्रनगर का यह छोटा-सा कस्बा 'वोकल फॉर लोकल' की सबसे सच्ची तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

वढ़वाण तालुका की लगभग 75 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बांधणी उद्योग से जुड़ी है।
महिला कारीगर श्रद्धा बेन के अनुसार, बांधणी काम से प्रतिदिन ₹250 से ₹300 की कमाई होती है और 80% स्थानीय आबादी इस उद्योग पर निर्भर है।
कारोबारी दीपकभाई खत्री अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और बेंगलुरु के थोक बाजारों के साथ-साथ विदेशों में भी बांधणी की आपूर्ति करते हैं।
गुजरात सरकार की केबल स्कीम, डीटीवाई स्कीम और मानव कल्याण योजना के तहत बांधणी कारीगरों को सीधा लाभ मिल रहा है।
साड़ी, दुपट्टे और ड्रेस मटेरियल यहाँ के प्रमुख बांधणी उत्पाद हैं, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में लोकप्रिय हैं।

गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की वढ़वाण तालुका में सदियों पुरानी बांधणी कला आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी पीढ़ियों पहले थी। हाथ की बारीक टाई-डाई तकनीक पर आधारित यह हस्तशिल्प अब केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं रहा — यह वढ़वाण की लगभग 75 फीसदी आबादी की प्रत्यक्ष या परोक्ष आजीविका का मुख्य स्तंभ बन चुका है। साड़ी, दुपट्टे और ड्रेस मटेरियल के रूप में यह कला अब अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, बेंगलुरु के थोक बाजारों से होते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रही है।

महिला कारीगरों की केंद्रीय भूमिका

वढ़वाण में बांधणी उद्योग की असली रीढ़ यहाँ की महिला कारीगर हैं। अधिकांश परिवारों में महिलाएं घरेलू काम के साथ-साथ बांधणी का काम करती हैं और इस प्रकार परिवार की आय में सीधा योगदान देती हैं। स्थानीय कारीगर श्रद्धा बेन ने बताया, "मैं बांधणी का काम करती हूँ और आजीविका चलाती हूँ। घरेलू काम के साथ बांधणी का काम करती हूँ और ₹250 से ₹300 प्रतिदिन कमाती हूँ।" उन्होंने आगे कहा कि वढ़वाण में 80 प्रतिशत लोगों की आजीविका इसी कला से जुड़ी है और इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण महिला रोजगार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। बांधणी उद्योग ने वढ़वाण में महिला आत्मनिर्भरता का एक स्वाभाविक और टिकाऊ मॉडल विकसित किया है।

व्यापार का विस्तार: स्थानीय से वैश्विक

बांधणी कारोबारी दीपकभाई खत्री के अनुसार, उनकी डाइंग फैक्ट्री में तैयार माल अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और बेंगलुरु के थोक बाजारों में भेजा जाता है और वहाँ से यह विदेशों तक पहुँचता है। उन्होंने कहा, "हमारी बांधणी इंडस्ट्री विदेश में भी फैल रही है।" बांधणी के पारंपरिक रंग और डिजाइन आज बदलते बाजार की माँग के अनुरूप नए रूप ले रहे हैं, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों संतुष्ट हैं।

गौरतलब है कि वढ़वाण की बांधणी की एक विशेषता यह भी है कि यह गर्मियों में पहनने में अत्यंत आरामदायक होती है, जो इसे मौसमी माँग के लिहाज से भी प्रासंगिक बनाती है। एक स्थानीय खरीदार ने कहा कि "वढ़वाण जैसी बांधणी आपको कहीं और नहीं मिलेगी — इसका ट्रेंड कभी कम नहीं होता।"

सरकारी योजनाओं का लाभ

गुजरात सरकार ने हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। उप उद्योग आयुक्त एस.बी. परेजिया ने बताया कि राज्य सरकार की केबल स्कीम, डीटीवाई स्कीम और मानव कल्याण योजना जिला उद्योग कार्यालय के माध्यम से लागू की जाती हैं। उन्होंने कहा, "वढ़वाण तालुका में बांधणी के काम में लगे कर्मचारी भी इन योजनाओं का लाभ उठाते हैं।"

केंद्र सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान ने भी इस उद्योग को नई गति दी है। इन दोनों के संयुक्त प्रभाव से वढ़वाण की बांधणी को बाजार में नई पहचान और विस्तार मिल रहा है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

बांधणी उद्योग ने वढ़वाण की स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार दिया है। साड़ी, दुपट्टे और ड्रेस मटेरियल यहाँ के प्रमुख उत्पाद हैं जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में माँग में हैं। यह उद्योग महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है। आने वाले वर्षों में सरकारी समर्थन और बढ़ते निर्यात के साथ वढ़वाण की बांधणी कला और अधिक वैश्विक पहचान हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उसमें बाजार की मंदी या कच्चे माल की कीमतों में उछाल पूरे कस्बे की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। सरकारी योजनाएं मौजूद हैं, पर यह स्पष्ट नहीं है कि इनकी पहुँच और उपयोग की दर कितनी है। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए बांधणी उद्योग को विविधीकरण और डिजिटल बाजार से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि यह धरोहर अगली पीढ़ी तक भी उतनी ही मजबूती से पहुँचे।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वढ़वाण की बांधणी कला क्या है और यह कहाँ बनती है?
वढ़वाण की बांधणी एक पारंपरिक हाथ-निर्मित टाई-डाई हस्तशिल्प है जो गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की वढ़वाण तालुका में सदियों से बनाई जा रही है। साड़ी, दुपट्टे और ड्रेस मटेरियल इसके प्रमुख उत्पाद हैं, जो देश-विदेश में निर्यात होते हैं।
वढ़वाण में बांधणी उद्योग से कितने लोग जुड़े हैं?
वढ़वाण की लगभग 75 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बांधणी उद्योग से जुड़ी है। स्थानीय कारीगरों के अनुसार, इस उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं जो घरेलू काम के साथ-साथ यह हस्तशिल्प करती हैं।
बांधणी कारीगरों को गुजरात सरकार की कौन-सी योजनाओं का लाभ मिलता है?
उप उद्योग आयुक्त एस.बी. परेजिया के अनुसार, केबल स्कीम, डीटीवाई स्कीम और मानव कल्याण योजना जिला उद्योग कार्यालय के माध्यम से लागू की जाती हैं और वढ़वाण के बांधणी कारीगर इनका लाभ उठा सकते हैं।
वढ़वाण की बांधणी किन बाजारों में बिकती है?
वढ़वाण की बांधणी अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और बेंगलुरु के थोक बाजारों में आपूर्ति की जाती है और वहाँ से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भी पहुँचती है। स्थानीय कारोबारी दीपकभाई खत्री के अनुसार, यह उद्योग अब विदेशों में भी अपनी पहुँच बढ़ा रहा है।
बांधणी उद्योग महिला सशक्तीकरण में कैसे योगदान दे रहा है?
वढ़वाण में अधिकांश परिवारों की महिलाएं बांधणी का काम करती हैं और प्रतिदिन ₹250 से ₹300 तक कमाती हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आय में सीधा योगदान दे रही हैं। यह उद्योग ग्रामीण महिला रोजगार का एक स्वाभाविक और टिकाऊ मॉडल प्रस्तुत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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