गांधीनगर में 'गरवी गुरजारी' शोरूम का उद्घाटन, पारंपरिक शिल्प कारीगरों को मिलेगा बड़ा बाज़ार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के गांधीनगर के कुडासन में 10 अगस्त 2026 को राज्य सरकार के प्रमुख हस्तशिल्प ब्रांड 'गरवी गुरजारी' के नए शोरूम का उद्घाटन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प और आदिवासी कला को व्यापक खरीदार वर्ग तक पहुँचाना और गुजरात के स्थानीय कारीगरों के लिए बाज़ार के नए रास्ते खोलना है।
उद्घाटन समारोह
खादी, कुटीर और ग्रामीण उद्योग मंत्री नरेश पटेल ने राज्य मंत्री स्वरूपजी ठाकोर की उपस्थिति में इस शोरूम का विधिवत उद्घाटन किया। समारोह में कुटीर और ग्रामीण उद्योग के प्रधान सचिव एवं आयुक्त मोहम्मद शाहिद, गुजरात राज्य हथकरघा और हस्तशिल्प निगम (गरवी गुरजारी) की प्रबंध निदेशक आर्द्रा अग्रवाल, सरकारी अधिकारी, कला प्रेमी और गांधीनगर के स्थानीय निवासी उपस्थित रहे।
शोरूम में क्या मिलेगा
इस आउटलेट का संचालन गुजरात राज्य हथकरघा और हस्तशिल्प विकास निगम लिमिटेड करेगा। शोरूम में राज्य के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें हथकरघा वस्त्र, हस्तशिल्प, कढ़ाई, मिट्टी के बर्तन, धातु की कलाकृतियाँ, घर की सजावट का कलात्मक सामान और आदिवासी कला एवं शिल्प उत्पाद शामिल हैं।
सरकार की मंशा और मंत्री का बयान
मंत्री नरेश पटेल ने कहा कि राज्य सरकार हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' के आह्वान को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, पाटन, सुरेंद्रनगर, राजकोट और कच्छ के कारीगर इन पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। नया शोरूम गुजरात, देश के अन्य हिस्सों और विदेशों के लोगों को इन उत्पादों तक पहुँचने का मौका देगा।
पटेल ने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल से युवा पीढ़ी को पारंपरिक शिल्प की ओर आकर्षित करने और हस्तशिल्प क्षेत्र में रोज़गार के अतिरिक्त अवसर पैदा करने में सहायता मिलेगी।
कारीगरों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग सस्ते मशीन-निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि गरवी गुरजारी पहले से ही गुजरात के कई शहरों में कार्यरत है, और कुडासन में यह नया आउटलेट राजधानी क्षेत्र में कारीगरों की पहुँच को और विस्तृत करेगा। पटेल के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य न केवल विलुप्त होने के कगार पर खड़े पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करना है, बल्कि कारीगरों और कलाकारों को बेहतर बाज़ार अवसर, पहचान और आत्मनिर्भरता के रास्ते भी उपलब्ध कराना है।
आगे क्या
राज्य सरकार की यह कोशिश 'गुजरात की सांस्कृतिक पहचान' को व्यावसायिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि नया शोरूम घरेलू पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी खरीदारों को भी आकर्षित करेगा, जिससे कारीगरों की आमदनी में सुधार हो सकता है।