हस्तशिल्प विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में काम जारी: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर घोषणा की कि प्रदेश में हस्तशिल्प विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के माध्यम से बुनकरों, शिल्पकारों और उनके परिवारों को शिक्षा, कौशल विकास तथा रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। राजभवन स्थित जनभवन, लखनऊ में आयोजित इस समारोह में उन्होंने प्रदेश के 13 जिलों के बुनकरों और शिल्पकारों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाबार्ड के सहयोग से आयोजित हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी में बागपत, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, बाराबंकी, आजमगढ़, कानपुर, लखनऊ, फर्रुखाबाद, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, हापुड़ और उन्नाव के कारीगरों की कृतियों का अवलोकन किया। उन्होंने हस्तनिर्मित वस्त्रों और उत्पादों की गुणवत्ता एवं कलात्मकता की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। साथ ही बुनकरों से सीधे संवाद कर उनके उत्पादों के विपणन, बिक्री और आजीविका से जुड़ी चुनौतियों को समझा।
शिल्पकारों को मिली नई पहचान
राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में अब तक 17 हस्तशिल्पियों को डी.लिट. की मानद उपाधि प्रदान की जा चुकी है। यह पहल स्थानीय शिल्प को शैक्षणिक मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि 'क्राफ्ट्स रूट्स' संस्था कारीगरों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर कार्यरत है।
पूर्वांचल की 'ग्रीन आर्मी' की भूमिका
आनंदीबेन पटेल ने बताया कि पूर्वांचल में 'ग्रीन आर्मी' से जुड़ी लगभग 2,500 महिलाएं परित्यक्त वस्त्रों से बैग और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन महिलाओं को सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे उनकी आय और उत्पादों की बिक्री दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण का भी उदाहरण बन रही है।
क्राफ्ट्स रूट्स संस्था का योगदान
समारोह में 'क्राफ्ट्स रूट्स' की संस्थापक अनारबेन पटेल ने बताया कि संस्था के माध्यम से देशभर में लगभग 75 हजार महिलाएं हस्तशिल्प और स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ी हैं। संस्था उन्हें कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके उत्पादों के विपणन और बाजार उपलब्ध कराने में भी सहयोग कर रही है। उल्लेखनीय है कि भारतीय पारंपरिक शिल्प और हस्तकला के अध्ययन के लिए विदेशों से भी विद्यार्थी इस संस्था में इंटर्नशिप करने आते हैं।
आगे की राह
राज्यपाल ने बुनकरों और शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक वर्ष फरवरी के प्रथम सप्ताह में जनभवन में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी में भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करें, जिससे उन्हें व्यापक बाजार और अधिक खरीदार मिल सकें। यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए संस्थागत समर्थन की सबसे अधिक जरूरत है।